केंद्र सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना का लाभ परिवार के हर जरूरतमंद तक पहुंचाने के लिए लिए इसे सदस्यों की संख्या से मुक्त रखा गया है
नई दिल्ली, 04 फरवरी। देश में गरीब वर्ग की 40 फीसदी आबादी को कैशलेस इलाज सुनिश्चित कराने वाली दुनिया की सबसे बड़ी राष्ट्रीय स्वास्थ्य संरक्षण योजना इस साल से शुरू हो जाएगी। स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने कहा कि इस योजना के प्रारूप को जल्दी ही अंतिम रूप दे दिया जाएगा। देश के 50 करोड़ गरीब वर्ग के लोगों को पांच लाख रुपए तक का मुफ्त उपचार उपलब्ध कराने पर 10 से 12 हजार करोड़ का खर्च आएगा।
केंद्र सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना का लाभ परिवार के हर जरूरतमंद तक पहुंचाने के लिए लिए इसे सदस्यों की संख्या से मुक्त रखा गया है। 50 करोड़ लोगों का पांच लाख रुपए तक का मुफ्त उपचार कराने में हर साल 10-12 हजार करोड़ रुपए की आवश्यकता होगी। माना जा रहा है कि प्रति परिवार सालाना प्रीमियम हजार रुपए से सेकर 12 सौ रुपए के बीच होगा। राज्यों के सहयोग से चलने वाली राष्ट्रीय स्वास्थ्य संरक्षण योजना पर आने वाले खर्च का 60 फीसदी केंद्र सरकार वहन करेगी, जबकि शेष 40 फीसदी हिस्सा संबंधित राज्य सरकारें वहन करेंगी। नीति आयोग राज्यों के साथ विमर्श कर इसकी रूप रेखा बनाएगा।
इस संबंध में राज्यों की एक बैठक जल्दी ही बुलाई जाएगी। सूत्रों के अनुसार इस योजना को पांच छह माह में जमीन पर उतारने की योजना है। नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत के अनुसार इस योजना के तहत आने वाले लोगों को इलाज पूरी तरह कैशलेश होगा। पांच लाख रुपए तक खर्च पर अस्पताल मरीज से कोई पैसे नहीं मांगेगा।
उनके अनुसार इस योजना को आम लोगों से जोड़ने के लिए इसे पेपरलेस रखा गया है। इसके लिए इसे आधार से जोड़ा जाएगा। जिसके पास आधार नहीं है, उसे भी इस योजना का लाभ देने के तरीके पर विचार-विमर्श किया जा रहा है। इस योजना के लिए बजट में भले ही महज 2000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। लेकिन वित्त मंत्री अरुण जेटली ने साफ कर दिया है कि इसके लिए फंड की कमी नहीं होने दी जाएगी।







