सकारात्मक सोच की शिक्षा

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डॉ दिलीप अग्निहोत्री
सफलता आनन्दित और असफलता निराश करती है। लेकिन सकारात्मक सोच इनके प्रति अवधारणा को बदल देती है। सफलता के आंनद में अहंकार नहीं होना चाहिए, असफलता की निराशा अवसाद में नहीं बदलनी चाहिए। बल्कि असफलता को भी  एक अवसर के रूप में देखना चाहिए। यदि इस प्रकार का सकारात्मक विचार हो तो जीवन की प्रत्येक समस्याओं का मुकाबला किया जा सकता है। व्यक्ति को केवल अपना कर्तव्य करना चाहिए। यही तो प्रभु कृष्ण ने कहा है। इस पर अमल किया जाए तो न अहंकार होगा, न निराशा होगी।
लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में मेधावी छात्र सम्मान समारोह आयोजित किया गया। इसमें मुख्यमन्त्री योगी आदित्यनाथ शिक्षक और अभिभावक दोनों की भूमिका में नजर आ रहे थे।
उन्होंने हाईस्कूल व इंटरमीडिएट के मेधावियों से कहा कि वह मेहनत करें। सफलता में ही पहले की अपेक्षाअच्छी सफलता की संभावना समाहित होती है। लेकिन सफलता दंभी व अहंकारी न बनाए। सफलता को सहेज कर रखें। प्रेरणा ग्रहण करें। मुख्यमंत्री ने विभिन्न बोर्डों के एक सौ तिहत्तर मेधावियों को प्रतीक चिह्न, प्रमाणपत्र, मेडल, घड़ी व किताबें देकर सम्मानित किया।
मुख्यमंत्री ने अन्य विद्यर्थियो को भी कभी निराश न होने की शिक्षा दी। कहा कि जीवन में कभी हिम्मत नहीं हारनी चाहिए। सफलता और असफलता लगी रहती है। जिसे सफलता अपने परिश्रम से मिली है, उसके लिए खुशी की बात होनी चाहिए लेकिन कभी किन्हीं कारणों से असफलता मिलती है तो हिम्मत नहीं हारनी चाहिए। असफल होने पर पुनः पूरी क्षमता से प्रयास करना चाहिए। भलीभांति कर्म करना चाहिए। परिणाम को इस रूप में लेना चाहिए कि जो हुआ, अच्छा हुआ। चिंतन और विचार सकारात्मक होना चाहिए। उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा ने भी निराशा से सदैव दूर रहने की सलाह दी। अध्ययन के साथ ही स्पोर्ट और सांस्कृतिक गतिविधियों में भाग लेना चाहिए।
समयबद्ध दिनचर्या होनी चाहिए, गलाकाट प्रतियोगिता के स्थान पर सदैव स्वस्थ प्रतियोगिता को महत्व देना चाहिए। उन्होंने बच्चों के सामने पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम से प्रेरणा लेने की सलाह दी। समारोह में मंत्रीगण बृजेश पाठक, श्रीकांत शर्मा, महेंद्र सिंह, आशुतोष टण्डन,सुरेश राणा सहित बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित थे।

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