विधाई प्रक्रिया पर राष्ट्रमंडलीय विमर्श

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डॉ दिलीप अग्निहोत्री

पिछले कुछ समय में उत्तर प्रदेश विधानसभा के इतिहास नया अध्याय जुड़ा था, लगातार अड़तालीस घण्टे तक इसका विशेष सत्र चला था। अब पहली बार राष्ट्रमण्डल संसदीय संघ के भारत प्रक्षेत्र सम्मेलन का यहां आयोजन होगा। वैसे राष्ट्रमण्डल संसदीय सम्मेलन में तिरपन देश शामिल है। भारत और इसके सभी राज्य इसके सदस्य है। ये सभी देश कभी ब्रिटेन के उपनिवेश हुआ करते थे। लेकिन स्वस्थ व संवैधानिक प्रजातंत्र के मामले में भारत ने ही सर्वश्रेष्ठ मुकाम बनाया है। भारत जैसी विविधता इनमें से किसी देश में नहीं है। जाति मजहब भाषा आदि अनेक विविधताओं के बाद भी यहां की संसदात्मक शासन प्रणाली मजबूती से कार्य कर रही है। भारत में उत्तर प्रदेश जनसंख्या की दृष्टि उत्तर प्रदेश सबसे बड़ा राज्य है। यह भी दिलचस्प है कि राष्ट्रमण्डल में भी उत्तर प्रदेश का यही स्थान है। ऐसे में उत्तर प्रदेश की राजधानी में राष्ट्रमण्डल संसदीय सम्मेलन का आयोजन महत्वपूर्ण है।

उत्तर प्रदेश के विधाई इतिहास में पिछले कुछ समय में नए अध्याय जुड़े है। महात्मा गांधी की एक सौ पचासवीं जयंती पर उत्तर प्रदेश विधानसभा का विशेष अधिवेशन आहूत किया गया था। यह अधिवेशन लगातार अड़तालीस घण्टे तक चला था। इसमें संयुक्त राष्ट्र संघ के सतत विकास प्रस्तावों पर चर्चा की गई थी। यह अच्छा है कि अब यहां राष्ट्रमण्डल का सम्मेलन हो रहा है। कुछ समय पहले लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और विधानसभा अध्यक्ष राष्ट्रमण्डल सम्मेलन में भाग लेने गए थे। वहां इन लोगों के विचारों को बड़ी गम्भीरता से सुना गया था।

हृदय नारायण दीक्षित भारत के प्राचीन वांग्मय के साथ ही संविधान के भी विद्वान है। विश्व के अनेक देशों के संविधान और विधाई प्रणाली पर भी उनका गहन अध्ययन है। उन्होंने सम्मेलन की पूर्वसंध्या पर समारोह के संबन्ध में जानकारी दी।

राष्ट्रमंडल संसदीय संघ के भारत प्रक्षेत्र के सम्मेलन का उद्घाटन करेंगे। यह सम्मेलन लखनऊ में सोलह से बीस से जनवरी तक चलेगा। इसमें राष्ट्रमंडल देशों के स्पीकर व पीठासीन अधिकारी शामिल होंगे। सम्मेलन में संसदीय परंपराओं, मुद्दों व सदन चलाने के नियमों पर चर्चा होगी। उत्तर प्रदेश विधानसभा सचिवालय ने इसके मद्देनजर सभी तैयारियां पूरी कर ली है। इस सम्मेलन में राष्ट्रमण्डल के अनेक देशों की संसद व राज्य विधानमंडल के अध्यक्ष शामिल होंगे। राष्ट्र मंडल देशों के कुल एक सौ तिरानबे राज्य भी इस सम्मेलन के सदस्य है। विदेशी मेहमानों के संसदीय सम्मेलन में भाग लेने के अलावा एक अन्य महत्वपूर्ण यात्रा को भी जोड़ा गया है।

राष्ट्रमण्डल देशों के प्रतिनिधि रामलाल के दर्शन करने अयोध्या भी जाएंगे। इनके साथ लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला, विधानसभा अध्य्क्ष हृदय नारायण दीक्षित,राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश भी रहेंगे। कुछ समय पहले ही सुप्रीम कोर्ट ने जन्मभूमि विवाद का समाधान किया था। पूरे देश ने इसे शांति व सौहार्द के साथ स्वीकार किया था। वस्तुतः यह भारत की विधाई व्यवस्था की ही कामयाबी थी। विदेशी मेहमान इसका भी अनुभव करेंगे। प्रभु राम के प्रति आस्था रखने वाले लोग इन राष्ट्रमण्डल देशों में भी है। इनमें से कई देशों में नियमित रूप से रामलीला का आयोजन किया जाता है। पिछली दीपावली पर फिजी की स्पीकर अयोध्या आई थी। यहां उन्होंने रामचरित मानस की चौपाइयों का गायन किया था। इन लोगों के लिए अयोध्या यात्रा का विशेष महत्व होगा।

अयोध्या विश्व की प्राचीनतम नगरों में शामिल है। यहां का गौरवशाली इतिहास रहा है। पिछले तीन वर्षों में यहां विकास के अनेक कार्य हुए है। विदेशी मेहमानों को यहां नया अनुभव मिलेगा। इस सम्मेलन में देश के सभी राज्यों की विधानसभा के प्रतिनिधि शामिल होंगे। इसके अलावा राष्ट्रमण्डल देशों के सभी सात क्षेत्रीय समितियों के संसदीय प्रतिनिधि पर्यवेक्षक के रूप में शामिल होगें। राज्यों के विधानसभा अध्यक्ष,विधान परिषद सभापति, सचिव भी सहभागी होगें। इसमें लोकसभा व राज्यसभा के पच्चीस पच्चीस सदस्यों की टीम विशेष रूप से शामिल होगी। राष्ट्रमण्डल क्षेत्रीय उप समिति के लगभग बीस विदेशी प्रतिनिधि भी होगें।

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