जनता जान सकेगी शहीद-ए-आजम के विचार
लाहौर, नई दिल्ली, 27 मार्च। पाकिस्तान सरकार भारतीय स्वतंत्रता सेनानी सरदार भगत सिंह पर चलाए गए मुकदमे की फाइल सहित कई अन्य ऐतिहासिक दस्तावेज प्रदर्शित करेगी। पंजाब के मुख्य सचिव जाहिद सईद की अध्यक्षता में राज्य के शीर्ष नौकरशाहों की एक बैठक में यह फैसला किया गया। इस बैठक में भगत सिंह को भारत एवं पाकिस्तान दोनों का हीरो बताया गया।
बैठक में फैसला किया गया कि भगत सिंह भारत और पाकिस्तान दोनों के स्वतंत्रता आंदोलन के हीरो थे। देश के लोगों को ब्रिटिश राज से आजादी दिलाने के लिए भगत सिंह और उनके साथियों की ओर से किए गए संघर्ष के बारे में जानने का हक जनता को है। प्रदर्शनी लाहौर के अनारकली मकबरे में लगाई जाएगी, जिसमें पंजाब के अभिलेख विभाग का दफ्तर भी है। भगत सिंह जब जेल में थे, उस वक्त उनकी पिता को लिखी गई चिट्ठी, उन्हें एवं उनके साथियों को राजनीतिक कैदी घोषित करने के बाद ए, श्रेणी पाने के लिए उनके द्वारा लिखे गए खत, किताबें, अखबार और भूमिगत होने के दौरान के रिकॉर्ड भी यहां प्रदर्शित किए जाएंगे। भगत सिंह ने जो चिट्ठियां लिखीं, उन पर उनके दस्तखत हैं।

अहम बात यह है कि उन्होंने अपने हर आवेदन के अंत में आपका आभारी या आपका आज्ञाकारी जैसी चीजें नहीं लिखीं। जिससे उनके विद्रोह की झलक मिलती है। जिन मुकदमों की फाइलें प्रदर्शित की जाएंगी, उनमें अदालत के वे आदेश भी शामिल होंगे, जिनमें भगत सिंह और उनके साथी राजगुरू एवं सुखदेव को दोषी ठहराया गया। ब्लैक वॉरंट और जेलर की वह रिपोर्ट भी प्रदर्शित की जाएगी, जिससे उन्हें फांसी दिए जाने की पुष्टि हुई।
भगत सिंह जो किताबें, उपन्यास और साहित्य पढ़ते थे, उसे भी प्रदर्शित किया जाएगा। वह जहां रहते थे, उन जगहों के बारे में भी बताया जाएगा। पंजाब ट्रैजेडी, जख्मी पंजाब, गंगा दास डाकू, सुल्ताना डाकू, दि एवोल्यूशन ऑफ सिन फाइन और हिस्ट्री ऑफ दि सिन फाइन मूवमेंट जैसी किताबें भी प्रदर्शित की जाएंगी। भगत सिंह को 23 साल की उम्र में लाहौर में 23 मार्च-1931 को ब्रिटिश शासकों ने फांसी दे दी थी। उन पर सरकार के खिलाफ साजिश रचने के आरोप में मुकदमा चला था। ब्रिटिश पुलिस अधिकारी जॉन पी. सैंडर्स की कथित हत्या के मामले में भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरू के खिलाफ केस दाखिल किया गया था।






