नई दिल्ली, 27 फरवरी। देश में दूरस्थ शिक्षा के माध्यम से हासिल किए गए डिग्री, डिप्लोमा और सर्टिफिकेट कोर्स को भी नियमित कोर्स के बराबर मान्यता दी जाए। विश्व विद्यालय अनुदान आयोग ने यह निर्देश जारी किए हैं। यूजीसी ने कहा है कि भारत सरकार ने मुक्त एवं दूरस्थ शिक्षा को लेकर महत्वपूर्ण भूमिका की कल्पना की है। मुक्त एवं दूरस्थ शिक्षा व्यवस्था शिक्षा की गुणवत्ता में कमी लाए बिना उच्च शिक्षा के प्रसार में मदद कर रही है।
इस तरह में नियुक्ति, पदोन्नति या उच्च शिक्षा में मुक्त एवं दूरस्थ शिक्षा से प्राप्त डिग्री,डिप्लोमा और सर्टिफिकेट को मान्यता न देना या कम मान्यता देना इस माध्यम के उद्देश्यों को हरा देगा। इसलिए यूजीसी या डीईसी से मान्यता प्राप्त किसी भी डिग्री, डिप्लोमा और सर्टिफिकेट को नियमित कोर्स के बराबर मान्यता दी जाए। यूजीसी ने कहा है कि इसे कानूनी रूप से वैध बनाने के लिए पिछले साल ही यूजीसी (मुक्त एवं दूरस्थ शिक्षा) नियमन 2017 को अधिसूचित किया जा चुका है। यूजीसी ने यह भी स्पष्ट किया है कि इंजीनियरिंग, मेडिसिन, डेंटल, फॉर्मेसी, नर्सिंग, फिजियोथेरेपी एवं आर्किटेक्चर जैसे प्रायोगिक प्रशिक्षण वाले कार्यक्रमों को मुक्त एवं दूरस्थ शिक्षा के जरिये प्रदान करने की अनुमति नहीं है।







