‘संविधान खतरे में है’ का नारा बना संजीवनी, सपा की सोशल इंजीनियरिंग ने भी किया कमाल
राहुल गुप्ता
लखनऊ, 06 जून : यूपी में बीजेपी का मजबूत गढ़ इस 18वीं लोकसभा चुनाव में ढहता नज़र आया है। इंडिया गठबंधन ने यहां आश्चर्यजनक रूप से बढ़त बनाई है। इस बढ़त के कारकों के बारे में हमारे सीनियर कॉपी एडीटर राहुल गुप्ता ने सपा मुलायम सिंह यूथ ब्रिग्रेड के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मनोज यादव से चर्चा की।
इस विषय पर उन्होंने दो कारकों को बहुत ही जिम्मेदार बताया। यूपी में बीजेपी का जनविरोधी रवैया ही सरकार के खिलाफ युवाओं, व्यापारियों और किसानों के आक्रोश का कारण रहा। और दूसरा कारक विपक्ष का एक नारा रहा ‘संविधान खतरे में है’। इस नारे के कारण दलित, पिछड़े और अतिपिछड़े मतदाताओं का एकजुट मत इंडिया गठबंधन के प्रत्याशियों के पाले में गया।
युवा सपा नेता ने आगे बताया कि वो पूरे चुनाव के दौरान वा उससे पहले भी यूपी के लगभग सभी जिलों में अपनी सक्रिय भूमिका निभाई, लोगों के बीच में उठना बैठना रहा। पहले संगठन की मजबूती के लिए वा फिर चुनाव में प्रचार प्रसार के लिए। इस दौरान जनता की जो समस्याएं निकल कर सामने आईं। हम लोगों ने उन्हीं समस्याओं और उसके समाधानों का आश्वासन लेकर जनता के बीच काम किए हैं।
सपा की यूपी में बड़ी जीत के लिए इन अन्य कारकों ने भी इस परिवर्तन में अपनी बड़ी सहायक भूमिका निभाई है।

अग्निवीर योजना के खिलाफ युवाओं में आक्रोश, चुनाव के शुरूआती दौर में इलेक्ट्रोरल बॉन्ड का घपला आना और कोविड वैक्सीन के दुष्प्रभावों का भी ब्रिटिश कोर्ट द्वारा सामने लाना, नौकरियों में आरक्षण में हेरफेर, यूपी पेपरलीक का मामला भी बहुत बड़ा मुद्दा रहा, विभिन्न शिक्षा आयोगों द्वारा अध्यापकों की कोई वैकेन्सी नहीं पूरी करना, यूपी अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के सुस्त लहजे और पीईटी के अनुचित नियमों के कारण बहुत कम लोगों को परीक्षाओं में मौका मिलना ये बातें बेरोजगार युवक-युवतियों को काफी त्रस्त किये थीं।
उन्होंने आगे बताया कि राममंदिर का मुद्दा राजनीतिक नहीं बन सका क्योंकि वो आस्था का विषय है। विपक्ष ने उसे आस्था तक ही रखा, उसका राजनीतिकरण नहीं होने दिया।
यूपी का युवा रोजगार और आरक्षण को लेकर परेशान था तो किसान एमएसपी को कानूनी दर्जा देने को लेकर और अपने कर्जे को लेकर परेशान था। उन्होंने बताया कि कई जिलों के व्यापारियों से बात करने पर ये पता चला कि व्यापारी भी जीएसटी की अनुचित मार से आहत रहे, छोटे व माध्यम वर्ग के व्यापारियों का अलग दर्द था। आउटसोर्सिंग के तहत जॉब कर रहे युवाओं की तमाम परेशानियाँ भी उनके विरोध का कारण रहीं।

हमारे नेता माननीय राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव जी ने अच्छी तरह से जन अपेक्षाओं को और उनके दर्द को समझा और इन्हीं सब समस्याओं तथा उनके समाधान को लेकर हम सब लोग जनता के बीच गये। सपा द्वारा कैंडीडेट का सही चुनाव, सभी जातियों, सभी धर्मों के समीकरण को ध्यान में रखकर क्षेत्र में एक अन्य जीताऊ समीकरण के हिसाब से प्रत्याशी को टिकट देना भी सपा की जीत का एक महत्वपूर्ण कारक रहा।
युवा सपा नेता ने आगे कहा कि, गोदी मीडिया के कारण लोगों का भरोसा टूटा है। हमें चुनाव आयोग व माननीय सुप्रीम कोर्ट पर पूरा भरोसा रहा और हमारे पार्टी का एक-एक कार्यकर्ता/नेता पूरी निष्ठा के साथ पार्टी के साथ खड़ा नज़र आया है।
यह जीत जनता के साथ हमारे निष्ठावान कार्यकर्ताओं की भी जीत है। नेताजी के गैर मौजूदगी में सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश जी का ये पहला सामान्य लोकसभा चुनाव रहा है। और अखिलेश जी नेताजी के मानकों पर सोलह आने खरा उतरे हैं।
इस चुनाव में देश की तीसरी बड़ी पार्टी का दर्जा दिलाने में अखिलेश जी की कार्यशैली का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा।
युवा सपा नेता मनोज यादव ने इस बड़ी जीत के लिए यूपी की समस्त जनता का आभार प्रकट किया और आगे कहा कि इस परिवर्तन से लोगों को सीख लेनी चाहिए कि लोकतंत्र में जनता ही जनार्दन है जनता से बड़ा लोकतंत्र में कोई नहीं है मतलब कोई नहीं है।लोकतंत्र सदैव लोकलाज से चलता है, साथ ही चुनाव में कही गयी बातों का पूरा होना भी आवश्यक है। तभी जनता का नेता और राजनीतिक दलों पर विश्वास बनता है।







