निदेशकों के पद पर आरक्षण ख़त्म करने पर समर्थक भड़के

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लखनऊ, 24 जून। आरक्षण बचाओ संघर्ष समिति,उप्र की प्रान्तीय कार्यसमिति की एक आवश्यक बैठक में पावर कार्पोरेशन की बिजली कम्पनियों में निदेशकों के समूहीकरण को समाप्त कर पिछड़े वर्ग के अभियन्ताओं के लिये लागू निदेशक के पद पर आरक्षण को समाप्त करने के खिलाफ आज भारी आक्रोश देखने को मिला। इसके खिलाफ उन्होंने जोर-शोर से लड़ाई लड़ने का ऐलान किया।

संघर्ष समिति के नेताओं ने दो टूक शब्दों में ऐलान किया कि पावर कार्पोरेशन उच्च प्रबन्धन द्वारा जिस प्रकार से गुपचुप तरीके से आरक्षण को समाप्त कर नया साक्षात्कार करा लिया गया, वह पूरी तरह से पिछड़े व दलितों के खिलाफ है। वहीं दूसरी ओर नेताओं ने इस बात पर भी चिन्ता व्यक्त की, कि भारत सरकार द्वारा पदोन्नति में आरक्षण का आदेश लागू किये जाने के बाद यूपी में कछुए की चाल से काम हो रहा है और वहीं दूसरी ओर विभागों में युद्ध स्तर पर पदोन्नति के पद भरे जा रहे हैं।

उन्होंने इस मामले में कहा कि लगातार संघर्ष समिति आरक्षण अधिनियम 1994 की धारा 3(7) को 15-11-1997 से बहाल कराने की मांग कर रही है, लेकिन कोई देखने वाला नहीं है। संघर्ष समिति ने प्रदेश के मुख्यमंत्री महोदय से यह मांग की है कि 23 जून को बिजली निगमों में निदेशकों के पद पर किये गये साक्षात्कार को अविलम्ब निरस्त किया जाये।

आरक्षण बचाओ संघर्ष समिति,उप्र के संयोजकों सर्वश्री अवधेश कुमार वर्मा, केबी राम, डा रामशब्द जैसवारा, आरपी केन, अनिल कुमार, अजय कुमार, अन्जनी कुमार, पीए0 प्रभाकर, एसपी सिंह, वीके आर्या, पीपी सिंह, दिग्विजय सिंह, श्रीनिवास राव, प्रभु शंकर राव ने कहा कि 26 जून को आरक्षण के जनक छत्रपति साहू जी महाराज जी की जयन्ती के उपलक्ष्य में पिछड़े वर्ग के कार्मिकों की एक अहम बैठक बुलायी गयी है। जिसमें पावर कार्पोरेशन में निदेशकों के पद पर पिछड़े वर्ग के अभियन्ताओं के लिये लागू आरक्षण व्यवस्था को समाप्त किये जाने के खिलाफ आर-पार की लड़ाई का ऐलान किया जायेगा

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