जिनेवा, नई दिल्ली,10 मार्च। जेनेवा स्थित संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (यूएनएचआरसी) के 37 वें सत्र में पाकिस्तान ने कश्मीर में मानवाधिकार उल्लंघन का मुद्दा उठाया तो भारत ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई। जवाब देने के अपने अधिकार का इस्तेमाल करते हुए भारत ने कहा पाक भारत के आंतरिक मामलों में दखल देते हुए जम्मू और कश्मीर को लेकर परिषद को गुमराह करने की कोशिश कर रहा है, जबकि उसके यहां खुद बड़े पैमाने पर मानवाधिकारों का उल्लंघन किया जा रहा है।
भारतीय प्रतिनिधि ने कहा परिषद को यह मालूम होना चाहिए कि यह मानवाधिकारों को लेकर झूठी चिंता उस देश की ओर से जताई जा रही है, जिसने बलूचिस्तान, सिंध, खैबर पख्तूनख्वा और पाक अधिकृत कश्मीर के लोगों पर जुल्म किए हैं। पाकिस्तान लंबे समय से मानवाधिकारों की बात कर अपनी क्षेत्रीय महत्वाकांक्षाओं और आतंकवाद को अपनी स्टेट पॉलिसी के तौर पर इस्तेमाल को छिपाने की कोशिश करता रहा है। भारत ने बिंदुवार तरीके से पाकिस्तान की सच्चाई को दुनिया को सामने रखा।
भारतीय प्रतिनिधि ने कहा आतंकवाद मानवाधिकारों का सबसे बड़ा उल्लंघन है। भारत के प्रांत जम्मू और कश्मीर की असली समस्या आतंकवाद है, जिसे पाकिस्तान और उसके कब्जे वाले इलाके से फैलाया जा रहा है। भारत ने यूएनएचआरसी के अध्यक्ष से अनुरोध किया कि परिषद पाकिस्तान से सीमा पार से जारी घुसपैठ, आतंकियों के ठिकानों को ध्वस्त करने, टेरर फंडिंग रोकने और पीओके के लोगों को आजादी देने के लिए अपना गैरकानूनी कब्जा छोड़ने को कहे। इसके साथ ही भारत ने पाक में अल्पसंख्यकों को प्रताड़ित किए जाने का भी मुद्दा उठाया। भारत ने कहा कि पाक में हिंदुओं, सिखों और ईसाइयों को ईशनिंदा कानून के झूठे आरोपों में फंसाया जाता है। अल्पसंख्यकों का धर्म परिवर्तन खासतौर से लड़कियों की जबरन शादी की घटनाएं नहीं रुक रही हैं।






