Close Menu
Shagun News India
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Monday, June 22
    Shagun News IndiaShagun News India
    Subscribe
    • होम
    • इंडिया
    • उत्तर प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • राजस्थान
    • खेल
    • मनोरंजन
    • ब्लॉग
    • साहित्य
    • पिक्चर गैलरी
    • करियर
    • बिजनेस
    • बचपन
    • वीडियो
    • NewsVoir
    Shagun News India
    Home»ब्लॉग

    रिश्ते उपहार हैं प्रकृति का, सब धर्मों में रिश्ते और उनके कर्तव्यों को रखा गया है सर्वोपरि

    ShagunBy ShagunApril 17, 2026Updated:April 17, 2026 ब्लॉग No Comments7 Mins Read
    Facebook Twitter LinkedIn WhatsApp
    Relationships are nature's gifts
    Share
    Facebook Twitter LinkedIn WhatsApp
    Post Views: 433

    आधुनिकता की अंधी दौड़ में बेजान होते रिश्ते!

    rahul guptaराहुल कुमार गुप्ता

    डिजिटल आभासी चमक और सोशल मीडिया की कृत्रिम चकाचौंध के मध्य मानवीय संवेदनाएं आज एक ऐसे आत्मघाती चौराहे पर खड़ी हैं, जहां दिखावा एक नया वैश्विक धर्म बन गया है और रिश्ता महज एक बोझिल औपचारिकता!

    रोज के समाचारों, सोशल मीडिया खबरों और व्यक्तिगत रूप से बहुत से लोगों के साक्षात्कार और उनकी आपबीती ने समाज के जिस गलते हुए फोड़े पर उंगली रखी है, वह केवल कोई व्यक्तिगत आक्रोश नहीं, बल्कि हमारे आधुनिक मानस के खोखलेपन का वीभत्स एक्सरे है। आज हम एक ऐसे सेल्फी-जीवी युग के साक्षी हैं, जहां किसी असहाय को एक मुट्ठी अनाज थमाते वक्त दस हाथ अनाज पकड़ने के लिए नहीं, बल्कि कैमरा एंगल्स सेट करने के लिए आगे बढ़ते हैं। यह कुत्सित प्रदर्शनवाद दरअसल उस करुणा का उपहास है, जिसे हमारे पूर्वजों ने गुप्त दान कहकर प्रतिष्ठित किया और गुप्त दान की महत्ता बताई। विडंबना देखिये, जो हाथ फेसबुक की वॉल पर परोपकार की इबारत लिखते हैं, वही हाथ अपने ही घर की दीवारों के भीतर सिसक रहे अभावग्रस्त भाई-बहनों या बुजुर्गों का दरवाजा खटखटाने में लकवाग्रस्त हो जाते हैं। यह कैसी महानता है जो अखबार की स्याही में तो चमकती है, लेकिन अपनों की आंखों के पानी में डूबकर मर जाती है?

    मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण से यह व्यवहार नार्सिसिज्म (स्व-मोह) का एक भयावह रूप है। जब कोई व्यक्ति अपनी प्रशंसा की भूख मिटाने के लिए निर्धनों के साथ फोटो खिंचवाता है, तो वह वास्तव में परोपकार नहीं, बल्कि उनकी निर्धनता का व्यापार कर रहा होता है। वह बाहरी दुनिया में एक मसीहा का मुखौटा पहनकर उस आत्म-ग्लानि को दफन करना चाहता है, जो उसे अपने रक्त-संबंधियों की उपेक्षा करने पर कचोटनी चाहिए थी। विज्ञान कहता है कि निस्वार्थ सेवा से मस्तिष्क में ऑक्सीटोसिन जैसे रसायनों का स्राव होता है जो स्थायी मानसिक स्वास्थ्य देते हैं, परंतु यह दिखावे वाली मदद केवल डोपामाइन की क्षणिक सनक पैदा करती है। परिणामतः, ये महान लोग आलीशान कोठियों में रहकर भी भीतर से इतने दरिद्र होते हैं कि साल-दो साल में अपने पैतृक गांव जाकर माता-पिता को चंद रुपये थमाकर उसे अपनी उदारता का प्रमाण पत्र मान लेते हैं। उनके बंगले की ऊंचाई जितनी बढ़ती जाती है, उनके चरित्र का धरातल उतना ही धंसता जाता है।

