आउटसोर्स कर्मियों को यूपीकोस में शामिल करने की मांग
लखनऊ: विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा UPCOS व्यवस्था को पारदर्शी, जवाबदेह और कर्मचारी हितैषी बनाने के निर्देश का स्वागत किया है।
समिति ने कहा कि मुख्यमंत्री के निर्देश के बावजूद उत्तर प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन प्रबंधन ऊर्जा निगमों के आउटसोर्स कर्मचारियों को UPCOS के दायरे में लाने में देरी कर रहा है। दिसंबर 2024 में पावर कॉर्पोरेशन द्वारा शासन को अलग रखने का अनुरोध किया गया था, जिसे अप्रैल 2025 में अस्वीकार कर दिया गया था, फिर भी अब तक अमल नहीं हुआ।
25 हजार से ज्यादा कर्मियों की छंटनी का मुद्दा
संघर्ष समिति ने आरोप लगाया कि ऊर्जा निगमों में बड़ी संख्या में आउटसोर्स और संविदा कर्मियों को हटाया जा रहा है। ऊर्जा मंत्री और वित्त मंत्री के हटाए गए कर्मियों को वापस लेने के निर्देश के बावजूद 25,000 से अधिक कर्मी अभी तक बहाल नहीं किए गए।
समिति की मांगें
समिति ने मुख्यमंत्री से सीधे हस्तक्षेप की मांग की है ताकि सभी आउटसोर्स और संविदा कर्मियों को तुरंत UPCOS के अधीन लाया जाए और सेवा में बहाल किया जाए। साथ ही मार्च 2023 से चली आंदोलनों के दौरान कर्मियों पर की गई सभी दंडात्मक कार्रवाइयों को वापस लिया जाए।
समिति का कहना है कि बिजली की बढ़ती मांग (36,000 मेगावाट तक पहुंचने की संभावना) को देखते हुए अनुभवी कर्मियों की सेवाएं जरूरी हैं।







