वेटलैंड्स-मिरेकल्स इन मुंबई: छिपे जैविक रत्नों के साथ खतरनाक जलवायु संकट की स्थिति को फोकस करेगा एपिक चैनल

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  • विश्व आर्द्रभूमि दिवस’ मनाने के लिए एपिक चैनल की एक नई पहल

मुंबई के वेट लैंड्स की गतिशील और सहजीवी प्रकृति को दर्शाती 40 मिनट की एक फिल्म, जो इस प्रायद्वीपीय शहर की सुंदरता, पारिस्थितिक महत्व और इससे सम्बंधित चुनौतियों पर रोशनी डालती है।

02 फरवरी 1971 को विश्व के विभिन्न देशों ने ईरान के रामसर में विश्व की आर्द्रभूमियों के संरक्षण के लिए एक संधि पर हस्ताक्षर किए थे, इसीलिए इस दिन को विश्वभर में ‘विश्व वेटलैंड्स दिवस’ अथवा ‘विश्व आर्द्रभूमि दिवस’ के रूप में मनाया जाता है।

एपिक चैनल-इंडिया का अपना इंफोटेनमेंट, हमेशा ही इस देश की पारिस्थितिक विविधता और इसके विकास से जुडी कई महत्वपूर्ण कहानियों को आप तक लेकर आया है और इसी मुहीम में एक कदम आगे बढ़ाया है बता दें कि, 40 मिनट की फिल्म – वेटलैंड्स –  मिरेकल्स इन मुंबई फिल्म भी यकीनन ही इस दिशा में एक बेहतरीन कदम है जो पर्यावरण संरक्षण के ऐसे प्रयासों के बारे में बात करती है जो अब तक अनछुए हैं।

फिल्म को पूरी तरह से 4K में शूट किया गया है, यह भारत की व्यापारिक राजधानी, मुंबई में छिपे हुए जैविक रत्नों के साथ-साथ खतरनाक जलवायु संकट की स्थिति में इन आद्रभूमियों की क्या भूमिका होगी, इन बातों को रेखांकित करेगी। मूल – 40 मिनट की यह फिल्म एपिक चैनल पर 2 फरवरी, 2020, विश्व वेट-लैंड्स डे, दोपहर 1:00, 4:00 बजे और 8:30 बजे प्रसारित की जाएगी।

देश में 58.2 मिलियन हेक्टेयर मैंग्रोवस हैं जो कि इस विश्व का 3% है,  वेटलैंड्स फिल्म, प्रकृति के खास तट रक्षकों की उपयोगिता के बारे में बताती है जो कि जलवायु परिवर्तन के खतरों से हमे बचने के लिए निरंतर कार्यक्रत हैं। यह फिल्म प्रकृति प्रेमियों के लिए एक खूबसूरत उपहार हैं, इसके सुभग प्राकृतिक दृश्य आपको एक ऐसे सफर पर लें जाएंगे कि आप अपने आपको मुंबई के मैंग्रोवेस के बीच मौजूद पाएंगे। यह एक अद्भुत अनुभव होगा।

साथ ही आप इसके बारे में विस्तार से विशेषज्ञों द्वारा इसकी समृद्धता, संरक्षण में भूमिका, प्रासंगिकता अथवा इनकी आवश्यकता के बारे में जान पाएंगे।

एपिक चैनल की कंटेंट एंड प्रोग्रामिंग हेड, तस्नीम लोखंडवाला ने फिल्म के लॉन्च पर टिप्पणी करते हुए कहा, “मुंबई को हमेशा ‘मैक्सिमम सिटी’ और ‘कांक्रीट जंगल’ के रूप में जाना जाता है, लेकिन कम ही लोग जानते हैं कि अंधेरी और पवई जैसे भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में भी सैकड़ों तरह के प्रवासी पक्षियों और जलीय जीवों के आवास हैं । यह अपने आप में एक चमत्कार है और यह फिल्म शहर की इस जटिलता के बीच खिलखिलाती प्राकृतिक सुंदरता को सहजता और जवाबदारी से पेश करती है। यहाँ की आद्रभूमि को एक मूल्यवान अचल संपत्ति के दृष्टिकोण से पहले कभी नहीं देखा गया। जो इस फिल्म में आपको देखने को मिलेगा।”

इस फिल्म में आप जान पाएंगे की कैसे खूबसूरत राजहंस मुंबई को सर्दियों में अपना घर बनाते हैं, इसके अलावा कांस्य-पंख वाले जेकना पक्षी, सैंडपाइपर्स और साथ ही कई और अद्भुत जलीय जीवों के बारे में यह फिल्म आपको बताएगी जो कि मुंबई की गगंचुम्भी इमारतों की छांव में अपनी एक अकल्पनीय दुनियां में रहते हैं , जिन्हे कहते हैं हम ‘वेटलैंडस।’

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