लखनऊ, 12 जून। आरक्षण बचाओ संघर्ष समिति,उप्र की आज एक आपात बैठक में, यह निर्णय लिया गया है कि लोकसभा से लम्बित पदोन्नति में आरक्षण संवैधानिक संशोधन 117वां बिल पास कराने व सुप्रीम कोर्ट द्वारा पारित आदेश को उप्र में लागू कराने को लेकर आगामी 17 जून,2018 को प्रातः 6 बजे से आरक्षण समर्थकों द्वारा ‘आरक्षण बचाओ पैदल मार्च’ निकाला जायेगा। जो प्रातः 6 बजे बाबा साहब डा. भीमराव अम्बेडकर स्मारक गोमती नगर मुख्य गेट से होते हुए ताज होटल के सामने से समता मूलक चौराहा होते हुए पुनः उसी स्थान पर समापन होगा।
गौरतलब है कि 17 जून,1995 को पहली बार 77वां संविधान संशोधन कर पदोन्नति में आरक्षण बहाल किया गया था। प्रत्येक वर्ष इस दिन को आरक्षण समर्थक स्वाभिमान दिवस के रूप में मनाते हैं। संघर्ष समिति ने अपने सभी जिला इकाईयों को निर्देश दे दिये हैं कि वह अपने स्तर से इस विशेष दिन को स्वाभिमान दिवस के रूप में मनाये और उप्र के सभी सरकारी विभागों के मुख्यालयों के कार्मिकों से अनुरोध है कि वह प्रातः 6 बजे ससमय पहुंचकर आरक्षण बचाओ पैदल मार्च में भाग लें।
इस मौके पर आरक्षण बचाओ संघर्ष समिति,उप्र के संयोजकों में अवधेश कुमार वर्मा, केबीराम, डा रामशब्द जैसवारा, अनिल कुमार, अजय कुमार, श्याम लाल, अन्जनी कुमार, रीना रजक, अनीता, अंजली गौतम, लेखराम, प्रेम चन्द्र, अशोक सोनकर, प्रभुशंकर राव, योगेन्द्र रावत, रामेन्द्र कुमार, जगन्नाथ, रतिराम, अरविन्द फोर्सवाल, सुनील कनौजिया ने एक सयुंक्त बयान में कहा कि जिस प्रकार से 4 साल से ज्यादा समय व्यतीत होने को है, लेकिन केन्द्र की मोदी सरकार पदोन्नति बिल को लम्बित रखकर पूरे देश में दलित कार्मिकों का बड़े पैमाने पर उत्पीड़न करा रही है, उससे यह सिद्ध हो गया है कि भाजपा सरकार को आरक्षण व दलित समाज के संवैधानिक अधिकारों से कोई लेना देना नहीं है।
उन्होंने कहा कि विगत सप्ताह सुप्रीम कोर्ट द्वारा यह आदेश दिये गये कि कानून की परिधि में पदोन्नति में आरक्षण दिया जा सकता है। इसके बावजूद भी उप्र की सरकार चुपचाप तमाशा देख रही है, जबकि प्रदेश के 2 लाख दलित कार्मिकों को जब पदों व वरिष्ठता में रिवर्ट किया जाना था तो एक माह के अन्दर कार्यवाही पूर्ण कर दी गयी थी। जो यह सिद्ध करता है कि दलित कार्मिकों को न्याय देने में सरकारें दोहरा मापदण्ड अपना रही हैं।







