लखनऊ, 31 मई 2025: उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने पावर कॉरपोरेशन के वित्त विंग में कथित अनियमितताओं को उजागर किया है। परिषद ने ग्रांट थॉर्नटन कंपनी को 42 जनपदों के निजीकरण के लिए टेंडर देने में हितों के टकराव और साजिश का आरोप लगाया। 12 सितंबर 2024 को ई-पोर्टल पर प्रकाशित करोड़ों रुपये के इस टेंडर को आठ महीने से लंबित रखा गया, जिसके पीछे वित्त विंग की भूमिका संदिग्ध बताई जा रही है।
परिषद ने टेंडर के प्रपत्रों को सार्वजनिक कर जनता और मीडिया से इसकी पारदर्शी जांच की अपील की है। परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा, “वित्त विंग में लेटरल एंट्री के जरिए बाहरी लोगों की भर्ती और टेंडर प्रक्रिया में गड़बड़ी साफ दिखती है। ग्रांट थॉर्नटन को फायदा पहुंचाने के लिए बैकडेटिंग जैसे हथकंडे अपनाए गए।”
उन्होंने सरकार से मांग की कि मुख्य सचिव स्तर पर इस मामले की उच्च स्तरीय जांच हो, टेंडर प्रक्रिया रद्द की जाए, और वित्त विंग की अन्य लंबित टेंडर प्रक्रियाओं की भी जांच हो। वर्मा ने यह भी सवाल उठाया कि घाटे में चल रहे निगम में लेटरल एंट्री से मुख्य अभियंता जैसे बड़े पदों पर भर्तियां क्यों की जा रही हैं, जबकि विभागीय कर्मचारियों को प्रक्रिया से दूर रखा जा रहा है।
उपभोक्ता परिषद की इस पहल से पावर कॉरपोरेशन में पारदर्शिता और जवाबदेही की उम्मीद जगी है। परिषद ने सरकार से अपील की है कि इस मामले को गंभीरता से लेते हुए दोषियों पर कार्रवाई की जाए, ताकि जनता का भरोसा बना रहे और बिजली सेवाओं में सुधार हो सके।







