ईरान ने कहा किसी भी दबाव के आगे झुकेंगे नहीं
नई दिल्ली : ट्रंप प्रशासन को एक के बाद एक दो बड़े झटके लगे हैं। एक तरफ ईरान ने साफ कह दिया कि वो किसी भी दबाव में नहीं झुकेगा, दूसरी तरफ मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू ने ट्रंप के करीबी और प्रभावशाली दूत सर्जियो गोर को घर बुलाकर भी मुलाकात से इनकार कर दिया।

विस्तृत रूप से बता दें कि मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू ने मार्च 2026 में अमेरिका के शक्तिशाली राजदूत और डोनाल्ड ट्रंप के विश्वसनीय सहयोगी सर्जियो गोर से मुलाकात आखिरी पल में रद्द कर दी। गोर माले पहुंचे थे, विदेश और रक्षा मंत्रियों से बातचीत की, लेकिन राष्ट्रपति मुइज्जू ने उनसे मिलने से साफ इनकार कर दिया। गोर बिना राष्ट्रपति से भेंट किए दिल्ली लौट गए।
मुइज्जू ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में खुलकर कहा – “अमेरिका के साथ इस युद्ध (ईरान पर) पर चर्चा करने को हमारे पास कुछ भी नहीं है।” उन्होंने अमेरिका की कड़ी आलोचना की और ईरान को US ठिकानों पर हमला करने का समर्थन जताया। यह घटना ईरान-अमेरिका-इजराइल तनाव के बीच मालदीव की सख्ती का साफ संकेत है।
ईरान का भी बुलंद रुख : “दबाव में नहीं झुकेंगे!”
ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने अमेरिकी जनता को खुला पत्र लिखकर जोरदार हमला बोला। उन्होंने कहा: ईरान ने कभी युद्ध नहीं छेड़ा, सिर्फ अपनी रक्षा की है।
अमेरिका की सैन्य मौजूदगी और हमले “खतरा” हैं, लेकिन ईरान किसी भी दबाव के आगे नहीं झुकेगा।
“हम रचनात्मक बातचीत के लिए तैयार हैं, लेकिन आत्मसमर्पण या मजबूरी में झुकने को तैयार नहीं। युद्ध हम नहीं चाहते, लेकिन अपनी स्वतंत्रता और गरिमा की रक्षा जरूर करेंगे।”
बता दें कि पाकिस्तान के इस्लामाबाद में पहले दौर की बातचीत बेनतीजा रही। अब दूसरे दौर की तैयारी चल रही है, लेकिन ईरान सैंक्शंस, नाकाबंदी और बंदरगाहों पर हमलों के बावजूद अपनी मजबूत मुद्रा में डटा हुआ है।
आगे क्या होने की सम्भावना है ?
- मालदीव: अमेरिका-मालदीव संबंधों में नया तनाव। मुइज्जू सरकार पहले से ही चीन की ओर झुकाव और भारत-विरोधी रुख के लिए चर्चा में है।
- ईरान-अमेरिका: क्षेत्रीय तनाव चरम पर। हॉर्मुज जलडमरूमध्य, तेल आपूर्ति और मध्य पूर्व की स्थिरता पर बड़ा असर पड़ सकता है। ट्रंप प्रशासन सैन्य विकल्पों पर विचार कर रहा है, जबकि ईरान “रक्षा” की मुद्रा में अड़ा है।
ये दोनों घटनाएं मुस्लिम देशों में अमेरिका के प्रति बढ़ते विरोध और एकजुटता का संकेत दे रही हैं। ईरान पर हमलों के खिलाफ कई देश अब खुलकर आवाज उठा रहे हैं। बता दें कि स्थिति बेहद संवेदनशील और तेजी से बदल रही है। लेटेस्ट अपडेट्स के लिए नजर बनाए रखें।






