नई दिल्ली, 25 जनवरी। भले ही दिवाली दिल्ली में पटाखों पर प्रतिबंध से प्रदूषण कम हुआ हो, लेकिन प्रतिबंध का व्यापक विरोध भी देखने को मिला। कयास लगाए जा रहे हैं कि प्रतिबंध इस साल भी जारी रह सकता है। ऐसे में पटाखा प्रेमियों के लिए ई-पटाखा मुहैया कराने को लेकर केंद्र सरकार सक्रिय हो गई है। सस्ते ई-क्रैकर्स बनाने को लेकर शोध पर काम शुरू कर दिया है।
ऊर्जा एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय इस मिशन से जुड़ा है और प्रधानमंत्री कार्यालय इस कार्ययोजना को निर्देशित कर रहा है। वैज्ञानिकों का कहना है कि ई-पटाखे आवाज और रोशनी के मामले में मौजूदा पटाखों के जैसे ही होंगे, लेकिन इनसे धुआं नहीं निकलेगा। शोर भी मानकों के अनुरुप होगा। सीएसआइआर (काउंसिल ऑफ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च) लैबोरेट्री ने भी ई-पटाखे बनाने पर काम शुरु किया है।
अभी बाजार में एक-दो कंपनियों के ही ई-पटाखे उपलब्ध हैं। काफी महंगे होने की वजह से यह आम जनता से दूर हैं। यह इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस की तरह होते हैं, जो पटाखों जैसी आवाज के साथ वैसी ही रोशनी भी करते हैं। इलेक्ट्रॉनिक होने के कारण इनमें धुआं नहीं होता। ई-पटाखे चार्जेबल बैटरी से काम करेंगे और रिमोट से इन्हें चलाया जा सकेगा।
दिवाली-2018 से पहले ई-पटाखों को बाजार:
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के सचिव ए.सुधाकर का कहना है कि इसी माह इसे लेकर एक योजना बनाई गई है और दिवाली-2018 से पहले ई-पटाखों को बाजार में मुहैया कराने का लक्ष्य है। सस्ते ई-पटाखे बाजार की इलेक्ट्रॉनिक सामानों की दुकानों पर उपलब्ध रहें। इनके अनार, फुलझड़ी और लड़ी वर्जन पर इस समय काम किया जा रहा है।
आगामी 6 से 8 माह में यह काम पूरा होने की उम्मीद भी है। इसके अलावा परंपरागत पटाखों को भी प्रदूषण रहित बनाने पर शोध किया जा रहा है। इसके लिए कई रसायनों को जांचा जा रहा है ताकि धुआं रहित पटाखे बनाए जा सकें।
ई-पटाखे बाजार में बहतर विकल्प होंगे लेकिन यहां आपको यह भी बता दें कि बारूद से भरे पटाखे जहां पर्यावरण के लिए हानिकारक है वहीं सेहत पर भी बुरा असर डालते हैं। तेज आवाज वाले पटाखों में बारूद, चारकोल, नाइट्रेट और सल्फर जैसे रसायनों का इस्तेमाल होता है, जिससे चिंगारी, धुआं और तेज आवाज निकलती है। ऐसे पटाखों के कारण हानिकारक रसायन गैस के रूप में हवा में फैल जाते हैं, जो सेहत को नुकसान पहुंचा सकते हैं।







