जय संकट: झुलसाने वाली गर्मी में कमर पर 200 बोतलें बांधकर जाती है महिला
नई दिल्ली, 24 मार्च। इंडोनेशिया के एक गांव में रहने वाली मामा हासरिया अपनी कमर पर करीब 200 खाली बोतलें बांधकर रोज तैरते हुए चार किलोमीटर का सफर तय करती है और छोटे से द्वीप सुलावेसी पर अपने समुदाय के लिए स्वच्छ पेयजल लेकर आती है। हासरिया की तरह अन्य स्थानीय महिलाएं भी ऐसा ही करती हैं।
हर बार 1 घंटे का सफर तय करती है महिला:
झुलसाने वाली गर्मी के बीच हासरिया मंदार नदी पर एक घंटे का सफर तय करके साफ पानी लाने के लिए नदी के किनारे पर स्थित कुओं तक जाती हैं। 46 वर्षीय हासरिया आसपास की मिट्टी से अपनी बोतलों में पीने योग्य साफ पानी भरती हैं। मिट्टी प्राकृतिक फिल्टर का काम करती है। हासरिया और उनकी साथी महिलाओं को प्रत्येक कैन के लिए मात्र ढाई रुपये मिलते हैं।
पीने योग्य जल स्रोतों को खोजना है:
टीनाम्बुंग प्रांत में रहने वाले करीब 5,800 परिवारों के लिए यह काम काफी अहम है और इस साल इसका फोकस वैश्विक रूप से पीने योग्य जल के स्रोतों के लिए‘‘ प्राकृतिक’’ समाधान खोजना है। टीनाम्बुंग के लिए यह एक चुनौती है जहां कई वर्षों से लोग स्वच्छ पेयजल तक सीमित पहुंच की शिकायत कर रहे हैं। हासरिया ने कहा कि हमें पीने और खाना पकाने के लिए पानी लाने धारा प्रवाह के विपरीत दिशा में जाना पड़ता है। इंडोनेशिया में अन्य समुदाय भी ऐसी ही चुनौतियों से दो- चार हो रहे हैं।







