डॉ. दिलीप अग्निहोत्री
कुछ दिन पहले सोनिया गांधी ने अपने आवास पर व विपक्षी दलों को भोज पर बुलाया था। इसमें भाजपा के मुकाबले गठजोड़ बंनाने पर सहमति बनी थी। रात्रि भोज के खुशनुमा माहौल में यह बैठक समाप्त हुई थी। इसमें शामिल पार्टियों की संख्या भी बढ़िया थी। लेकिन कुछ ही घण्टों बाद लगा कि परिस्थितियां इतनी भी आसान नहीं है। सोनिया गांधी के यहां आयोजित इस बैठक और भोज में बसपा के नेता सतीश चंद्र मिश्र शामिल हुए थे। लेकिन यहां बनी सहमति पर बसपा प्रमुख मायावती ने चंडीगढ़ में पानी फेर दिया। यहां उन्होंने भाजपा के साथ कांग्रेस पर भी जमकर हमला बोला। कहा कि इन पार्टियों ने मंडल आयोग की सिफारिशें लागू नहीं कि थी।
दूसरी तरफ सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा कि कांग्रेस के साथ उनके अच्छे संबन्ध है। उनकी बात से लगा कि वह अपने गठबन्धन में कांग्रेस को शामिल करेंगे। जबकि मायावती की कांग्रेस से नफरत कायम है। वैसे राजनीति में कुछ भी हो सकता है। जब मायावती अपने ऊपर हमला करने वाली सपा के साथ गठजोड़ कर सकती है, तो भविष्य में कांग्रेस के प्रति उनका नजरिया बदल सकता है। लेकिन अभी उनका कांग्रेस पर हमला जारी है। इसमें दो पेंच है। एक यह कि देश के सबसे बड़े प्रान्त में कांग्रेस की गठजोड़ योजना को लेकर आशंका है। दूसरा यह कि कांग्रेस को लेकर सपा और बसपा में भी मतभेद है।