    संसार के तमाम पवित्र ग्रंथों ने रिश्तों की इस प्राथमिकता को बड़ी सख्ती से रेखांकित किया है। इस्लाम की रूह ‘कुरान’ में ‘सिला-ए-रहमी’ (रिश्तों की सुरक्षा) को ईमान का अभिन्न अंग माना गया है। सूरह अल-बकरा की आयतें स्पष्ट करती हैं कि तुम्हारी नेकी का कोई मोल नहीं यदि तुम अपने धन को अल्लाह की मुहब्बत में सबसे पहले अपने रिश्तेदारों और यतीमों पर खर्च नहीं करते। यहाँ रिश्तेदारों को प्राथमिकता देना केवल एक सुझाव नहीं, बल्कि ईश्वरीय आदेश है। हदीस-ए-कुदसी का वह कथन आज के प्रदर्शनकारियों के लिए एक तमाचा है, जिसमें अल्लाह कहता है कि जो रिश्तों को तोड़ता है, मैं उसे अपनी रहमत से अलग कर देता हूँ। क्या उन लोगों ने कभी सोचा है कि बाहर बांटी गई खैरात का क्या लाभ, अगर घर के भीतर का चिराग अपनों की बेरुखी की आंधी में बुझ रहा हो?

    गुरु नानक देव जी ने वंड छको का सिद्धांत दिया, जिसका अर्थ है अपनी कमाई का एक हिस्सा जरूरतमंदों में बाँटना। लेकिन इसमें ईमानदारी की कमाई और परिवार के प्रति जिम्मेदारी को सर्वोपरि रखा गया है।

    इसी प्रकार, बाइबल रिश्तों के प्रति उत्तरदायित्व को ईश्वरीय उपासना से भी ऊपर रखती है। प्रथम तीमुथियुस 5:8 का वह अंश आज के तथाकथित समाजसेवियों के लिए आईना है। “यदि कोई अपनों की और विशेषकर अपने घराने की चिंता न करे, तो वह विश्वास से मुकर गया है और अविश्वासी से भी बदतर है।” ईसा मसीह ने जब पड़ोसी से प्रेम का संदेश दिया, तो उस पड़ोसी की पहली सीढ़ी वे लोग थे जो आपके जीवन और परिवार का हिस्सा हैं। जो व्यक्ति अपने घराने के प्रति निष्ठुर हैं, उसकी प्रार्थनाएं केवल शोर हैं, संगीत नहीं।Relationships are nature's gifts

    पारसी धर्म के प्राचीन ग्रंथ ‘जेंद अवेस्ता’ में अशा (वैश्विक व्यवस्था और सच्चाई) के मार्ग को सर्वोपरि बताया गया है। इसमें स्पष्ट है कि एक व्यक्ति जो अपने परिवार और समुदाय के प्रति विमुख है, वह प्रकृति के संतुलन का शत्रु है। अवेस्ता के अनुसार, वोहू मना या उत्तम मन वही है जो अपनों के अभाव को अपनी पीड़ा समझे और बिना किसी ढिंढोरे के उसे दूर करे। क्या आज के असाधारण लोग इस संतुलन को समझने का साहस जुटा पाएंगे?

