25 जिलों में सोमवार को खिलाई जाएगी पेट के कीड़े मारने की दवा

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  • निदेशक, मातृ शिशु कल्याण डॉक्टर सुरेश चंद्रा ने दी जानकारी
  • एक से 19 साल तक के बच्चों को खिलाई जाएगी एल्बेंडाजोल

लखनऊ, 22 फरवरी 2019: बच्चों को कृमि संक्रमण बचाने के लिए 25 फरवरी को राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस का आयोजन किया जा रहा है। यह अभियान प्रदेश के 25 जनपदों में एक साथ चलाया जायेगा। यह जानकारी दी निदेशक, मातृ शिशु कल्याण एवं स्टेट नोडल, राष्ट्रीय कृमि दिवस डॉ सुरेश चंद्रा ने। डॉ. चंद्रा राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस से पूर्व शुक्रवार को एक प्रेस वार्ता को संबोधित कर रहे थे। इस मौके पर जीएम आर.के.एस.के. और जीएम आर.बी.एस.के. भी मौजूद रहे।

निदेशक डॉ. चंद्रा ने बताया कि यह कार्यक्रम स्वास्थ्य विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग, शिक्षा विभाग (बेसिक), माध्यमिक शिक्षा विभाग, पंचायतीराज विभाग, माध्यान भोजन प्राधिकरण (एम0डी0एम), स्वच्छ भारत मिशन (एसबीएम) एवं अन्य विभागों के संगठित प्रयासों और एविडेंस एक्शन के सहयोग से संचालित किया जा रहा है। इस कार्यक्रम के तहत उत्तर प्रदेश़ के चयनित 25 जनपदों (आगरा, अलीगढ़, बागपत, बिजनौर, बदायूं, बुलन्दशहर, एटा, फिरोजाबाद, गौतमबुद्ध नगर, गाजियाबाद, हापुड़, हाथरस, जेे0पी0 नगर, झाँसी, काशीराम नगर, ललितपुर, मैनपुरी, मथुरा, मेरठ, मुरादाबाद, मुज़फ्फरनगर, रामपुर, सहारनपुर, संभल एवं शामली) के सभी स्कूल और आंगनवाड़ी में 1 से 19 साल तक के सभी बच्चों और किशोरों को एल्बेंडाजोल की दवाई खिलाकर कृमि मुक्त किया जाऐगा। अनुपस्थिति या बीमारी के कारण जिन बच्चों को 25 को एल्बेंडाजोल नहीं खिलाई जा सकी उन्हें एक मार्च को माॅप-अप दिवस पर दवाई खिलाकर कृमि मुक्त किया जायेगा।

22 करोड़ को कृमि संक्रमण:

राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस कार्यक्रम का प्रमुख उद्देश्य उत्तर प्रदेश में सभी बच्चों और किशोरों के स्वास्थ्य एवं पोषण सम्बन्धी स्थिति और संज्ञानात्मक विकास तथा जीवन की गुणवत्ता में सुधार के लिए उन्हें कृमि मुक्त करना है। आम तौर पर देखा गया है कि कृमि संक्रमण का बच्चों के स्वास्थ्य और समग्र विकास पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ता है। भारत में कृमि संक्रमण एक जन स्वास्थ्य समस्या के रूप में उभर रहा है। डब्ल्यू.एच.ओ. के अनुसार भारत में 5 से 14 वर्ष तक की उम्र के 22 करोड़ से भी अधिक बच्चों को कृमि संक्रमण का खतरा है। भारत उन देशों में से एक है जहाँ कृमि संक्रमण और इससे संबन्धि रोग सबसे अधिक पाए जाते हैं। कृमि संक्रमण की रोकथाम और नियंत्रण के लिए एल्बेंडाजॉल (400 मि.ग्रा) दवाई का सेवन एक सुरक्षित, लाभदायक एवं प्रभावी उपाय है जो साक्ष्य आधारित और वैश्विक स्तर पर स्वीकृत है।

प्रतिकूल घटना से न घबराएं:

कृमि नियंत्रण की एल्बेंडाजॉल दवाई के सेवन से प्रतिकूल घटना होने की संभावना बहुत कम होती है। जिन बच्चों को तीव्र कृमि संक्रमण होता है आमतौर पर उन्हें ही मामूली प्रतिकूल घटना (एडवर्स इफेक्टस) होते हैं जैसे कि जी मिचलाना, पेट में हल्का दर्द, उल्टी, दस्त और थकान आदि। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के अनुरूप प्रतिकूल घटना नीति चरणों का पूरी तरह से पालन किया जाना निर्देशित है और सभी स्तर के अधिकृत अधिकारियों को इसके लिए प्रशिक्षित किया गया है।

कुपोषण, एनीमिया से बचाएगा अभियान:

राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस को सफल बनाने हेतु 82047 शि़क्षकों और 57738 आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित किया गया है। नीति आयोग द्वारा दिसंबर 2017 में राष्ट्रीय पोषण नीति तैयार की गयी ताकि वर्ष 2022 तक कुपोषण एवं एनीमिया में अपेक्षित कमी लायी जा सके। राष्ट्रीय पोषण नीति के अन्तर्गत प्रारम्भ किये गए विशेष कार्यक्रम एनीमिया मुक्त भारत एवं पोषण अभियान में राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस कार्यक्रम को अहम स्थान दिया गया है। समुदाय में स्वच्छता एवं साफ सफाई और कृमि संक्रमण के नियंत्रण के बारे में जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से स्वच्छ भारत मिशन कार्यक्रम एवं कृमि मुक्ति दिवस एक संयुक्त प्रयास है। इस संयुक्त रणनीति के अन्तर्गत खुले में शौच के कुप्रभावों एवं कृमि संक्रमण की रोकथाम के लिए आवश्यक महत्वपूर्ण व्यहवारांे के प्रति समुदाय को जागरूक किया जा रहा है।

 पिछले चरण में 5 करोड़ ने खाई दवा:

राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस के अगस्त 2018 चरण में 5.05 करोड़ बच्चो और किशोर/किशोरियों को 2.17 लाख  स्कूलों और 1.82 लाख आंगनवाड़ी केंद्रों में कृमि नियंत्रण की दवा खिलाई गयी। इनमें निजी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की संख्या 1.15 करोड थी और 27.1 लाख स्कूल न जाने वाले बच्चे भी शामिल थे। 1.5 लाख आशा कार्यकर्ताओं ने सामुदायिक जागरूकता एवं संगठन कर इस कार्यक्रम में मुख्य भूमिका निभाई। यह स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग भारत सरकार द्वारा और मानव संसाधन विकास विभाग, स्कूल शिक्षा विभाग तथा महिला एवं बाल विकास विभाग विभागों के संगठित प्रयासों से संभव हो पाया है। उत्तर प्रदेश राज्य आगामी कृमि मुक्ति दिवस फरवरी 2019 के लिए पूरी तरह तैयार है।

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