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शिक्षक दिवस पर विशेष: मेहनती शिक्षकों ने कान्वेंट की तरह चमका दिया सरकारी स्कूल

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कुर्रिया कलाँ/शाहजहांपुर, 05 सितम्बर 2018: आज शिक्षक दिवस है। शिक्षकों का अब पहले जैसा सम्मान नही रह गया है। परिषदीय विद्यालयों के शिक्षकों के बारे में ज्यादातर लोग नकारात्मक ही सोचते है। आज हम आपको विकास खंड कांट के कुछ ऐसे विद्यालयों के बारे में बता रहे है जहाँ के शिक्षक आज के समय मे भी शिक्षक के पेशे का सही से निर्वाह कर रहे है और अन्य शिक्षकों के लिए भी आदर्श बने हुए है।
 उच्य प्राथमिक विद्यालय पल्हौरा में तैनात सहायक अध्यापक के तौर पर पढ़ा रहे अवनीश कान्त पाण्डेय आज  सभी अध्यापकों के लिए एक मिसाल बने हुए है। अवनीश कान्त पाण्डेय ने कई विद्यालयों में रहकर उनकी तस्वीर बदल कर यह साबित कर दिया कि अगर एक बार सच्ची लगन से अगर आप कुछ भी अच्छा करने की ठान ले तो संसाधन कभी आपका रास्ता नही रोक सकते। आज इनका खुद का विद्यालय तो आदर्श विद्यालय की श्रेणी में है ही लेकिन सुखद पहलू यह है कि इनसे प्रेरणा लेकर विकास खण्ड के कई विद्यालय आदर्श विद्यालय की श्रेणी में तेजी से उभर रहे है।
उच्य प्राथमिक विद्यालय पल्हौरा व अध्यापक अवनीश कान्त पाण्डेय, उमेश चंद्र सक्सेना, उमेश सिंह, व अमित कन्नौजिया
पूरे विकास खण्ड की पड़ताल की तो अध्यापकों की मेहनत से तेजी से उभरते हुए कुछ विद्यालय देखने को मिले आज हम आपको उन विद्यालयों के बारे में ही बता रहे हैं।
उच्य प्राथमिक विद्यालय मल्हपुर में 20 मई 2017 को जब उमेश चन्द्र सक्सेना ने ज्वाइन किया तो इनको एक टूटा फूटा विद्यालय मिला। विद्यालय में न ही बच्चे आ रहे थे और न ही बैठने के लिए कोई व्यवस्था थी। पूरा विद्यालय और उसका गेट टूटा पड़ा हुआ था। विद्यालय की हालत देखकर उमेश चन्द्र सक्सेना को बहुत दुख हुआ और वह विद्यालय को आदर्श बनाने का प्रण लेकर जुट गए। मेहनत रंग लाई और आज इतने कम समय मे विद्यालय को देखकर कोई विश्वास नही करेगा कि यह वही विद्यालय है। अब उमेश जी का लक्ष्य विद्यालय को शाहजहांपुर का नम्बर एक विद्यालय बनाने का है। इससे पहले वह 2011 से 2017 तक 6 साल तक इसी विकास खण्ड में एबीआरसी रह चुके है। उन्होंने एबीआरसी रहते हुए भी काफी सराहनीय काम किये है।
उच्य प्राथमिक विद्यालय बाँसखेड़ा में भी जब वहां कार्यरत अमित कन्नौजिया ने जब सितम्बर 2015 में इस विद्यालय से ही अपने शिक्षक जीवन की शुरुआत की तो यहां भी काफी मुश्किलें थी। विद्यालय की हालत बहुत ही खराब थी। गांव वाले अपने बच्चों को विद्यालय भेजना भी पसन्द नही करते थे। लेकिन इन्होंने घर घर जाकर लोगों को समझाया और विद्यालय में भी फर्नीचर और रँगाई पुताई करबाई। आज विद्यालय में कम्प्यूटर लेब बन चुकी है और अब अमित जी इस विद्यालय में साइंस लेब बनाने के लिए प्रयासरत है।
हुसैनपुर माधौपुर प्राथमिक विद्यालय की बात भी कुछ ऐसी ही है 2010 में जब दीपक बाबू ने विद्यालय ज्वाइन किया तो न तो विद्यालय में बच्चे थे और न ही उनके बैठने के लिए कोई व्यवस्था। एक टूटे फूटे विद्यालय को अपनी मेहनत से आज एक नई पहचान दी है दीपक बाबू ने। इनका भी सपना अपने विद्यालय को जिले में प्रथम स्थान पर लाना है।
इसी तरह प्राथमिक विद्यालय सरथौली की बहुत ही दयनीय स्थती थी जब उमेश सिंह ने नवम्वर 2017 में विद्यालय का चार्ज सभाला पर अपनी मेहनत व लगन से अल्प समय में ही उन्होंने विद्यालय कि शैक्षिक व भौतिक स्थति बदल दी।
इसी तरह जसनपुर के उच्च  प्राथमिक विद्यालय ओमकान्त दीक्षित की मेहनत से उनके त्याग और समर्पण की कहानी बयां कर रहा है और कुर्रिया कलाँ का उच्य प्राथमिक विद्यालय अध्यापिका पारुल शर्मा के मार्गदर्शन में व उच्च प्राथमिक विद्यालय नवादारुद्रपुर इशाक अहमद व उच्य प्राथमिक विद्यालय देवरिया झाला में अध्यापक रणवीर, प्राथमिक विद्यालय पल्हौरा में उषा शुक्ला व प्राथमिक विद्यालय पट्टी कांट में सोना गुप्ता लगातार मेहनत करके विद्यालय को एक अलग पहचान देने की कोशिस कर रही हैं।
– वीर प्रताप सिंह

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