शक के घेरे में उत्तरप्रदेश पुलिस की मुठभेड़

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चार मामलों में लिखी एक जैसी एफआईआर, जांच शुरू

लखनऊ 09 फरवरी-2018। उत्तर प्रदेश राज्य मानवाधिकार आयोग ने उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा पिछले दिनों किए गए चार एनकाउंटरों की जांच शुरु कर दी है। इनमें मारे गए लोगों के परिजनों ने इन एनकाउंटरों को फर्जी बताते हुए जांच की मांग की थी। बता दें कि पिछले साल 20 मार्च से लेकर अब तक उत्तर प्रदेश पुलिस करीब 43 कथित आरोपियों को एनकाउंटर में ढेर कर चुकी है। इनमें से 10 का एनकाउंटर तो इसी साल किया गया है। उत्तर प्रदेश मानवाधिकार आयोग ने जिन चार मामलों की जांच शुरु की है, उनमें मुकेश राजभर, जय हिंद यादव, रामजी पासी और आदेश यादव के एनकाउंटर शामिल हैं। मुकेश राजभर, जय हिंद यादव और रामजी पासी जहां आजमगढ़ के रहने वाले थे, वहीं आदेश यादव इटावा का निवासी था।

मानवाधिकार आयोग का कहना है कि चारों एनकाउंटरों में पुलिस ने एक जैसी ही एफआईआर दर्ज की हुई है। इसके मुताबिक संदिग्ध मोटरसाइकिल पर जा रहे थे, जिस पर एक पुलिस टीम ने चेकिंग के दौरान उन्हें रोकना चाहा। इसके बाद संदिग्धों ने पुलिस टीम पर फायरिंग कर दी। इसके जवाब में पुलिस ने भी फायरिंग की, जिसमें संदिग्ध की मौत हो गई और उसका एक साथी भागने में सफल हो गया। पुलिस ने मुठभेड़ में बाइक और हथियारों की बरामदगी भी दिखाई है और पुलिसकर्मियों का घायल होना भी। खास बात है कि इन मुठभेड़ों में घायल पुलिसकर्मी अगले ही दिन अस्पताल से डिस्चार्ज भी हो गए। साथ ही एनकाउंटर में मारे गए संदिग्धों के साथियों की अब भी पहचान नहीं हो पाई है। मानवाधिकार आयोग के अधिकारियों का कहना है कि इटावा और आजमगढ़ के जिलाधिकारियों ने इन चारों एनकाउंटर की रिपोर्ट मांगी है। बता दें कि जय हिंद यादव 22 साल का था। वह खिलवा गांव, आजमगढ़ का रहने वाला था।

पुलिस का दावा है कि उस पर हत्या जैसे 13 आपराधिक मामलों दर्ज थे। उधर, रामजी पासी 33 साल का था। वह जियापुर गांव, आजमगढ़ का रहने वाला था। वह हत्या जैसे 10 आपराधिक मामलों में नामजद था। मुकेश कुमार राजभर 23 साल का था। वह भी आजमगढ़ के मुतकल्ली गांव का था। उसके खिलाफ आठ मामले दर्ज थे। जबकि आदेश यादव उर्फ सुंदर 23 साल का था। वह इटावा जिले का रहने वाला था। उस पर एक दर्जन मामले दर्ज थे। इन चारों के परिजनों की गुहार पर ही मानवाधिकार आयोग ने जांच प्रारंभ की है।

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