रोस्टर प्रणाली बहाली को लेकर बनी रणनीति: 10 फरवरी को होगा ‘आरक्षण बचाओ विशाल पैदल मार्च’ से बड़ा विरोध प्रदर्शन

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  • 10 फरवरी को अम्बेडकर स्मारक गोमती नगर में जमा होंगे हजारों आरक्षण समर्थक और सुबह 8 बजे निकालेंगे ‘‘आरक्षण बचाओ विशाल पैदल मार्च‘‘
  • संघर्ष समिति ने कहा विश्वविद्यालयों में पुराना रोस्टर बहाल होने तक सभी शिक्षक भर्ती पर केन्द्र सरकार लगाये अविलम्ब रोक, रोस्टर बहाली पर केन्द्र सरकार अविलम्ब लाये अध्यादेश

लखनऊ, 31 जनवरी 2019: आरक्षण बचाओ संघर्ष समिति,उप्र की प्रान्तीय कार्यसमिति की बैठक में आज यह निर्णय लिया गया कि पदोन्नति में आरक्षण संवैधानिक संशोधन 117वां बिल लोकसभा से पास कराने व विश्वविद्यालयों में पुरानी रोस्टर प्रणाली बहाल कराने को लेकर 10 फरवरी को अम्बेडकर स्मारक गोमती नगर के मेन गेट से प्रातः 8 बजे एक ‘‘आरक्षण बचाओ विशाल पैदल मार्च‘‘ निकाला जायेगा, जिसमें हजारों की संख्या में आरक्षण समर्थक कार्मिक भाग लेंगे।

संघर्ष समिति ने जहां संसद के आज से शुरू हुए बजट सत्र में पदोन्नति में आरक्षण बिल को अविलम्ब पास कराने की मांग दोहरायी वहीं दूसरी ओर विश्वविद्यालयों में सहायक प्रोफसर/प्रोफेसरों की नियुक्ति के मामले में अविलम्ब केन्द्र की मोदी सरकार से यह भी मांग उठायी कि केन्द्र सरकार अविलम्ब अध्यादेश लाकर रोस्टर की पुरानी व्यवस्था को बहाल कराये, जिससे 200 प्वाइंट का रोस्टर बहाल हो सके और 13 प्वाइंट का रोस्टर निष्प्रभावी हो सके। जिससे दलित व पिछड़े वर्ग के लोगों का प्रतिनिधित्व विश्वविद्यालयों में सुरक्षित हो सके।

संघर्ष समिति के नेताओं ने कहा कि देश के 41 केन्द्रीय विश्वविद्यालयों में सहायक प्रोफेसर/प्रोफेसरों के अप्रैल 2018 तक 5606 पद रिक्त थे, जिसको भरने के लिये यह सब साजिश की जा रही है कि अनुसूचित जाति/जनजाति व पिछड़े वर्ग के योग्यता धारी इससे वंचित हो जायें। ऐसे में संघर्ष समिति केन्द्र की मोदी सरकार से मांग करती है कि जब तक पुरानी रोस्टर प्रणाली बहाल न हो जाये तब तक विश्वविद्यालय में शिक्षक भर्ती की प्रक्रिया पर अविलम्ब रोक लगायी जाये।

संघर्ष समिति के संयोजकों में सर्वश्री अवधेश कुमार वर्मा, डा. रामशब्द जैसवारा, आरपी केन, अनिल कुमार, अजय कुमार, श्याम लाल, अन्जनी कुमार, राकेश पुष्कर, लेखराम, प्रेम चन्द्र, दिनेश कुमार, अजय चैधरी, रामेन्द्र कुमार ने कहा 10 फरवरी को लखनऊ में आरक्षण समर्थक हुंकार भरकर केन्द्र व उप्र सरकार को अपनी मांगों से अवगत करायेंगे। समिति ने सरकार से सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ द्वारा पारित आदेश के तहत विगत सरकार में रिवर्ट किये गये 2 लाख दलित कार्मिकों को अविलम्ब पुनस्र्थापित कराने व पदोन्नति में आरक्षण की व्यवस्था उप्र में अविलम्ब शुरू करने की मांग उठायी।

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