आनन्दी बेन ने दिया फिट इंडिया में यूपी के योगदान का सन्देश

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लखनऊ,29 अगस्त 2019: मेजर ध्यानचंद हांकी के जादूगर ही नही, नवोदित खिलाड़ियों के प्रेरणा स्रोत है। उन्होंने अभावों के बाद भी खेल में अभ्यास को कभी  बाधित नहीं होने दिया। संघर्ष करते रहे, आगे बढ़ते रहे, देश का गौरव बढ़ते रहे। उनका जीवन सदैव खिलाड़ियों को प्रेरणा देता रहेगा। उनके जन्मदिन को राष्ट्रीय खेल दिवस के रूप में मनाया जाता है। उत्तर प्रदेश के राजभवन में इस अवसर पर समारोह का आयोजन किया गया।
राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने राजभवन में राष्ट्रीय खेल दिवस के अवसर पर राष्ट्रीय खेलकूद प्रतियोगिता में प्रतिभाग कर स्वर्ण, रजत एवं कांस्य पदक प्राप्त करने पर खिलाड़ियों को सम्मानित किया। आनंदीबेन पटेल ने इस अवसर पर मेजर ध्यानचन्द को श्रद्धांजलि अर्पित की।  नवोदित खिलाड़ियों को बधाई देते हुए कहा कि व्यायाम एवं खेल से शारीरिक तथा शिक्षा एवं चिन्तन मनन से व्यक्ति का मानसिक विकास होता है। कहा भी जाता है कि स्वस्थ शरीर में स्वस्थ मस्तिष्क का निवास होता है। छात्र जीवन में केवल खेलते या पढ़ते ही नहीं रहना चाहिए, अपितु जीवन का एक उद्देश्य होना चाहिए खेलने के समय खेलना और पढ़ने के समय पढ़ना। जो पाठ शिक्षा नहीं सिखा पाती वह खेल का मैदान सिखा देता है। खेलते समय अनुशासन में रहना, नेतृत्व की आज्ञा का पालन करना, खेल में जीत के समय उत्साह, हारने पर सहिष्णुता तथा विरोधी के प्रति प्रतिरोध का भाव न रखना, अपनी असफलता का पता लगने पर जीतने के लिए पुनः प्रयत्न करना, यह सब खेल ही सिखाता है।
खेलकूद प्रतियोगिता के आयोजन सभी विश्वविद्यालयों में होने चाहिए, इससे देश को नई प्रतिभाएं मिलेंगी। खिलाड़ियों ने जैसे अपनी प्रतिभा के आधार पर पदक प्राप्त किये हैं उसी प्रकार देश के योग्य और जिम्मेदार नागरिक बनें। नये भारत के निर्माण में युवाओं की प्रमुख भूमिका है।  छोटे-छोटे प्रयास से बड़ी से बड़ी समस्याओं का समाधान हो सकता है। उपस्थित खिलाड़ियों का आह्वान किया कि वे भारत को प्लास्टिक मुक्त बनायें, पानी को बर्बाद होने से बचायें, स्वच्छता पर विशेष ध्यान दें तथा उतना ही भोजन थाली में लें जितनी आवश्यकता हो ताकि झूठन न बचे। बचे हुए खाने का उपयोग गरीब बच्चों की भूख मिटाने के लिये हो सकता है। जब प्रधानमंत्री सफाई कर सकते हैं तो शर्म किस बात की, शिक्षकों के साथ विद्यार्थी भी स्वच्छता अभियान में स्वतः जुड़े।  देश से गरीबी तभी दूर होगी जब साधन सम्पन्न लोग दूसरों की जरूरतों को देखेंगे।
आनंदीबेन ने कहा कि प्रधानमंत्री ने राष्ट्रीय खेल दिवस के अवसर पर फिट इण्डिया  की शुरूआत की है। जब मनुष्य मानसिक एवं शारीरिक रूप से फिट होगा तो देश भी फिट होगा। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय आसपास के गाँव को गोद लें तथा गांवों को रोग मुक्त, टी बी मुक्त, प्लास्टिक मुक्त, कुपोषण मुक्त और शिक्षा युक्त बनाने का नवाचार करें। यह प्रयास होना चाहिए कि हर बच्चा पहली से ब्राह्ववीं तक शिक्षा अवश्य प्राप्त करे और ड्राप-आउट जीरो प्रतिशत हो। छात्राओं के लिये नजदीक में स्कूल न होने के कारण आमतौर पर उनकी पढ़ाई छूट जाती है, लोगों में विश्वास जगाकर उनके पढ़ने का वातावरण बनाये। प्राय यह देखा गया है कि शिक्षा के हर स्तर पर लड़कियां लड़कों से आगे हैं। लड़कियां क्यों आगे है और लड़के क्यों पीछे हैं, इस पर विचार करके दोनों को समान रूप से बढ़ने का अवसर मिले।
– डॉ दिलीप अग्निहोत्री

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