डॉ दिलीप अग्निहोत्री
राष्ट्र जीवन का ऐसा कोई क्षेत्र नहीं है, जहाँ संघ ने अपने कार्य का विस्तार न किया हो। देश के प्रायः सभी वनवासी और ग्रामीण क्षेत्रों तक संघ की पहुंच हो गई है। बड़ी संख्या में वहां सेवा कार्य चल रहे है। जैविक खेती, गौ पालन, आदि के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए जा रहे है। समरसता के लिए गांव गावँ में एक कुआं, एक श्मशान की अलख चलाई जा रही है। समाज का इसका समर्थन मिल रहा है। अपनी भाषा, संस्कृति, के प्रति गौरव भाव जागृत हो रहा है।संघ की निंदा करने वाले केवल प्रतिनिधि सभा का कार्यवृत्त देख लें, तो उनकी आंखें खुल जाएगी। संघ देश के सुदूर अंचलों तक जिस प्रकार सेवा कार्य कर रहा है, उसकी ये आलोचक कल्पना भी नहीं कर सकते।
वनवासी क्षेत्र के वर्तमान में चलने वाले कार्य की जानकारी के साथ ही भविष्य के कार्य के संदर्भ में विचार हुआ। सेवा विभाग ने ‘‘सेवागाथा’’ नाम से एक वेबसाइट का निर्माण किया है। प्रचार विभाग का भी कार्य विस्तार हुआ। सोशल मीडिया की अखिल भारतीय कार्यशाला भोपाल में संपन्न हुई। सरसंघचालक के ‘‘विजयादशमी’’ भाषण का अधिकृत ‘‘फेसबुक पृष्ठ’’ पर सीधा व्हिडिओ प्रसारण किया गया जिसे उन्नीस लाख लोगों ने देखा और सुना। प्रतिवर्ष के अनुसार इस वर्ष भी ‘‘नारद जयंती’’ के कार्यक्रम संपन्न हुए। विभिन्न स्थानों पर चालीस हजार नागरिक सहभागी हुए जिसमें दस हजार पत्रकार बंधु थे। इस तरह सौ देशभर में सुदूर ग्रामों तक जागरण पत्रिका जाती है। बढ़ भाषाओं की तीस पत्रिकाएँ देशभर के दो लाख से अधिक ग्रामों तक पहुँचती हैं। हरियाणा प्रांत में विशेष प्रयोग किया गया। पत्रिका पहुँचाने में डाककर्मियों का अच्छा सहयोग रहता है ऐसे साढ़े पांच सौ डाककर्मियों का अभिनंदन करने का कार्यक्रम संपन्न हुआ। भिन्न-भिन्न स्थानों पर पत्रकारों हेतु ‘‘संघ परिचय वर्ग’’ का आयोजन किया गया, जिसमें सात प्रांतों में साढ़े पांच सौ पत्रकार सम्मिलित हुए।

गौ-सेवा संबन्धी विविध कार्यक्रम व उपक्रम संपन्न हुए हैं। गौ-कथा में लाखों लोगों की भागीदारी हुई। सैकड़ो स्थानों पर प्रशिक्षण वर्ग हुए जिसमें कडिब छह हजार कार्यकर्ताओं ने प्रशिक्षण प्राप्त किया। देशभर में पन्द्रह सौ गौशालाएँ संपर्क में हैं। पंचगव्य चिकित्सा विषय को लेकर बाइस प्रांतों में गोष्ठियाँ हुईं जिसमें छह सौ चिकित्सक उपस्थित रहे। करीब उन्नीस हजार कृषकों को जैविक कृषि का प्रशिक्षण दिया गया। तेलंगाणा प्रांत सैकड़ों ग्रामों में सामाजिक समरसता कार्यक्रम सफलता पूर्वक चला।
प्रांतों में संपन्न विशेष कार्यक्रम-
केरल में कार्य विस्तार हो रहा है। कार्यक्रम में व्यायामयोग,
गणतंत्र दिवस का कार्यक्रम विद्यालय परिसर में सरसंघचालक की उपस्थिति में संपन्न हुआ।
तमिलनाडु-प्रौढ़ साप्ताहिक प्रौढ़ स्वयंसेवकों को ध्यान में रखकर विशेष प्रकार के शारीरिक, बौद्धिक कार्यक्रमों पर विचार हो रहा है।
विशेषतः कुटुंब प्रबोधन व समरसता के साथ ही स्थानीय सामाजिक प्रश्नों के समाधान की दिशा में प्रौढ़ स्वयंसेवकों की क्या भूमिका हो सकती है, इस पर योजना बन रही है। छोटे व्यवसाय करनेवालों के साथ ही चिकित्सक, इंजीनियर्स, अवकाश प्राप्त शासकीय कर्मचारियों का सहभाग बढ़ रहा है। तेलंगाणा के विजयदशमी आयोजन को अपार सफलता मिली। इसमें जनसैलाब उमड़ा।
आंध्रप्रदेश में महाविद्यालयीन विद्यार्थी कार्य – इस वर्ष प्रांत में विभागश: महाविद्यालयीन छात्रों के शिविर संपन्न हुए। व्यावसायिक प्रशिक्षण संस्थानों के स्वयंसेवक सहभागी हुए।
कोकण में हिन्दू चेतना संगम एक वैशिष्ट्यपूर्ण कार्यक्रम ‘‘हिन्दू चेतना संगम – सज्जन शक्ति सर्वत्र’’ आयोजित किया गया। अनुवर्तन की दृष्टि से बस्ति तथा मंडलों में भारतमाता पूजन के कार्यक्रम संपन्न हुए हैं। व्यवसायी स्वयंसेवकों के लिए विभाग स्तर पर प्राथमिक शिक्षा वर्ग और सभी नये स्वयंसेवकों के लिये संघ परिचय वर्गों का आयोजन करने की योजना बन रही है।
