नीरज को समर्पित राष्ट्रीय पुस्तक मेला रवीन्द्रालय लान में आज से 

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राज्यपाल करेंगे उद्घाटन, उपमुख्यमंत्री मौर्य रहेंगे उपस्थित
 
लखनऊ, 03 सितम्बर 2018: गीतऋषि गोपालदास नीरज को समर्पित राष्ट्रीय पुस्तक मेले का उद्घाटन मुख्य अतिथि राज्यपाल राम नाईक कल शाम पांच बजे रवीन्द्रालय लान चारबाग में करेंगे। इस अवसर पर निःशुल्क प्रवेश वाले इस पुस्तक मेले में विशिष्ट अतिथि के रूप में उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के साथ कानून मंत्री बृजेश पाठक उपस्थित रहेंगे। मेले में पुस्तक प्रेमियों को विभिन्न विषयों की पुस्तकें न्यूनतम 10 प्रतिशत छूट में उपलब्ध होंगी। इस वर्ष साहित्यकार शिरोमणि सम्मान कथाकार शिवमूर्ति को प्रदान किया जायेगा। साथ ही अनेक विशिष्ट साहित्यिक सांस्कृतिक आयोजन होंगे।
मेला आयोजक देवराज अरोड़ा ने बताया कि मौसम अनुकूल न होने पर भी मेला स्थल पर तैयारियां युद्ध स्तर पर हो रही हैं। विभिन्न प्रकाशकों का सामग्री के साथ मेला स्थल पर पहुंचना प्रारम्भ हो गया है। गागर में सागर भरने जैसा काम करने वाले इस पुस्तक मेले में देश भर के जाने माने प्रकाशक राजकमल, लोक भारती प्रकाशन, राजपाल, प्रभात, सम्यक, ओशो दर्शन, साहित्य भण्डार, केन्द्रीय हिन्दी निदेशालय, भारतीय कला परिषद, वैज्ञानिक-तकनीकी शब्दावली आयोग, पब्लिकेशन डिविजन, एन.सी.पी.यू.एल., गौतमबुक सेण्टर, क्रिएटिव साइन्टिफिक एडस्, राजबुक कम्पनी, विधि बुक्स, उर्दू अकादमी, दिल्ली, सुभाष पुस्तक भण्डार, शेखर बुक सेण्टर, पीएम पब्लिकेशन, किड्स फैक्ट्री, सामायिकी प्रकाशन, गिडियन्स, आदि सम्मिलित होंगे।
इस पुस्तक मेले में साहित्यिक कार्यक्रमों की शृंखला में पुस्तकों के लोकार्पण, संगोष्ठी, विचार गोष्ठी का आयोजन, काव्य गोष्ठी, कवि सम्मेलन, मुशायरा नियमित आयोजित होंगे। इस अवसर पर निर्मला सिंह, सुश्री अलका प्रमोद आदि साहित्यकारों की पुस्तकों का लोकार्पण भी होगा। विशिष्ट कार्यक्रमों में गीत ऋषि गोपालदास नीरज को समर्पित कई साहित्यिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन भी होगा। साथ ही प्रशासनिक अधिकारियों का एक विशिष्ट कवि सम्मेलन भी होगा। नवांकुर कवियों को प्रोत्साहन देने के लिए नये हस्ताक्षर कार्यक्रम के अन्तर्गत काव्य प्रतियोगिता होगी जिसमें प्रथम, द्वितीय व तृतीय विजेता को प्रतीक चिह्न व प्रमाण पत्र प्रदान किया जायेगा। इस अवसर पर निरंकारी मिशन द्वारा सत्संग का भी आयोजन होगा। पुस्तक मेले में स्थानीय लेखकों के लिए अलग से निःशुल्क स्टाल की व्यवस्था भी हमेशा की तरह की गई है।

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