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    माता रानी कृपा करों !

    ShagunBy ShagunApril 20, 2021 Featured 1 Comment4 Mins Read
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    Post Views: 690

    नवरात का त्यौहार हिंदुओं में 11 अक्टूबर से मनाया जाने वाला है जिसे हम शारदीय नवरात के रूप में मनाते हैं लेकिन इससे पहले चैत्र नवरात्र जो 13 अप्रैल से प्रारम्भ हो कर 21 अप्रैल 2021 तक मनाया जा रहा है। यह उत्सव श्रद्धा और सबुरी के रंग में सराबाेर होता है। नवरात्र के दिनों में भक्त देवी मां के प्रति विशेष उपासना कर अपनी भक्ति प्रकट करते हैं। नवरात्र के दिनों में लोगों कई तरह से मां की उपासना करते हैं।

    माता के इस पावन पर्व हर कोई उनकी अनुकंपा पाना चाहता है। नवरात्र का व्रत और पावन पर्व वैसे तो वर्ष भर में 4 बार होता है लेकिन यह मुख्यतः दो बार हमारे देश मे मनाये जाने का प्रचलन है। इस चैत्र नवरात के मनाये जाने के पीछे एक विशेष महत्व रखता है। वैसे तो मां दुर्गा की उपासना के लिए सभी समय एक जैसे हैं और दोनों नवरात्रि का प्रताप भी एक ही जैसा होने के साथ ही दोनों नवरात्र में मां की पूजा करने वाले भक्तों को उनकी विशेष अनुकंपा भी एक समान रूप से प्राप्त होती है।

    हम आप मे से बहूत ही कम लोगों को यह ज्ञात होगा कि एक साल में नवरात्र के 4 बार पड़ते हैं। साल के प्रथम मास चैत्र में पहली नवरात्र होती है, फिर चौथे माह आषाढ़ में दूसरी नवरात्र पड़ती है। इसके बाद अश्विन माह में में प्रमुख शारदीय नवरात्र होती है। साल के अंत में माघ माह में गुप्त नवरात्र होते हैं। इन सभी नवरात्रों का उल्लेख देवी भागवत एवं अन्य धार्मिक ग्रंथों में मिलता है। हिंदी कैलेंडर के हिसाब से चैत्र माह से हिंदू नववर्ष की भी शुरुआत होती है, और इसी दिन से नवरात्र की शुरुआत भी होती हैं, लेकिन सर्वविदित है कि इन चारों नवरात में चैत्र और शारदीय नवरात्र प्रमुख होते हैं। एक साल में यह दो नवरात्र मनाए जाने के पीछे की वजह भी अलग-अलग है।

    नवरात्र का उत्सव वर्ष में दो बार मनाने के पीछे आध्यात्मिक, प्राकृतिक एवं पौराणिक कारणों के अनुसार नव संवत्सर में होता है कियूंकि ऐसा उसमे उल्लेख मिलता है कि ब्रह्माजी ने इस दिन को सृष्टि की रचना किया था।

    यदि हम नवरात्र मनाने के पीछे प्राकृतिक कारणों की बात करें तो इन दोनों नवरात्र के समय विशेष कर ऋतु परिवर्तन होता है। ग्रीष्म और शीत ऋतु के प्रारम्भ से पूर्व प्रकृति में एक बड़ा परिवर्तन होता है ऐसा माना जाता है कि प्रकृति माता की इसी शक्ति के उत्सव को आधार मानते हुए नवरात्रि का पर्व को आस्था एवं हर्षो उल्लास के साथ मनाते है। ऐसा प्रतीत होता है कि प्रकृति स्वयं ही इन दोनों समयकाल पर ही नवरात्रि की उत्सव आयोजन के लिए तैयार रहती है कियूंकि उस समय न मौसम अधिक गर्म न अधिक ठंडा होता है। चारो ओर एक आनंदीय वातावरण का अनुभव होता है जिससे इस पर्व की महत्ता को और भी अधिक हो जाती है।

    यदि हम पृथ्वी को उसके भोगौलिक आधार पर दृष्टिपात करें तो मार्च और अप्रैल का महीना एक जैसे ही है, सितम्बर और अक्टूबर महीनों के मध्य भी दिन और रात की लंबाई एक समान होती है, इसलिये इस भौगोलिक समानता के कारण एक वर्ष में इन दो नवरात्रों को मनाने की प्रथा है। प्रकृति में होने वाले इन बदलावों के कारण हम इंशानो के मन मष्तिष्क में भी परिवर्तन होता हैं इसलिये इन नवरात्र में व्रत रखकर शक्ति की उपासना करने से शारीरिक और मानसिक संतुलन बना रहता है।

    चैत्र नवरात्र को मनाने के पीछे दूसरा कारण प्राचीन कथाओं का उल्लेख पुराणों में मिलता है। जिसके अनुसार ग्रीष्मकाल के प्रारम्भ होने से पहले यह नवरात्रि इसलिये मनाया जाता है कियूंकि श्रीराम ने रावण से युद्ध कर उसमे विजयी होने कारण वे भगवती मां का आशीर्वाद लेने के लिये शारदीय नवरात्र की प्रतीक्षा किये बिना ही इस समय दुर्गा देवी की पूजा अर्चना कर उनका आशीर्वाद प्राप्त कर श्रीलंका पर चढ़ाई करने के लिये शक्ति रूपिणी मां भगवती की असमय दुर्गा पूजन का आयोजन किया था इसलिये इस नवरात्रि को अकलबोधन में नवरात्रि पर्व मनाने की परम्परा की शुरुआत हुई लेकिन जहां तक शारदीय नवरात्र की बात करें तो यह ठीक इसके बाद अक्टूबर महीने में मनाया जता है शारदीय दुर्गा पूजा के दौरान उत्तर भारत में नवरात्र के दुर्गापूजा के साथ ही दशमी के दिन रावण पर भगवान श्री राम की विजय का उत्सव विजयदशमी के रूप में भी मनाया जाता है।

    उत्तर भारत में इन दिनों में रामलीला के मंचन किये जाते हैं, तो वहीं पश्चिम बंगाल, त्रिपुरा आदि राज्यों में अलग ही दृश्य होता है। दरअसल यहां भी इस उत्सव को बुराई पर अच्छाई की विजय के रूप में ही मनाया जाता है। ऐसी मान्यता है कि राक्षस महिषासुर का वध करने के कारण ही इसे विजयदशमी के रूप में मनाया जाता है। जिसका उल्लेख पौराणिक ग्रंथों में मिलता है।

    • प्रस्तुति: जी के चक्रवर्ती 

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    1 Comment

    1. Gk on April 28, 2021 5:40 pm

      Dilyhunt में माता रानी वाले लेख में नाम गोल है कियूँ?

      Reply
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