सवर्ण आरक्षण बिल पास तो दलित कार्मिकों का पदोन्नति में आरक्षण क्यों लटका?

0

संघर्ष समिति के पत्र पर न्याय व कार्मिक विभाग का जनसुनवाई पोर्टल पर जवाब पदोन्नति में आरक्षण दिये जाने का फैसला नीतिगत अभी उच्चादेश नहीं हुआ प्राप्त? आखिर कब प्रदेश सरकार कार्मिक विभाग को देगी उच्चादेश।

लखनऊ, 18 जनवरी 2019: योगी सरकार ने कैबिनेट द्वारा जहां गरीब सवर्णों को 10 प्रतिशत आरक्षण दिये जाने का निर्णय ले लिया है, वहीं सुप्रीम कोर्ट द्वारा पारित 5 सदस्यीय पीठ के निर्णय के बाद भी आज तक दलित कार्मिकों के लिये पदोन्नति में आरक्षण की व्यवस्था बहाल किये जाने हेतु कैबिनेट में जाने का प्रस्ताव तक नहीं बना, यह बात आरक्षण समर्थकों ने कही।

उन्होंने कहा कि 26 सितम्बर, 2018 को सुप्रीम कोर्ट द्वारा सुनाये गये फैसले के बाद आरक्षण बचाओ संघर्ष समिति,उप्र ने मुख्यमंत्री को एक पत्र लिखकर 15-11-1997 से आरक्षण अधिनियम 1994 की धारा-3(7) को बहाल करने की मांग उठाते हुए विगत में उप्र में रिवर्ट किये गये 2 लाख अनुसूचित जाति/जनजाति के कार्मिकों को पूर्व पदों पर बहाल करने की मांग उठायी गयी थी, जिस पर मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा पूरे मामले को कार्मिक विभाग, उप्र को भेज दिया गया और कार्मिक विभाग ने उस पर न्याय विभाग का अभिमत लिया जिस पर न्याय विभाग द्वारा पूरे मामले को नीतिगत बताते हुए कार्मिक विभाग को भेजते हुए राज्य सरकार द्वारा ही निर्णय लिया जाना बताया। तत्पश्चात् कार्मिक विभाग द्वारा संघर्ष समिति के पत्र के जवाब में जनसुनवाई पोर्टल पर जो कार्यवाही सार्वजनिक की गयी, उसमें अनुसूचित जाति/जनजाति को पदोन्नति में आरक्षण दिये जाने का प्रकरण नीतिगत बताते हुए यह दर्शाया गया कि अभी इसी मामले में उच्चादेश प्राप्त नहीं है।

आरक्षण बचाओ संघर्ष समिति,उप्र के संयोजकों में अवधेश कुमार वर्मा एवंम डा रामशब्द जैसवारा, आरपी केन, अनिल कुमार, अन्जनी कुमार, प्रेम चन्द्र, दिनेश कुमार ने कहा कि जब उप्र में मा. सुप्रीम कोर्ट आदेश की आड़ में 2 लाख दलित कार्मिकों को रिवर्ट करना था तो तुरन्त पत्रावली पर उच्चादेश प्राप्त हो गया था और अब जब प्रदेश के दलित कार्मिकों को मा0 सुप्रीम कोर्ट द्वारा आदेश की परिधि में लाभ देने का समय आया तो न्याय और कार्मिक विभागों में उच्चादेश की प्रतीक्षा हो रही है।

उन्होंने कहा कि वास्तव में यदि सरकार दलित कार्मिकों को न्याय देना चाहती तो अविलम्ब पूरे मामले को उ0प्र0 की कैबिनेट में ले जाकर आरक्षण अधिनियम 1994 की धारा-3(7) को 15-11-1997 से बहाल कर देती और सही मायने में लम्बे समय से अपमानित किये जा रहे लाखों दलित कार्मिकों को न्याय मिल जाता।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here