पश्चिम महाराष्ट्र में प्रांत की सूची में चार सौ धर्माचार्य हैं। जनवरी में श्री क्षेत्र पंढरपुर में प.पू. सरसंघचालक जी की उपस्थिति में ‘‘संत संगम’’ का आयोजन किया गया, जिसमें क संत, धर्माचार्य सम्मिलित हुए। मंदिरों की सामाजिक परिवर्तन में भूमिका और सामाजिक परिवर्तन में संतों का सहभाग विषयों पर अच्छी चर्चा हुई। कार्यक्रम के पश्चात् अनुवर्तन के प्रयास भी प्रारंभ हुए हैं।
मध्यभारत में स्वामी विवेकानन्द पर आधारित अनेक कार्यक्रमों का आयोजन महाविद्यलयों में किया गया। जिसमें बड़ी संख्या में। शिक्षक और विद्यार्थी शामिल हुए। विदिशा, महाकौशल में भी संघ कार्य का उल्लेखनीय विकास हुआ है।
छिन्दवाड़ा जिले के पातालकोट परिसर में, जो भारिया, गोंड, मवासी आदि जनजातियों के निवास का क्षेत्र है। जनवरी में यहां एक राष्ट्रशक्ति सम्मेलन संपन्न हुआ, जिसमें नब्बे ग्रामों से सोलह हजार से अधिक महिला पुरुष शामिल हुए। कार्यक्रम में ‘‘पंच माता संरक्षण’’ का संकल्प लिया गया। जननी, नर्मदामाता, धरतीमाता, गौमाता और भारतमाता, ये पंचमाताएँ हैै। संतमहानुभावों की उपस्थिति में संपन्न इस समारोह में बत्तीस ग्राम वैद्यों का भी सम्मान किया गया।
चित्तौड़ में सामाजिक समरसता कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए।
जयपुर में ‘स्वर गोविंदम्’ घोष शिविर संपन्न हुआ। सार्वजनिक समारोह के साक्षी बने तैंतीस हजार महिला-पुरुष, प्रचार माध्यम के समूहों ने सरसंघचालक जी के साथ इस भव्य पथसंचलन का अवलोकन किया। दिल्ली प्रांत कार्यविस्तार योजना के तहत पांच सौ आठ शाखाओं की वृद्धि हुई।
हरियाणा में समग्र ग्राम विकास योजना के तहत ‘जैविक कृषि’ विषय को लेकर एक कार्यशाला का आयोजन किया गया, जिसमें बढ़ सौ कृषक सहभागी हुए। गुरुग्राम में त्रि-दिवसीय बस्ती प्रमुखों का शिविर संपन्न हुआ।
पलवल जिले में गत वर्ष गंगा महोत्सव संपन्न हुआ। इसमें अठारह हजार से अधिक लोग शामिल हुए। शारीरिक प्रदर्शन भी प्रभावी रहा। अवकाश प्राप्त मेजर जनरल जी. डी. बख्शी और संतश्रेष्ठ महामंडलेश्वर स्वामी धर्मदेवजी की प्रेरक उपस्थिति में यह महोत्सव संपन्न हुआ।
मेरठ में राष्ट्रोदय स्वयंसेवक समागम’’ बहुत ही उत्साह के साथ संपन्न हुआ। उसमें एक लाख से अधिक लोग सम्मिलित हुए।
इसके परिणामस्वरूप इस कार्यक्रम को सफलता मिली। इस समागम के लिये तीन जिलों के तीन लाख परिवारों से छहलाख ‘फूड पॅकेटस्’ एकत्रित किये गये थे।
पटना में अधिकांश बस्तियों के प्रतिनिधित्व की भागीदारी के साथ कार्यक्रम बहुत सफल रहा। इसमें सर संघचालक मौजूद थे।
दक्षिण बंगाल में श्री रामनवमी के अवसर पर अभूतपूर्व जनजागरण कार्यक्रम संपन्न हुआ। दो सौ से अधिक स्थानों पर शोभायात्रायएँ निकाली गईं, जिनमे अठारह लाख नागरिक सहभागी हुए।
स्वामी विवेकानंद जी के शिकागो भाषण के सवा सौ वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर सितंबर मास में प्रांत में विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। उत्तर असम प्रांत के स्वयंसेवकों का विशाल समावेश गुवाहाटी में इस वर्ष के प्रारंभ में हुआ था। इसमें पन्द्रह सौ से ज्यादा मंडलों के पैतीस हजार लोग सम्मिलित हुए। गत वर्ष त्रिपुरा राज्य की राजधानी अगरतला में विशाल हिन्दू सम्मेलन संपन्न हुआ। सभी ग्राम पंचायतों तक पहुँचना और अधिकतम ग्रामों का प्रतिनिधित्व हो, यह प्रयास रहा। सभी जनजाति समूहों से संपर्क की योजना बनाई गई। स्पष्ट है कि राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ राष्ट्र सेवा के लिए समर्पित है। यह साम्प्रदायिकता नहीं बल्कि समरसता पर विश्वास रखता है। देश को परम वैभव के पद पर पहचाना इसका लक्ष्य है। संघ इसी दिशा में अग्रसर है।
.लेखक वरिष्ठ पत्रकार है







