क्रिकेट टीम इंडिया के सबसे सफल कप्तानों में से एक कपिल देव जी का आज 59वां जन्मदिन है। वह भारतीय युवाओं क्रिकेटरों के प्रेरणा स्रोत हैं, उनका जन्म 6 जनवरी 1959 को चंडीगढ़ में हुआ था। 1983 वर्ल्ड कप विजेता टीम इंडिया के कप्तान और विश्व क्रिकेट के सबसे महान ऑलराउंडर में से एक टीम इंडिया को पहला वर्ल्ड कप जिताया था।
कपिल देव का पूरा नाम कपिल देव निखंज है। भारत में नई गेंद से विरोधी टीम के विकेट गिराने के दौर को, कपिल ने फैसलाबाद से जो सफर शुरू किया वह केवल पांच साल में लॉर्ड्स की उस बालकनी में पहुंच गया जहां पहले कपिल और दूसरे भारतीय खिलाड़ी शैम्पेन की बोतलें खोलते नजर आए तो थोड़ी देर बाद उनके हाथ में एक सच हुआ सपना था। भारत विश्व कप विजेता बन चुका था और कप कपिल के हाथों में था।
कपिल ने 1978 में भारत के लिए खेलना शुरू किया और केवल पांच साल लगे उन्हें भारत को विश्व कप दिलाने में। गेंदबाजी का ज्यादा बोझ पड़ने से कपिल समय से पहले ‘ओवर बोल्ड’ हो गए लेकिन जीतने का अंदाज सिखा दिया। क्या लुत्फ आता था कभी इमरान तो कभी बाथम के साथ कपिल का मुकाबला देखने में।
शादी का प्रस्ताव भी दिया तो स्टाइलिश अंदाज में:
एक समय की बात है जब कपिल ट्रेन में सफर कर रहे थे, तब ट्रेन में एक खूबसूरत लड़की गुजरी, तब कपिल ने एक लड़की से कहा, ‘क्या तुम इस जगह की तस्वीर लेना चाहोगी, जो हम अपने बच्चों को दिखा सकें। दरअसल उस लड़की का नाम रोमी था। रोमी को यह बात समझने में थोड़ी देर लगी कि कपिल उनके सामने शादी का प्रस्ताव रख रहे हैं, लेकिन उन्होंने हां कर दी। कपिल ने ट्रेन में यात्रा के दौरान रोमी के सामने अपना प्रस्ताव अपने ही स्टाईल में रखा।
उन्होंने अपने 16 साल के करियर में 134 टेस्ट मैचों में 434 विकेट लिए। इसके अलावा उन्होंने 8 सेंचुरी के साथ 5248 रन बनाए। कपिल टीम इंडिया के सबसे सफल ऑलराउंडर माने जाते हैं।
कपिल देव ने जब वर्ल्ड कप जीता तो वह देश के लिए इतिहास बन गयें। उन्होंने वेस्टइंडीज जैसी दिग्गज टीम के मुंह से जीत छीन ली थी। टीम इंडिया ने फाइनल मैच में सिर्फ 183 रन बनाए थे, जो वेस्टइंडीज के मजबूत बल्लेबाजी क्रम के आगे कुछ नहीं था। टीम इंडिया की ओर से कोई भी बल्लेबाज 40 का स्कोर पार नहीं कर सका था और वेस्टइंडीज टीम को लगा उनकी जीत सुनिश्चित है। लेकिन फिर कुछ ऐसा हुआ, जिसकी कल्पना किसी ने नहीं की थी। उस समय लाला अमरनाथ और मदन लाल की शानदार गेंदबाजी से 140 पर ही विपक्षी टीम को समेट दिया और टीम इंडिया विश्व विजेता बना।







