इसमें कोई शक नहीं कि मौजूदा जटिल वैश्विक परिस्थितियों में भारत और अमेरिका, दोनों को ही एक-दूसरे की जरूरत है। इसीलिए भारत अमेरिका को खुश रखना चाहता है और अमेरिका भारत को। सोमवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के भारत दौरे पर यह बात प्रमुख रूप से सामने आई। जहां भारत ने ट्रंप के स्वागत में कोई कमी नहीं रहने देने का पूरा प्रयास किया, वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में भारत के प्रति मित्रता को लेकर अपने देश की प्रतिबद्धता को मजबूत ढंग से रेखांकित करने की पूरी कोशिश की। उनके भाषण में अधिकाधिक पक्षों को समेटने की भरपूर मेहनत थी। यह बात ट्रंप के इस एक वाक्य से ही समझी जा सकती है कि अमेरिका भारत का एक वफादार और निष्ठावान मित्र रहेगा, भव्य स्वागत के लिये शुक्रिया।
हमने धार्मिक स्वतंत्रता के बारे में बात की। पीएम मोदी ने कहा कि वे चाहते हैं कि लोगों को धार्मिक स्वतंत्रता मिले।उन्होंने इसके लिए कड़ी मेहनत की है। मैंने व्यक्तिगत हमलों के बारे में सुना लेकिन इसकी चर्चा नहीं की।- ट्रंप
भारत की प्रशंसा करते हुए उन्होंने यह भी कहा कि लोगों को नियंत्रण में रखकर विकास करने वाले और उन्हें स्वतंत्रता देकर भारत की तरह विकास करने वाले देशों में फर्क है। भारत ने व्यक्तिगत स्वतंत्रता, कानून के शासन, हर इंसान की गरिमा को अपनाया है जहां लोग साथ में सौहार्द के साथ अपने धर्म का पालन कर सकते हैं। पिछले दिनों अखबारों में इस आशय की खबरें आई थीं कि अमेरिकी राष्ट्रपति के दौरे में भारत में धार्मिक सहिष्णुता का मुद्दा भी उठ सकता है। ट्रंप ने ऐसी किसी भी उम्मीद को खारिज करने की भरपूर कोशिश तो की ही है, साथ ही आन्तरिक मुद्दों को भारत का अपना मामला मानने की कोशिश भी की है।

एक अन्य खास बात यह भी मानी जा सकती है कि ट्रंप ने अपने इस दौरे को मुख्य रूप से दोनों देशों के बीच रणनीतिक व व्यापारिक मामलों पर आधारित किया है। दरअसल अमेरिका का हर देश के साथ संबंध का मुख्य आधार व्यापार को विकसित करने का होता है।
इसके बाद वह और मुद्दों को उठाता है। भारत के साथ भी ऐसा ही है और वह इसको समझता भी है। अमेरिका की निगाह इस समय भारत के बड़े पोल्ट्री और डेयरी बाजारों तक अधिक पहुंच बनाने की है तो भारत ने भी व्यापार शुल्क जैसे जटिल मुद्दों को लेकर दबाव बना रखा है। ये बातें भी गलत नहीं हैं। हर देश दूसरे के साथ संबंध को लेकर तमाम विषयों को भी दृष्टिगत रखता है तथा किसी भी रूप में अपने लाभ को सर्वोच्च प्राथमिकता देता है। एक सीधे और खुले खेल की तरह।