    भारतीय मनीषा तो स्वजन की सेवा को ही परम धर्म मानती है। सनातन संस्कृति में माता-पिता की सेवा को तीर्थ से बड़ा माना गया है। गोस्वामी तुलसीदास जी ने रामचरितमानस में नीति स्पष्ट की है कि जो व्यक्ति समर्थ होकर भी अपनों की उपेक्षा करता है, उसका पुण्य निष्फल है। सत्य तो यह है कि आज के शिक्षित लोग ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ का जाप तो करते हैं, लेकिन अपने सगे भाई के साथ एक ही छत के नीचे विभाजन की दीवार खड़ी कर लेते हैं। ऋग्वेद का वह मंत्र संगच्छध्वं संवदध्वं (साथ चलें, साथ बोलें) आज केवल भाषणों की शोभा बढ़ा रहा है, जबकि व्यवहार में हम विभाजन के विशेषज्ञ हो चुके हैं।

    कोरोना जैसी वैश्विक त्रासदी ने हमारी इस असाधारणता का सारा नकाब उतार फेंका था। जब मौत दस्तक दे रही थी, तब फेसबुक के फॉलोअर्स ऑक्सीजन सिलेंडर लेकर नहीं आए थे, बल्कि वही अनदेखे रिश्तेदार और परिजन खड़े थे जिन्हें हमने अक्सर दरकिनार किया था। लेकिन वहां भी कुछ महान लोग अपनी खाल बचाने के लिए अपनों की चिताओं से दूर भाग खड़े हुए। हर मध्यवर्गीय परिवार में कोई न कोई सदस्य आर्थिक या सामाजिक रूप से मजबूत अवश्य होता है। यदि वह व्यक्ति अपने अहं का विसर्जन कर केवल अपने ही कुनबे के दो-तीन संघर्षरत सदस्यों का संबल बन जाए, तो समाज के घावों पर मरहम लगाने के लिए बाहरी मसीहाओं की आवश्यकता ही नहीं पड़ेगी।

    यह एक वैज्ञानिक सत्य है कि एक सुसंगठित परिवार किसी भी मनोवैज्ञानिक अवसाद के विरुद्ध सबसे बड़ा कवच होता है। आज के अद्यतन दौर में हम जितने कनेक्टेड हैं, उतने ही अकेले भी। हम अजनबियों की पोस्ट पर संवेदनाओं के अंबार लगा देते हैं, लेकिन बगल के कमरे में उदास बैठे पिता की चुप्पी नहीं पढ़ पाते। रिश्तों में पुनः समर्पण का भाव केवल एक आदर्शवादी जुमला नहीं, बल्कि हमारी नस्लों को बचाने की आखिरी पुकार है।

    रिश्तों को निभाने का अर्थ उन्हें एहसान के बोझ तले दबाना नहीं है। रहीम दास जी ने ठीक ही कहा था कि “दीन सबन को लखत है, दीनहिं लखै न कोय।” असली दानवीर वही है जिसकी मदद का शोर उसके अपने कानों तक भी न पहुंचे। आज के दौर में रिश्तों की हत्या पैसे से नहीं, बल्कि उपेक्षा और प्रदर्शन से की जा रही है। हम अपनों को वक्त नहीं देते, लेकिन उनकी गरीबी का विज्ञापन जरूर कर देते हैं।

    भारत की आंतरिक और बाह्य सुदृढ़ता की धुरी हमेशा से हमारा पारिवारिक ढांचा रहा है। यदि यह ढांचा दरक गया, तो कोई भी जीडीपी या सैन्य शक्ति हमें बिखरने से नहीं बचा पाएगी। मध्यम वर्ग, जो संस्कारों का कस्टोडियन कहलाता है, उसे आज यह तय करना होगा कि उसे दिखावे का बुत बनना है या संवेदनाओं का संवाहक! रिश्तों में चेतना और जीवंतता तभी लौटेगी जब हम ‘मैं’ के संकीर्ण घेरे से निकलकर ‘हम’ के विराट आंगन में प्रवेश करेंगे।

