बिहार की राजनीती में हर दिन एक नया मोड़ आ जाता है और इसी कड़ी में अब एक और मोड़ आ गया है | इस बार खतरा नितीश कुमार पर है | कहा जाता है की 04 अक्टूबर 2016 को नितीश कुमार जेडीयू अध्यक्ष बने तो उनकी पार्टी जेडीयू के भीतर का लोकतंत्र ख़त्म हो गया था | कुछ नेताओं ने यहाँ तक कहा की जब शरद यादव पार्टी के अध्यक्ष थे तब पार्टी में हर किसी को अपनी बात खुले तौर पर रखने की आज़ादी थी | वही अब पार्टी एक व्यक्ति की पसंद नापसंद का अड्डा बन गया है | इसकी एक झलक हमें उपराष्ट्रपति के उम्मीदवार तय करने के मौके पर भी दिखी , जब शरद यादव से पूंछा गया की यह आपकी राय है या फिर आपकी पार्टी की |
पार्टी के भीतर चल रही लड़ाई को केरल से पार्टी के एकमात्र सांसद वीरेंद्र कुमार ने जगजाहिर किया । उन्होंने राष्ट्रपति चुनाव में रामनाथ कोविंद को समर्थन देने से मना कर दिया | मुख्यमंत्री और जेडीयू अध्यक्ष नितीश कुमार ने तेजस्वी से इस्तीफे लेने के मामले में फ़िलहाल अब तक कोई बयान नहीं दिया है | लेकिन कयास लगाए जा रहे है की यदि तेजस्वी से इस्तीफे की मांग की गयी तो सरकार गिर जाएगी | और तब नितीश कुमार बीजेपी के साथ सरकार बना सकते हैं | लेकिन आपको बता दें कुछ सूत्रों के हवाले से खबर आयी है की उन्ही की पार्टी के कुछ लोग नितीश की यह कोशिश कामयाब नहीं होने देंगे | सुनने में आया है की जेडीयू के अधिकांश मुस्लिम और यादव विधायक हैं जो की बीजेपी के साथ जाने को मना कर रहें हैं | अगर गठबंधन टूटा तो फिर नितीश कुमार के 20 विधायक और 6 सांसद बागी हो सकते हैं |
243 सदस्यों वाली बिहार विधान सभा में राजद के 80, कांग्रेस के 27 और जेडीयू के 20 बागी विधायक मिल जाएं तो यह आंकड़ा 127 तक चला जाता है जो बहुमत के आंकड़े (122) से पांच ज्यादा है।जेडीयू के जिन 20 विधायकों के बारे में कहा जा रहा है कि वो बगावत कर सकते हैं। अब आने वालों दिनों में देख्नना दिलचस्प होगा की क्या होता है खैर ऐसे में यह तो कहा जहा सकता है जिस राज्य की सत्ता हर दिन गिरने की कगार में हो ,नेता बस जोड़ तोड़ में लगे हो मंत्री सीबीआई की जाँच में फंसे हो | भगवान ही भला करे वहाँ की जनता का , ऐसी हालत में अगर कोई पिसता है तो सिर्फ जनता |







