- आयोग द्वारा टोरेंट पावर आगरा के 3 वर्ष के रोल आउट प्लान रू.420 करोड़ को गुपचुप तरीके से 5 साल बाद अनुमोदन दिये जाने पर मचा बवाल
- जिस रोल आउट प्लान को 5 वर्ष पूर्व आयोग ने कर दिया था वापस, उसे बिना जाँच पड़ताल के कैसे किया अनुमोदित
- उपभोक्ता परिषद ने पूरे मामले पर मुख्यमंत्री से पूरे मामले की सीबीआई जाँच की उठाई मांग
लखनऊ 23 दिसम्बर। उप्र विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष द्वारा 4 दिन पहले गुपचुप तरीके से आगरा में कार्य कर रही मेसर्स टेरेन्ट पावर लि. के रोल आउट प्लान साल-2010-2011, 2011-2012 व साल -2012-2013 कुल 3 वर्षों का रू.420 करोड़, जो नियामक आयोग द्वारा वर्ष 2011 में वापस कर दिया गया था, को हरी झंडी दे दी। आयोग द्वारा जारी आदेश की भनक लगते ही उपभोक्ता परिषद् ने आयोग आदेश पर सवाल करते हुए अपना विरोध नियामक आयोग अध्यक्ष एस के अग्रवाल से जता दिया और कहा जब नियामक आयोग द्वारा टेरेन्ट पावर लि, के रोल आउट प्लान रू.360 करोड़ को वर्ष 2012 में वापस लौटा दिया गया था ऐसे में अब पुनः पुरानी पत्रावली दबाकर नई पत्रावली बनाकर आयोग द्वारा गुपचुप तरीके से कैसेे रोल आउट प्लान को बढ़ाकर रू.420 करोड़ को हरी झंडी दी गयी यह उच्च स्तरीय जाँच का मामला है। उपभोक्ता परिषद ने पूरे मामले पर प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री जी से हस्तक्षेप की मांग करते हुए सीबीआइ जाँच कराने की मांग उठाई है।
गौरतलब है कि आगरा शहर में काम कर रही टोरेन्ट पावर के लिए पहले बिजली कम्पनी दक्षिणांचल द्वारा वर्ष 2011-12 में रू0 360 करोड़ का रोल आउट प्लान आयोग से अनुमोदन करने की मांग की गई थी जिस पर उपभोक्ता परिषद के विरोध के बाद नियामक आयोग द्वारा रोल आउट प्लान की फीस को वापस करते हुए अनुमोदन देने से मना कर दिया गया था अब ऐसी क्या मजबूरी आ गई कि आयोग द्वारा 5 साल बाद पुनः टोरेंट पावर द्वारा मांगे गये लगभग 450 करोड़ के सापेक्ष आयोग द्वारा रू 420 करोड़ का अनुमोदन बिना छानबीन के दिया गया।
उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि उपभोक्ता की शिकायत पर वर्ष 2013 में आयोग द्वारा प्रबंध निदेशक दक्षिणांचल से टोरेंट पावर की जाँच कराई गई जिसमें वह दोषी पाया गया उसे भी छिपा लिया गया,और जब पावर कारपोरेशन द्वारा टोरेन्ट पावर को इनपुट बेस्ड फेन्चाइजी के रूप में कार्य करने हेतु दक्षिणांचल विद्युत वितरण कम्पनी से द्विपक्षीय एग्रीमेन्ट कराया गया था उस समय नियामक आयोग के समक्ष अनुमोदन हेतु क्यों नहीं रखा गया रोल आउट प्लान पर कारपोरेशन आयोग से अनुमोदन लेकर अपनी की गयी गल्लितियों पर कानूनन मुहर लगवा लिया है। बिना जांच पड़ताल किये टोरेन्ट पावर द्वारा सौपे गये रोल आउट प्लान पर अनुमोदन देना कतई उचित नहीं है क्योंकि इसका भार प्रदेश के उपभोक्ताओं को ही भुगतना होगा।
दक्षिणांचल कम्पनी द्वारा इनपुट विद्युत दर के आधार पर 20 वर्ष के लिए अलग-अलग वर्षवार 20वें वर्श अधिकतम् रू. 2.23 प्रति यूनिट व शुरूवात के पहले वर्ष में रू. 1.54 प्रति यूनिट की दर से बिजली टोरेन्ट पावर को देने हेतु एग्रीमेन्ट कर लिया गया जो विद्युत अधिनियम-2003 का खुला उल्लघंन है। कोई भी फ्रेन्चाइजी विद्युत अधिनियम-2003 के तहत केवल बिजली कम्पनी के बिहाप पर विद्युत का वितरण करने हेतु अधिकृति है, परन्तु बिजली बेचने हेतु नहीं पावर कारपोरेशन बल्क सप्लाई दर से कहीं कम दर पर कैसे किसी को बिजली दे सकता है। इसका आक्कलन कौन करेगा कि टोरेन्ट पावर रिर्टन आफ इक्यूटी 16 % से ऊपर नहीं कमा रहा है। इसी प्रकार टोरेन्ट पावर आगरा क्षेत्र में पुराने बकाये को वसूलने हेतु जो अधिकतम् 20 % तक का स्वयं लेने का प्राविधान किया गया है व किस फारमूले के तहत है। इन सब पहलुओं की पारदर्षिता के आधार पर उच्च स्तरीय जांच नियामक आयेाग द्वारा किया जाना चाहिए था जो नही किया गया।







