- तीन साल में परिषदीय स्कूलों में बढ़े 50 लाख बच्चे, बना पठन-पाठन का माहौल
- बेसिक शिक्षामंत्री सतीश द्विवेदी ने कहा, योगी सरकार ने चारागाह से पठन-पाठन तक लाया स्कूलों को
उपेन्द्र नाथ राय
लखनऊ, 20 मार्च 2020: सिर्फ मिड-डे मिल तक सीमित हो चुकी बेसिक शिक्षा के सुधार के लिए योगी सरकार ने पिछले तीन सालों में बहुत ही सराहनीय कार्य किये और उसके परिणाम भी दिखने लगे हैं। आज परिषदीय स्कूल सिर्फ मिड-डे-मिल तक ही सीमित न होकर बहुतेरे विद्यालय कान्वेंट स्कूलों को भी मात देने में सक्षम हो चुके हैं। इसका कारण है मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ ही बेसिक शिक्षामंत्री डाक्टर सतीश द्विवेदी का अथक प्रयास, जिसके कारण बेसिक शिक्षा में सपा सरकार में जहां एक करोड़ 25 लाख बच्चे थे, वहीं आज एक करोड़ अस्सी लाख बच्चों का नामांकन है।
इस संबंध में बेसिक शिक्षामंत्री सतीश द्विवेदी ने हिन्दुस्थान समाचार से खास बातचीत में बताया कि जहां सपा या उससे पहले बसपा के शासनकाल में स्कूलों में चारागाह की स्थिति थी, वहीं आज कायाकल्प योजना के तहत 91 हजार 236 स्कूलों में अवस्थापना की पूरी सुविधा मुहैया करा दी गयी है। अतिरिक्त कक्षा कक्ष, बाउंड्री वॉल, गेट, शौचालय, पेयजल व विद्युतीकरण आदि कार्य कराये गए हैं। इसके साथ ही 15 हजार प्राथमिक विद्यालयों और एक हजार उच्च माध्यमिक विद्यालयों को अंग्रेजी माध्यम में परिवर्तित किया गया है।
एक भी विद्यालय नहीं है शिक्षक विहीन:
उन्होंने कहा कि आज पूरे प्रदेश में कोई विद्यालय शिक्षक विहीन नहीं है। हर विद्यालय में शिक्षक की व्यवस्था हो गयी है। योगी आदित्यानाथ की सरकार बनने के बाद लगभग 50 हजार शिक्षकों की भर्तियां हो चुकी हैं। इसके अलावा 69 हजार शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया कोर्ट में लंबित है। कोर्ट द्वारा भी अब फैसला रिजर्व कर लिया गया है। फैसला आने के बाद जल्द ही शिक्षकों की भर्ति प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।
बच्चों को स्वेटर देने की हुई शुरूआत:
डाक्टर सतीश द्विवेदी ने बताया कि पहले स्कूली बच्चों के लिए यूनिफार्म घटिया क्वालिटी का मिलता था, जिससे उनमें हीनभावना पैदा होती थी। अब प्राथमिक स्कूल में गांव, गरीब के अंदर कोई कोई हीनभावना पैदा न हो, इसके लिए सरकार ने कक्षा 01 से 08 तक के सभी बच्चों को निशुल्क पाठ्य पुस्तकें, यूनीफॉर्म, स्कूल बैग, ड्रेस, मोजा देने का कार्य किया। पहले स्वेटर नहीं दिये जाते थे अब स्वेटर भी उपलब्ध कराये जाने लगे।
क्वालिटी युक्त ड्रेस का वितरण:
इसके साथ ही बच्चों के लिए उच्च क्वालिटी का गुणवत्तापरक ड्रेस वितरण किये जा रहे हैं। उन्होंने हिन्दुस्थान समाचार से वार्ता में कहा कि परिषदीय स्कूलों में पहले कभी पैरेंट्स नहीं जाता था। कोई भी वहां की शिक्षा प्रणाली पर भी भरोसा नहीं करता था लेकिन हमने पैरेंट्स-टीचर मिटिंग की भी शुरूआत की, जिससे बच्चों की कमी और अच्छाई का पता चल सके।
पहली बार स्कूलों में शुरू हुआ वार्षिकोत्सव:
