यूपी में वन क्षेत्र तो बढ़ा लेकिन कृषि भूमि पर वनावरण में आई कमी

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दो साल में सघन वन क्षेत्र .57 वर्ग किमी घटा, वहीं कृषि भूमि पर वनावरण में 100 वर्ग किमी की कमी

उपेन्द्र नाथ राय

लखनऊ, 02 जनवरी 2020: दो वर्ष में प्रदेश में वनावरण में 127 वर्ग किमी की वृद्धि हुई है लेकिन सघन वन के क्षेत्र में .57 वर्ग किमी और कृषि भूमि पर लगाये जाने वाले वनावरण में 100 वर्ग किमी की कमी आई है। यह कमी वन क्षेत्र के बाहर किसानों की निजी भूमि के आंकलन से संबंधित है। वन विभाग द्वारा जारी सर्वेक्षण रिपोर्ट के अनुसार इस समय कुल प्रदेश में 14,805.65 वर्ग किमी क्षेत्र है, जबकि 2017 के सर्वे के अनुसार 14,679 वर्ग किमी था।

प्रदेश सरकार द्वारा पौधरोपण पर विशेष ध्यान देने, इस वर्ष 22.59 करोड़ पौधरोपण करने, 2018 में 11 करोड़ पौधरोपण के बावजूद सघन वन और कृषि भूमि पर पौधरोपण में आई कमी वन विभाग को परेशान कर दिया है। अब वन विभाग का कहना है कि 2019 में प्रकाशित रिपोर्ट 2017 की है और 2017 की प्रकाशित रिपोर्ट 2015 की है। इसमें भी एक हेक्टेयर से कम क्षेत्रफल का क्षेत्र सेटेलाईट इमेजरी में नहीं आ पाता है। इस कारण यह आंकड़ा आ रहा है।

प्रदेश में विरल वन का क्षेत्रफल है 4080.04 वर्ग किमी

मुख्य वन संरक्षक मुकेश कुमार ने गुरुवार को बताया कि भारतीय वन सर्वेक्षण, देहरादून द्वारा जारी वर्ष 2019 की रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में बहुत घना वन का क्षेत्रफल 2,616.43 वर्ग किमी है। वहीं विरल वन 4,080.04 वर्ग किमी है। वहीं खुला वन 8,109.18 वर्ग किमी है अर्थात कुल योग 14,805.65 वर्ग किमी है। वहीं भारतीय वन सर्वेक्षण की 2017 में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में बहुत घना जंगल 2,617 वर्ग किमी, विरल जंगल 4,069 वर्ग किमी, वहीं खुला जंगल 7,993 वर्ग किमी अर्थात कुल वन 14,679 वर्ग किमी था।

वन क्षेत्र के बाहर वृक्षावरण में 100 वर्ग किमी की कमी आई

इस आंकड़े के अनुसार बहुत घना जंगल में .57 वर्ग किमी की कमी आई है। वहीं विरल जंगल में 11.04 वर्ग किमी, खुला जंगल क्षेत्र में 116.18 वर्ग किमी क्षेत्र में वृद्धि हुई है। कुल वनावरण के क्षेत्रफल में 127 वर्ग किमी की दो वर्षाें में वृद्धि हुई है। मुकेश कुमार ने बताया कि आंकड़ों के अनुसार वन क्षेत्र के बाहर वृक्षावरण में 100 वर्ग किमी की कमी आई है।

एक हेक्टेयर से कम क्षेत्रफल का क्षेत्र सेटेलाइट में नहीं आता: मुकेश कुमार

मुकेश कुमार ने बताया कि एक हेक्टेयर से कम क्षेत्रफल का क्षेत्र सेटेलाईट इमेजरी में नहीं आ पाता है। पंक्ति पौधरोपण जिसकी चौड़ाई 23.50 मी से कम होती है, वह भी सेटेलाईट इमेजरी में नहीं आ पाता है। सामान्यत. तीन वर्षों से कम आयु के पौधों तथा पत्ती विहीन पौधे भी इस आंकलन में नहीं आ पाते हैं। वर्ष 2019 में प्रकाशित रिपोर्ट में 2017 तक के आंकड़े शामिल हैं। इसी प्रकार 2017 तक के आंकड़े में 2015 तक के आंकड़े लिए गए हैं।

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