- ग्रामीण व किसानों की व्यापक बिजली दर वृद्धि पर प्रदेश में लगातार आन्दोलन जारी
- नया हवाई अड्डा लगाओ और 30 हजार यूनिट खर्च तक बड़ी छूट पाओ, गरीब व किसान बनकर केवल 100 यूनिट में सीमित हो जाओ यह है कैसा न्याय?
लखनऊ 04 दिसम्बर। उप्र पावर कार्पोरेशन के दबाव में विद्युत नियामक आयोग द्वारा ग्रामीण विद्युत उपभोक्ताओं की दरों में लगभग 67 से 150 प्रतिशत की वृद्धि किये जाने को लेकर पूरे प्रदेश में जहां किसान आन्दोलित हैं और धरना प्रदर्शन के माध्यम से अपना आक्रोश व्यक्त कर रहे हैं, वहीं उपभोक्ता परिषद ने प्रदेश की नौकरशाही द्वारा मा. मुख्यमंत्री जी को गुमराह किये जाने का आरोप लगाते हुए एक बड़ा खुलासा किया है। कहा जहां पावर कार्पोरेशन प्रबन्धन गरीब लाइफ लाइन विद्युत उपभोक्ताओं के स्लैब को एक किलोवाट 150 यूनिट से घटाकर 100 यूनिट पर सीमित कर दिया है और यह प्रचारित किया जा रहा है कि किसान व गरीब जनता को रू0 3.08 प्रति यूनिट की सब्सिडी मिल रही है, लेकिन उप्र के नौकरशाह शायद भूल गये जो गरीबों को 100 यूनिट पर समेटकर बड़ी-बड़ी बातें कर रहे हैं।
उनके द्वारा ही उप्र सरकार से नगर विमानन प्रोत्साहन नीति 2017 के अन्तर्गत उप्र के विभिन्न जिलों घरेलू हवाई अड्डा बनाने वालों को 30 हजार यूनिट प्रतिमाह खर्च करने पर रू0 4 प्रति यूनिट की सब्सिडी दी जायेगी, की अधिसूचना जारी कराया है। अधिसूचना जारी होते ही रू0 4 प्रतियूनिट सब्सिडी का आदेश प्रमुख सचिव, ऊर्जा द्वारा अक्टूबर, 2017 में सभी बिजली कम्पनियों को भेजते हुए यह निर्देश दिया गया है कि भुगतान की गयी धनराशि की सूचना प्रतिमाह नागरिक उड्डयन को भेजी जाये। प्रदेश का यह कैसा कानून है कि किसान व ग्रामीण जनता पर महंगी बिजली की मार और प्रदेश में हवाई अड्डा बनाने वालों को बिजली में भारी राहत। उपभोक्ता परिषद का मत है कि यह सब संवेदनशील मामले प्रदेश के नौकरशाहों द्वारा मा0 मुख्यमंत्री जी के सामने नहीं रखे गये, नहीं तो ऐसी हास्यास्पद स्थिति न बनती।
उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि प्रदेश के मुख्यमंत्री जी को अविलम्ब पूरे मामले का संज्ञान लेकर इस प्रकार की दोहरी नीति बनाने वालों के खिलाफ सख्त कदम उठाना चाहिए। सवाल यह उठता है कि जिस देश में अन्नदाता के ऊपर दोहरी मार डाल दी जाये और वहीं दूसरी तरफ पूंजीपतियों जो हवाई अड्डा बनाकर उसका नफा नुकसान निकाल लेंगे, उन्हें 30 हजार यूनिट तक रू0 4 प्रतियूनिट की सब्सिडी उप्र के इतिहास में सबसे बड़ा हास्यास्पद फैसला है। 100 यूनिट तक रू0 3 प्रतियूनिट में बिजली देने को लेकर पावर कार्पोरेशन ऐसा हल्ला मचा रहा है जैसे गरीब जनता की बिजली फ्री कर दी हो। पावर कार्पोरेशन की नीति यदि पारदर्शी है तो उसे यह भी प्रचार करना चाहिए कि सरकार ने नया घरेलू हवाई अड्डा बनाने वालों के लिये 30 हजार यूनिट तक रू0 4 प्रतियूनिट की सब्सिडी दी है। अब हवाई अड्डा बनाओ और सस्ती बिजली पाओ।
उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने कहा कि पावर कार्पोरेशन प्रबन्धन एक तरफ यह प्रचारित करता है कि लोग अब कूलर, पंखा इत्यादि का उपयोग कर ज्यादा बिजली खर्च कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर उन्हें 100 यूनिट के स्लैब में बांधा जा रहा है। यदि उनके द्वारा 101 यूनिट खर्च की जाती है तो वह आम जनता की श्रेणी में आ जायेंगे। क्या प्रदेश के गरीब व किसान को पंखा और कूलर में बैठने का अधिकार नहीं है। जहां बिना बिजली के पानी नहीं उपलब्ध होता, वहां स्लैब को कम करना बहुत ही बड़ा दुर्भाग्य है। वास्तव में लगातार स्लैब जरूरत के आधार पर बढ़ना चाहिए लेकिन वर्तमान सरकार में पावर कार्पोरेशन द्वारा स्लैब को घटाकर गरीबों के साथ अन्याय किया गया है, जिससे सरकार की छवि धूमिल हो रही है।







