पदोन्नति में आरक्षण की व्यवस्था बहाल कराने को लेकर संघर्ष समिति ने झोंकी ताकत, आज भाजपा अनुसूचित मोर्चा की आगरा में हो रही बैठक के मद्देनजर संघर्ष समिति पदाधिकारियों ने भाजपा नेताओं से किया अनुरोध कहा पदोन्नति में आरक्षण व्यवस्था मुख्यमंत्री जी से अविलम्ब करायें बहाल
लखनऊ, 21 अक्टूबर 2018: पदोन्नति में आरक्षण के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक पीठ द्वारा सुनाये गये ऐतिहासिक फैसले को उप्र में लागू कराकर रिवर्ट कार्मिकों को पूर्व पदों पर पुर्नस्थापित कराने को लेकर दलित सांसदों/विधायकों के बीच डोर टू डोर चलाये जा रहे दलित जनप्रतिनिधि चुप्पी तोड़ो अपने समाज से नाता जोड़ो की समीक्षा के बाद आरक्षण बचाओ संघर्ष समिति ने यह ऐलान किया है कि अब करो मरो की तर्ज पर प्रदेश के सभी जनपदों में जनपदीय सम्मेलन आयोजित किये जायेंगे, जिससे एक बड़ा जनांदोलन तैयार हो।
आरक्षण बचाओ संघर्ष समिति,उप्र के प्रान्तीय पदाधिकारियों ने आज आगरा में भाजपा अनुसूचित मोर्चा की हो रही बैठक जिसमें प्रदेश के मुख्यमंत्री भी शामिल हो रहे हैं, के मद्देनजर उप्र अनुसूचित जाति मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष व सांसद श्री कौशल किशोर व अनुसूचित जाति आयोग के चेयरमैन श्री बृजलाल से फोन पर बात कर उप्र में पदोन्नति में आरक्षण की व्यवस्था बहाल करने व रिवर्ट कार्मिकों को पुर्नस्थापित कराने के लिये पूरा मामला सीएम के समक्ष रखकर अविलम्ब लागू कराने की मांग की है।
बैठक के उपरान्त आरक्षण बचाओ संघर्ष समिति,उप्र के संयोजक अवधेश कुमार वर्मा, केबी राम, डा रामशब्द जैसवारा, आरपी केन, अनिल कुमार, अजय कुमार, श्याम लाल, अन्जनी कुमार, पीएम प्रभाकर, रीना रजक, अंजली गौतम, दिग्विजय सिंह, प्रेम चन्द्र, अशोक सोनकर, अजय धानुक, श्रीनिवास राव, अमित कुमार, बृहदत्त वर्मा, सुनील कनौजिया ने कहा कि मा सुप्रीम कोर्ट द्वारा पारित आदेश के इतने दिनों के बाद भी भारत सरकार व उप्र सरकार द्वारा इस दिशा में कोई भी प्रभावी कार्यवाही न किये जाने से प्रदेश के 8 लाख दलित कार्मिकों में भारी गुस्सा है।
संघर्ष समिति लगातार सांसदों/विधायकों के समक्ष अपनी बात रखकर बाबा साहब द्वारा बनायी संवैधानिक व्यवस्था को लागू कराने की मांग कर रहा है। उसके बावजूद भी आरक्षित सीट से जीतकर आने वाले जनप्रतिनिधियों की उदासीनता इस बात को दर्शाती है कि उन्हें अपने समाज से कोई लेना देना नहीं है, जो चिन्ता का विषय है।






