वरिष्ठ पत्रकार पंकज चतुर्वेदी की कलम से

श्रीनगर के निचले हिस्से के नौहट्टा स्थित ऐतिहासिक जामिया मस्जिद में गुरूवार की रात “शब-ए -कदर” आयोजन के दौरान जो कुछ हुआ वह बर्बर है और इस्लाम, कश्मीर और मानवता के लिए शर्म की बात है , एक 57 साल के इंसान को पहले नंगा किया गया, फिर उसे इतना पीटा गया कि उसकी लाश देख कर पहचानना मुश्किल था. शहीद हुआ इंसान जम्मू कश्मीर पुलिस की सशस्त्र तीसरी बटालियन में उप पुलिस अधीक्षक थे, शर्मनाक तो कश्मीर पुलिस भी है जो पहले कई घंटे यह भी नहीं स्वीकार कर पायी कि शहीद हुआ व्यक्ति उनका अफसर है .
रमजान के पवित्र महीने के आखिरी जुमा यानि शुक्रवार की रात को शब ए कदर कहा जाता है और इस अवसर पर जामिया मस्जिद में धार्मिक पुस्तकों का पाठ, प्रवचन आदि होते हैं और बड़ी भीड़ जुटती है . पुलिस अधिकारी एम् ए पंडित की ड्यूटी वहां भीड़ प्रबंधन के लिए थी ।
अभी तक सामने आये तथ्यों के अनुसार श्री पंडित मस्जिद के भीतर अपने मोबाईल से फोटो खींच रहे थे , तभी किसी ने इस पर आपत्ति की और वे तेजी से बाहर निकले, वे सादे कपड़ों में थे, इसी दौरान उनकी सरकारी पिस्तौल गिर गयी और शैतान किस्म के लोगो ने हल्ला कर दिया कि ख़ुफ़िया पुलिस के लोग मौलवी मीर वाईज उमर फारुक को मारने आये हैं,. भीड़ जब उन पर टूटी तो उन्होंने हिम्मत से अपनी पिस्तौल से कई हवाई फायर किये लेकिन सामने लोग ज्यादा थे और वे उनकी वहशियत के शिकार हो गए . सनद रहे , मौलवी वाईज इस मस्जिद का सदर है और कश्मीर के अलगाववादी धड़े हुरियत कांफ्रेंस का नेता ।
इस अफवाह के बाद भीड़ ने उसे घेर लिया. और निर्ममता से पीटा , कुछ लोगों ने पत्थर से भी उनके सर और चेहरे पर हमला किया . एक घंटे से ज्यादा उनकी निर्वस्त्र लाश नौहट्टा की गली में पड़ी रही . पहले तो पुलिस कहती रही कि उनके सभी लोग सुरक्षित हैं बाद में स्वीकार किया कि शहीद अफसर उनकी फ़ोर्स का है . सवाल उठता है कि उप पुलिस अधीक्षक के साथ दो पी एस ओ थे , इसके अलावा इस स्तर के अफसर के साथ कम से कम एक हेड कांस्टेबल और चार सिपाही अवश्य होंगे, वे हमले के समय कहाँ गायब हो गए ।
शहीद श्री पंडित घटना स्थल से कुछ ही दूर श्रीनगर के नौपुरा के निवासी थे, उनकी एक बेटी ढाका, बांग्लादेश से एम् बी बी एस की पढाई आकर रही है, बेटा स्कूल में है, उनके सगे भाई मुहम्मद अब्दुल पंडित कश्मीर के मशहूर वकील हैं . पिछले दो महीनो के दौरान आतंकवादियों ने अलग अलग घटनाओं में कश्मीर पुलिस के २२ से अधिक लोगो को मारा है इससे स्थानीय लोगों में आतंकवादियों के प्रति गुस्सा भी है . इस घटना से श्रीनगर के पढ़े लिखे और नौकरीपेशा लोगों में अलगाववादियों के प्रति गुस्सा है ।
नेशनल कांफ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला ने घटना को बर्बर कहते हुए पीड़ित परिवार्ट को दस लाख रुपये देने के साथ साथ नेशनल कांफ्रेंस के सभी विधायकों को अपना एक महीने का वेतन देने के लिए कहा हैं . मुख्य मंत्री महबूबा मुफ़्ती खुद शाहित श्री पंडित के जनाजे पर फूल चढाने गयी थीं।
असल में कश्मीर को ले कर राज्य सरकार दिशाहीन है और इसी लिए आतंकी बुरहान वाणी के मारे जाने के बाद से वहां के हालात सम्भल नहीं पा रहे हैं . ऐसे में एम् ए पंडित की शहादत बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है, एक बात और एक अखबार ने हिंदी में लिखा कि चूँकि उनका सरनेम पंडित था इसी लिए उन्हें मारा गया, असल में ऐसा कुछ भी नहीं हुआ था , मुस्लिम पंडित की अंग्रेजी स्पेलिंग अलग होती है और यह कश्मीरी जानते हैं ।
इस मसले में कुल 12 लोगों कि पहचान हुयी है, पांच गिरफ्तार हुए हैं ,इनमें से दो गोली से घायल हुए मुदस्सिर और दानिश हैं ।






