आरक्षण समर्थक चुनाव में लेंगे अपमान का बदला, करेंगे वोट पर चोट

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लोकसभा की 80 सीटों पर चलेगा जन जागरूकता अभियान, 17 सुरक्षित सीटों पर आरक्षण समर्थकों की रहेगी खास नजर

लखनऊ, 10 मार्च 2019: आरक्षण बचाओ संघर्ष समिति संयोजक मण्डल के तत्वाधान में आज माता सावित्री बाई फुले के परिनिर्वाण दिवस पर 8 लाख आरक्षण समर्थक कार्मिकों की तरफ से उन्हें आरक्षण समर्थकों द्वारा श्रद्धा सुमन अर्पित करने के उपरान्त प्रान्तीय कार्यसमिति की बैठक में आज दोपहर 1 बजे यह ये निर्णय लिया गया कि प्रदेश के सभी 8 लाख आरक्षण समर्थक कार्मिक व उनके रिश्तेदार आने वाले लोकसभा चुनाव 2019 के मद्देनजर पूरी तरह से कमर कस लें कि 100 प्रतिशत वोट की चोट से अब हिसाब बराबर करने का समय आ गया है।

उन्होंने कहा कि जिस प्रकार से संघर्ष समिति ने पिछले 5 सालों से सड़कों पर रैलियां, पैदल मार्च, धरना प्रदर्शन आदि किया। इसके बावजूद भी लम्बे समय से लोकसभा में लम्बित पदोन्नति में आरक्षण संवैधानिक संशोधन 117वां बिल केन्द्र की मोदी सरकार ने नहीं पास किया, जिसके चलते पूरे देश में दलित कार्मिकों को अपमानित होना पड़ा। उन्होंने कहा कि हद तो तब हो गयी जब सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक पीठ द्वारा पारित निर्णय के बाद भी उ0प्र0 की सरकार ने प्रदेश में रिवर्ट किये गये 2 लाख दलित कार्मिकों का न तो रिवर्शन वापस किया और न ही प्रदेश में आरक्षण की व्यवस्था बहाल की गयी, जिससे पूरे प्रदेश में दलित कार्मिक काफी आक्रोशित है और अब वोट की चोट से अपना हिसाब बराबर करेंगे। संघर्ष समिति अपने आरक्षण समर्थक परिवारों को जागरूक कर 100 प्रतिशत वोट की चोट से जवाब देगी।

आरक्षण बचाओ संघर्ष समिति के संयोजकों में अवधेश कुमार वर्मा, केबी राम, अजय कुमार, दिग्विजय सिंह, अन्जनी कुमार, रामेन्द्र कुमार, अरविन्द फर्सोवाल ने कहा कि अब किसी भी समय लोकसभा चुनाव का शंखनाद हो सकता है। हम सभी लाखों आरक्षण समर्थक कार्मिकों को अपने पुराने जख्मों और अपमानों को याद कर आर-पार की लड़ाई का ऐलान करते हुए प्रदेश की 80 लोकसभा क्षेत्रों में आरक्षण समर्थक परिवारों के बीच लगातार जन जागरूकता अभियान चलाकर उन्हें इस बात के लिये जागरूक करेंगे।

इस बार चुनाव में आपको अपना ऐसा जनप्रतिनिधि चुनना है जो बाबा साहब द्वारा बनायी गयी संवैधानिक व्यवस्था की रक्षा करे और पदों में लम्बित आरक्षण का बिल पारित कराने के लिये अपना संकल्प दिखाये। आरक्षण समर्थक कार्मिकों के परिवारों व उनके रिश्तेदारों से यह भी अपील करती है कि वह प्रदेश की 17 सुरक्षित लोकसभा में प्रतिनिधित्व कर रहे वर्तमान सांसदों से यह सवाल जरूर पूछें कि उनके द्वारा पदोन्नति में आरक्षण बिल को पास कराने के लिये अपना शत-प्रतिशत योगदान क्यों नहीं दिया गया? अब आरक्षण समर्थक उनका साथ क्यों दें?

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