प्रबंधन संस्थान में मंत्रिपरिषद

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डॉ दिलीप अग्निहोत्री
उत्तर प्रदेश की योगी सरकार कुछ ही दिन में अपना आधा कार्यकाल पूरा करेगी। इसके ठीक पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक अभिनव प्रयोग किया। वह अपनी मंत्रिपरिषद को लेकर लखनऊ के भारतीय प्रबंधन संस्थान पहुंचे। शायद वह शेष कार्यकाल में अपने मंत्रियों से पहले की अपेक्षा अधिक कार्यकुशलता की अपेक्षा कर रहे है। जिससे पहले के मुकाबले अधिक प्रभावी तरीके से लोककल्याण की योजनाएं बनाई जा सकें, और अधिक कारगर ढंग से उनका क्रियान्वयन भी हो सके। योगी आदित्यनाथ स्वयं दिनरात मेहनत से सुशासन की स्थापना में लगे है। उनके प्रयासों से ढाई वर्ष में ही अनेक अभूतपूर्व कार्य हुए है। अनेक बिंदुओं पर उत्तर प्रदेश की रैंकिंग में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। कई पर तो उत्तर प्रदेश पहले स्थान पर पहुंच गया है। लेकिन योगी आदित्यनाथ इतने से ही संतुष्ट नहीं है। वह चाहते है कि उनके प्रत्येक मंत्री पूरी प्रबंधन क्षमता से कार्य करें। योगी आदित्यनाथ प्राचीन गर्न्थो के विद्वान है। वह जानते है कि गीता में भगवान ने स्वयं प्रबंधन मंत्र दिया है।
योग: कर्मसु कौशलम का सन्देश दिया गया। योगी स्वयं इसपर अमल करते है। अब वह अपने सहयोगियों से भी ऐसा ही कर्म कौशल चाहते है। इसीलिए उन्होंने मंत्रीगण के साथ भारतीय प्रबंधन संस्थान में पहुंचने का निर्णय किया था। यहां कार्यदृष्टि, कार्यशैली, निर्णय प्रक्रिया में तेजी, क्रियान्वयन में समयबद्ध अनुशासन,जरूरतमंद लोगों तक सरकार की योजनाओं का लाभ पहुंचाने की सुनिश्चित प्रक्रिया आदि का पाठ पढ़ाया गया।
मंत्रिपरिषद के सदस्यों ने प्रोफेसरों के समक्ष अपनी जिज्ञाषा रखी, संबंधित प्रश्न भी किये। अर्थव्यवस्था को दस खरब डॉलर की बनाने हेतु प्राथमिकता वाले दस सेक्टर पर भी चर्चा हुई। बताया गया कि प्राथमिकता तय होनी चाहिए,वित्तीय प्रबंधन सुनिश्चित होना चाहिए, राजनीतिक नेतृत्व कुशल व प्रभावी होना चाहिए। यहां पर छह  सत्र हुए। प्राथमिकता निर्धारण के लिए सुगम पूर्वाभ्यास, सामाजिक आर्थिक संदर्भ, समूह परिचर्चा, प्राथमिकताओं पर प्रस्तुति व प्रतिभागियों के सवाल जवाब, शीर्ष चार राज्यों से यूपी की तुलना, दृष्टि क्षेत्र विस्तार, नीतिपरक राजनीतिक नेतृत्व और भविष्य की दिशा पर भी विस्तार के बिंदुओं पर सार्थक चर्चा हुई।  मंत्रियों के आठ समूह बनाये गए थे।प्रदेश की प्रगति, राजनीतिक दृष्टि,अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य पर मंत्रियों के विचार भी आमंत्रित किये गए।
यह केवल मंत्रियों को प्रबंधन का ज्ञान देने का प्रयास मात्र नहीं था। बल्कि पिछले ढाई वर्ष से सत्ता में रहे लोगों के लिए आत्मविश्लेषण का भी अवसर था। उन्हें बताया गया कि नेतृत्व में  विनम्रता का गुण होना चाहिए।यदि वह विनम्र होगा तो मातहत काम करने वाले लोग बिना झिझके उसके साथ अपने सुझाव साझा कर सकेंगे। इससे नेतृत्व बेहतर परिणाम देने की स्थिति में होंगे। योगी के मंत्रियों को स्वयं अपना आकलन करना चाहिए कि क्या उनमें विनम्रता का पर्याप्त गुण है।
आदित्यनाथ ने ठीक कहा कि यह कार्यक्रम प्रदेश में सुशासन के लक्ष्यों को प्राप्त करने, नेतृत्व के गुण के विकास और जवाबदेही के साथ काम करने में सहायक होगा। इससे नई कार्य संस्कृति  विकसित होगी। इससे कई नए तथ्य सीखने को मिले है। सभी मंत्रिगण यहां से नये अनुभव के साथ जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि विगत ढाई वर्ष के दौरान प्रदेश को विकास को गति देकर नई पहचान देने के कई प्रयास किये गये हैं। इस कार्य में प्रधानमंत्री  का मार्गदर्शन मिला है। मंथन कार्यक्रम से राज्य सरकार के प्रदेश में सकारात्मक बदलाव के प्रयासों को आगे बढ़ाने में बहुत मदद मिलेगी। साथ ही सुशासन की भावना का विस्तार होगा। इस कार्यक्रम के साथ प्रशासनिक अधिकारियों को भी जोड़ा जाएगा।

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