संघर्ष समिति ने कहा: राज्य सरकार दे जवाब, दलित कार्मिकों के न्याय के लिये कब सरकार कार्मिक विभाग को देगी उच्चादेश और लेगी इस नीतिगत विषय पर निर्णय
लखनऊ, 02 दिसम्बर 2018: पदोन्नति में आरक्षण मसले पर आरक्षण बचाओ संघर्ष समिति ने कहा कि यह है सरकार कि न्याय व्यवस्था, कि दलित कार्मिकों के पदोन्नति में आरक्षण के मुद्दे कार्मिक विभाग उप्र का जनसुनवाई पोर्टल अभी तक संतुश्टिपूर्ण जवाब नहीं दे पाया है और न ही कोई उच्चादेश।
आरक्षण बचाओ संघर्ष समिति के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की 5 सदस्यीय पीठ द्वारा विगत माह सुनाये गये फैसले को आधार बनाकर जब आरक्षण बचाओ संघर्ष समिति,उप्र ने प्रदेश के मुख्यमंत्री को एक पत्र लिखकर पूर्व में रिवर्ट किये गये लगभग 2 लाख दलित कार्मिकों को पुनस्र्थापित कराने व उप्र में पुनः 15-11-1997 से आरक्षण अधिनियम 1994 की धारा-3(7) को बहाल कराने का अनुरोध किया। उस पर प्रदेश के कार्मिक विभाग उप्र द्वारा जनसुनवाई पोर्टल पर जो टिप्पणी प्रेषित की गयी है, आरक्षण बचाओ संघर्ष समिति,उप्र ने कहा कि प्रदेश का कार्मिक विभाग यह मत स्पष्ट कर रहा है कि ‘‘न्याय विभाग द्वारा यह परामर्श दिया गया है कि इस मुद्दे पर नीतिगत निर्णय राज्य सरकार द्वारा ही लिया जाना है। अनुसूचित जाति/जनजाति को पदोन्नति में आरक्षण दिये जाने का प्रकरण नीतिगत विषय से आच्छादित है।
इस सम्बन्ध में सम्प्रति कोई उच्चादेश प्राप्त नहीं हुआ है।‘‘ इस आधार पर संघर्ष समिति की मांग को निस्तारित कर दिया। अब सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि जब दलित कार्मिकों को रिवर्ट करना था तब तो 15 दिन में कार्यवाही पूर्ण कर ली गयी और अब कहा जा रहा है कि अभी उच्चादेश प्राप्त नहीं है। ऐसे में अब दलित कार्मिकों को न्याय देने के लिये उच्चादेश कौन देगा और कब न्याय मिलेगा?
संघर्ष समिति,उप्र के संयोजकों में अवधेश कुमार वर्मा, आरपी केन, अनिल कुमार, एसपी सिंह, अजय कुमार, अन्जनी कुमार, अशोक सोनकर, जितेन्द्र कुमार, दिग्विजय सिंह, राजेश पासवान, श्रीनिवास राव, अरविन्द फरसोवाल, सुनील कनौजिया ने एक सयुंक्त बयान में कहा कि अब कार्मिक विभाग के जनसुनवाई पोर्टल पर डाले गये जवाब से यह स्पष्ट हो गया है कि उप्र की सरकार दलित कार्मिकों को न्याय देने के प्रति गम्भीर नहीं है। कब उच्चादेश कार्मिक विभाग को दिया जायेगा और दलित कार्मिकों के साथ न्याय होगा। इस पूरे उदासीन रूपी प्रक्रिया को लेकर पूरे प्रदेश के 8 लाख आरक्षण समर्थक कार्मिकों में काफी गुस्सा व्याप्त है। बहुत जल्द ही उप्र की राजधानी में एक बड़ा कार्यक्रम कर आर-पार की लड़ाई का ऐलान किया जायेगा।







