- उपभोक्ता परिषद ने बढ़ी बिजली दर से राहत दिलाने के लिए मुख्यमंत्री जी से लगाई गुहार
- और उठायी माँग, कहा – सरकार अतिरिक्त सब्सिडी घोषित कर ग्रामीण किसानों व आम जनता की दरों में कराये कमी
- उपभोक्ता परिषद का बड़ा आरोप पावर कार्पोरेशन प्रबन्धन ने गुमराह कर आर्थिक स्थिति का रोना रोकर ग्रामीण व किसानों की दरों में करायी अप्रत्याशित वृद्धि
- कार्पोरेशन की आर्थिक स्थिति यदि है खराब, तो कैसे कुछ महीनों में ही जल्दबाजी में लगभग 5500 करोड़ रूपये के इलेक्ट्रानिक मीटर, प्रीपेड स्मार्ट मीटर खरीद का दिया जा रहा अंजाम
लखनऊ 15 दिसम्बर। पावर कार्पोरेशन के दबाव में विद्युत नियामक आयोग द्वारा मनमाने तरीके से प्रदेश के ग्रामीण किसानों, दुकानदारों, आम शहरी घरेलू उपभोक्ताओं की दरों में 50 से 150 प्रतिशत तक की गयी वृद्धि को लेकर जहाँ पूरे प्रदेश में लगातार आन्दोलन हो रहे हैं। अभी भी समय है आम जनमानस किसानों व गरीब जनता की भावनाओं को ध्यान में रखकर प्रदेश के मा. मुख्यमंत्री जी को विधानसभा में पेश होने वाले सप्लीमेन्ट्री बजटीय व्यवस्था में ग्रामीणों को किसानों की दरों को कम करने के लिए अतिरिक्त सब्सिडी की घोषणा करना चाहिए। प्रदेश के उपभोक्ताओं की तरफ से उपभोक्ता परिषद मुख्यमंत्री जी से मांग करता है कि जिस प्रकार से जीएसटी जैसे संवेदनशील मामले में केन्द्र सरकार ने आगे आकर अनेकों वस्तुओं की दरों को कम करने के लिए जीएसटी के तहत कुछ उत्पादों की दरें कम की, उसी तरह ग्रामीण व किसानों की दरों को कम करने के लिए सरकार को अतिरिक्त सब्सिडी घोषित करना चाहिए, जिससे प्रदेश का ग्रामीण व किसान मंहगी बिजली दर की मार से बच सके।

उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि विधान सभा से लेकर जिले व तहसील में व्यापक बिजली दर बढ़ोत्तरी को लेकर जो हंगामा मचा है, कहीं न कहीं उसके पीछे पावर कार्पोरेशन प्रबन्धन की गलत नीतियाँ हैं। उपभोक्ता परिषद जिस दिन बिजली दर प्रस्ताव पावर कार्पोरेशन द्वारा मनमाने तरीके से आयोग में दाखिल किया गया, उसी दिन से उपभोक्ता परिषद यह आवाज उठा रहा है कि पावर कार्पोरेशन प्रबन्धन ने प्रदेश के मुख्यमंत्री जी को आर्थिक स्थिति का रोना रोकर गुमराह किया, अन्यथा की स्थिति में बिजली दरों में अब तक की इतनी बड़ी बढ़ोत्तरी न होती। एक तरफ पावर कार्पोरेशन कहता ह कि मंहगी बिजली दर पर अंकुश लगा रहा हूँ, लाइन हानियाँ कम हो रही हैं, भ्रष्टाचार में कमी आ रही है और अन्य क्षेत्रों में भी सुधार हो रहा है तो फिर जब पावर कार्पोरेशन प्रबन्धन हर क्षेत्र में सुधार कर रहा है तो ऐसे में बिजली दर घटाने की बात क्यों नहीं की? बिजली दर में व्यापक बढ़ोत्तरी का मतलब पूरी तरह बिजली विभाग की नाकामी व योजनाओं का फ्लाप साबित होना ही सिद्ध करता है।
उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने कहा कि पावर कार्पोरेशन प्रबन्धन ने सरकार के सामने एक गलत तस्वीर पेश की और बार-बार यह कहा कि यदि बिजली दरों में बढ़ोत्तरी नहीं करायी गयी तो सबको सुचारू बिजली देना मुश्किल है, क्योंकि कार्पोेरेशन की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है। यदि कार्पोरेशन की आर्थिक स्थिति इतनी खराब है तो 2-5 साल में जो मीटर खरीद होनी चाहिए वह कुछ महीनों में पावर कार्पोरेशन खरीद करवा रहा है। लगभग 5500 करोड़ रूपये के इलेक्ट्रानिक मीटर, स्मार्ट मीटर व प्रीपेड मीटर पावर कार्पोरेशन प्रबन्धन खरिदवा रहा है, इतना पैसा कहाँ से पावर कार्पोरेशन के पास आ गया? इसका मतलब केवल बिजली विभाग अपनी अक्षमता का खामियाजा प्रदेश की जनता पर डालने पर आमादा है, जिस पर प्रदेश के मा. मुख्यमंत्री महोदय को हस्तक्षेप करना चाहिए।