    यह समय आत्ममुग्धता के दर्पण को तोड़ने का है। सेल्फी वाली महानता की उम्र बहुत छोटी होती है, लेकिन अपनों के हृदय में कमाया गया स्थान शाश्वत है। क्यों न इस अद्यतन दौर की यांत्रिकता को त्यागकर रिश्तों में वही पुरानी ऊष्मा भरी जाए जो दशकों पहले थी, ताकि आने वाली पीढ़ियां हमें केवल तस्वीरों में नहीं, बल्कि अपनी स्मृतियों और संस्कारों में जीवित रखें। कायनात के तय किए गए कर्तव्यों को पहचानिए, क्योंकि अंततः अपने ही वह आखिरी किनारा होते हैं जहां डूबती हुई जिंदगी को सहारा मिलता है। दिखावे की इस कुत्सित चाल को मात देकर, रिश्तों के असली गौरव को पुनर्स्थापित करना ही आज की सबसे बड़ी क्रांति है।

    Shagun

    Keep Reading

    Shared heritage gave the country 'Amrit' (nectar), while extremism is spreading 'poison'!

    साझी विरासत ने देश को दिया ‘अमृत’ तो कट्टरपंथ दे रहा ‘ज़हर!’

    Idli. For just one rupee—not a bad deal!

    इडली. सिर्फ एक रुपए में, सौदा बुरा नहीं !

    पीओके में भीतरी बगावत बनी पाकिस्तान के लिए सबसे गंभीर चुनौती

    Fall in love with life; even defeat is beautiful when played with a smile.

    जीवन से इश्क करो, हार भी खूबसूरत है, जब मुस्कुराते हुए खेला जाए

    Trump's Stern Message to Iran: 'A Very Good Deal' or 'The Other Path'

    पश्चिम एशिया में तनाव कम होने के संकेत

    Minors turning violent, and childhood losing its innocence: Who, ultimately, is to blame?

    बेटियों के साथ दरिंदगी को लेकर कैसे जी रहा है ये सभ्य समाज!

    Leave A Reply Cancel Reply

    Advertisment
    Google AD
    We Are Here –
    • Facebook
    • Twitter
    • YouTube
    • LinkedIn

    EMAIL SUBSCRIPTIONS

    Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
    Loading
    About



    ShagunNewsIndia.com is your all in one News website offering the latest happenings in UP.

    Editors: Upendra Rai & Neetu Singh

    Contact us: editshagun@gmail.com

    Facebook X (Twitter) LinkedIn WhatsApp
    Popular Posts
    पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद BJP में शामिल हो सकते हैं VFS कैपिटल के MD कुलदीप माइती

    पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद BJP में शामिल हो सकते हैं VFS कैपिटल के MD कुलदीप माइती

    June 22, 2026
    An ocean of yoga enthusiasts surges in Aligarh, embodying the spirit of ‘Yogah Karmasu Kaushalam’ (Yoga is excellence in action).

    ‘योगः कर्मसु कौशलम्’ के साथ अलीगढ़ में उमड़ा योग का महासागर

    June 21, 2026
    Mamta Charitable Trust's Grand Yoga Camp: "Lucknow will practice yoga; Lucknow will become disease-free."

    ममता चैरिटेबल ट्रस्ट का भव्य योग शिविर: “लखनऊ करेगा योग, लखनऊ बनेगा निरोग”

    June 21, 2026
    Bharat Tiwari Encounter: Major decision by the Bihar government; a retired High Court judge will conduct a judicial inquiry.

    भरत तिवारी एनकाउंटर: बिहार सरकार का बड़ा फैसला, सेवानिवृत्त हाईकोर्ट जज करेंगे न्यायिक जांच

    June 21, 2026

    जिन्हें हम बचपन में विलेन समझते थे, वही हमारे जीवन के सबसे बड़े हीरो निकले: फादर्स डे पर Pocket FM की खास पेशकश ‘The Villain Who Raised Me’

    June 21, 2026

    Subscribe Newsletter

    Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
    Loading
    Privacy Policy | About Us | Contact Us | Terms & Conditions | Disclaimer

    © 2026 ShagunNewsIndia.com | Designed & Developed by Krishna Maurya

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.

    Newsletter
    Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
    Loading