केन्द्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान के निदेशक व वैज्ञानिकों ने बताये कई उपाय
लखनऊ, 14 मार्च 2020: बदलते मौसम, मूसलाधार बारिश और कई जगह गिरे ओले ने आम के किसानों को काफी क्षति पहुंचाई है। कहीं आम के बौर क्षतिग्रस्त हो गए हैं तो किसी किसी स्थान पर खिलते हुए बोरों में मौसम के कारण परागण की समस्या रही है। यह स्थिति लगातार कई दिनों से बादल और कम तापक्रम के कारण परगंकर्ता की कमी से हुई है।
केन्द्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान, लखनऊ के निदेशक डॉ. शैलेन्द्र राजन के अनुसार ऐसे मौसम में किसानों को झुलसा रोग, भुनगा से बचाव के लिए दवाओं का छिड़काव करना जरूरी है। इसके साथ ही उन्होंने बताया कि प्रत्येक छिड़काव की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए घोल में स्टिकर (तरल साबुन) जरूर मिलाये।

- हरदोई में ओलावृष्टि और भारी बारिश से किसानों का हुआ काफी नुकसान, किसानों ने बताया कि मुख्य फसलें गेहूं-सरसों और आम के बौर पूरी तरह तबाह हो गए हैं।
डॉ. राजन ने बताया कि अत्याधिक सर्दी के कारण निकलने वाली बौर में पत्तियों जैसी संरचनायें भी पाई जा रही हैं। इसे वैज्ञानिक मिक्स्ड पेनिकल कहते हैं। यह आमतौर पर बोर के विकास एवं निकलते समय अनुचित तापक्रम के कारण होता है। इस प्रकार के मिश्रित बौर अधिक फल देने में सक्षम हैं।
उन्होंने कहा कि दशहरी के बौर खिलना प्रारंभ हो गया है, जबकि चौसा, आम्रपाली, मल्लिका, सफेदा आदि देर से पकने वाली प्रजातियों के फूल खिलना प्रारम्भ होने में अभी समय शेष है। इस वर्ष हुई अत्यधिक सर्दी और अनेक बार हुई बरसात ने न सिर्फ बौर निकलने की प्रक्रिया में विलंब किया, बल्कि फसल के शत्रुओं को भी प्रभावित किया है। गत वर्ष की अपेक्षा इस वर्ष भुनगा का प्रकोप देर से और कम हुआ है, इससे हानि की संभावना फल सेट होने के बाद (मार्च के अंतिम सप्ताह से) ही हो सकती है। लगातार हो रही वर्षा के चलते बौर, झुलसा से ग्रसित बोर के संबंध में संस्थान के वैज्ञानिक डॉ. प्रभात कुमार शुक्ला ने इस समय आम के बागों में विशेष ध्यान देने हेतु सलाह दी कि इस बीमारी से क्षति की संभावना बनी हुई है।
डॉ. प्रभात कुमार ने बताया कि इससे बचाव हेतु कार्बेंडाज़िम+मेंकोज़ेब दो ग्राम प्रति लीटर या हेकजाकोनाज़ोल एक मिली लीटर प्रति लीटर का छिड़काव लाभकारी होगा। खर्रा के प्रकोप की संभावना थोड़ा गर्मी बढ़ने पर अधिक है। खर्रा से बचाव के लिए सल्फर दो ग्राम या हेकजकोनाज़ोल एक मिली लीटर प्रति लीटर का छिड़काव करना होगा। भुनगा कीट से बचाव के लिए अभी इमिडाक्लोप्रिड एक मिली प्रति तीन लीटर पानी का छिड़काव ठीक है और फल सेट होने के बाद थायामेथोक्जाम के एक ग्राम प्रति तीन लीटर पानी का छिड़काव उत्तम रहेगा। वर्षा के चलते इस वर्ष थ्रिप्स (रुजी) के प्रकोप की संभावना कम है। फिर भी फल सेट होने के बाद निरीक्षण करने अच्छा रहेगा। यदि यह कीट दिखता है तो भुनगा हेतु लागू प्रबंधन इसको भी रोकेगा।
उन्होंने बताया कि मिज कीट का प्रकोप बौर, फल और पत्तियों सभी पर होता है। अन्य कीटों के प्रबंधन के लिए उपयोग किये जा रहे कीट नाशक इसको भी मारते हैं लेकिन अधिक प्रकोप होने पर डाईमेथोएट दो मिली लीटर प्रति लीटर पानी का छिड़काव करें। ध्यान रहे कि खिले बौर पर कीटनाशकों का छिड़काव न करें। प्रत्येक छिड़काव की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए घोल में स्टिकर (तरल साबुन) जरूर मिलाये और रसायन भी विश्वसनीय कंपनी का, विश्वसनीय विक्रेता से ही खरीदें।