उन्होंने कहा कि इस वर्ष स्कूलों में वार्षिकोत्सव की शुरूआत की गयी। इससे बच्चों को किताबी ज्ञान से इतर भी ज्ञान में वृद्धि होगी। अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों की शुरूआत से भी स्कूलों के पढ़ाई पर ज्यादा असर पड़ा है। अब स्कूलों में बच्चे पढ़ने जाते हैं, सिर्फ मिड-डे-मिल के लिए नहीं जाते। स्कूलों में पढ़ाई का माहौल बना है।
हर जिले से एक शिक्षक को पुरस्कृत करने की शुरूआत, हर स्कूल में लाइब्रेरी की व्यवस्था:
डाक्टर सतीश द्विवेदी ने कहा कि हम कड़ाई करके शिक्षकों को स्कूल तो भेज सकते हैं, लेकिन व्यवहार से उनको प्रोत्साहित कर ही हम वहां पठन-पाठन का माहौल बना सकते हैं। इसके लिए हमने हर जिले से एक शिक्षक को पुरस्कृत करने का फैसला किया। इसका असर भी दिख रहा है। इसके साथ ही प्राइमरी स्कूलों के लिए एक छोटा पुस्तकालय हो, इसके लिए पांच रुपये के किताबों की व्यवस्था की जा रही है। वहीं जूनियर स्कूलों के लिए 10 हजार रुपये के एनसीआरटी की किताबों की व्यवस्था की जा रही है।
योगा की शुरुआत:
उन्होंने कहा कि स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ दिमाग की कल्पना संभव है। इसके लिए हमने हर विद्यालय में बच्चों के लिए योगा की शुरूआत की। इससे पठन-पाठन के साथ ही बच्चों में स्वास्थ्य के प्रति भी जागरूकता बढ़ी। आज हर विद्यालय में योगा करते बच्चों को देखा जा सकता है। इसके अलावा सीएसआर के फंड की व्यवस्था की गयी। आज तो कई एनआरआई भी स्कूलों के विकास के लिए अनुदान देने के लिए आगे आ चुके हैं।
योगी सरकार बालिका शिक्षा को प्रोत्साहित करने के लिए है कृतसंकल्पित:
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार बालिका शिक्षा को प्रोत्साहित करने के लिए कृतसंकल्पित है। इसीलिए सरकार ने ग्रेजुएशन स्तर तक की सभी बालिकाओं को निःशुल्क शिक्षा दिलाने के लिए ‘अहिल्याबाई निःशुल्क शिक्षा योजना’ संचालित करने का निर्णय लिया। इसके अलावा विद्यालयों में छात्र-शिक्षक अनुपात सुधारने के साथ-साथ कई अन्य निर्णय भी लिए गए हैं।
शारदा योजना शुरू की:
डाक्टर द्विवेदी ने कहा कि प्रदेश सरकार ने पढ़ाई से वंचित बच्चों के नामांकन और शिक्षा व्यवस्था के लिए ‘शारदा (स्कूल हर दिन आएं)’ योजना शुरू की है। इस योजना के तहत छह से 14 आयु वर्ग के उन बच्चों की तलाश होगी, जिनका अब किसी स्कूल में नामांकन नहीं किया गया हो। इसके साथ ही नामांकन के बाद भी पढ़ाई बीच में छोड़ दी हो। इन आउट ऑफ स्कूल बच्चों को चिह्नित करके 80 हजार 836 बच्चों को प्रवेश दिलवाया गया। इसके साथ ही सामर्थ्य तकनीकी प्रणाली, फाउंडेशनल लर्निंग, लर्निंग आउटकम्स आदि की शुरूआत हुई।
मेधावियों को सम्मानित:
प्रतिभा शिक्षा और विकास का समावेश करते हुए प्रदेश में पहली बार छात्रों को सम्मानित एवं प्रोत्साहित करने के लिए हाईस्कूल और इंटरमीडिएट के मेधावी छात्रों के निवास स्थल के लिए साल 2017 में 24 मेधावी छात्रों तथा वर्ष 2018 में 89 मेधावी छात्रों के निवास स्थलों के मार्ग निर्माण और मरम्मत का कार्य कराया गया है। साल 2019 के 174 मेधावी छात्रों के ग्रामों के लिए कार्ययोजना तैयार कर स्वीकृतियों की कार्रवाई की जा रही है।






