लखनऊ, 02 अप्रैल। उत्तर प्रदेश में बहुजन समाज पार्टी और समाजवादी पार्टी के बीच गठबंधन की रूपरेखा लगभग तय हो गई है। इस गठबंधन में कांग्रेस को भी शामिल किया जाएगा, जबकि रालोद से बात चल रही है। पर मामला सीटों को लेकर अटक रहा है। 14 अप्रैल को संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती है और उस दिन मायावती अपने काडर को सपा के साथ सहयोग करने का संदेश देंगी।
बसपा के सूत्रों ने बताया है कि मई में पार्टी की अहम बैठक होनी है, जिसके बाद जून में ईद के दिन महागठबंधन का औपचारिक ऐलान किया जा सकता है। मायावती पिछली लोकसभा और विधानसभा चुनाव नहीं लड़ी थीं और माना यही गया था कि इसके कारण पार्टी के कार्यकर्ता निष्क्रिय रहे। इसलिए इस बार मायावती के लिए बिजनौर या अम्बेडकर नगर सीट का चयन किया गया है। वहीं दूसरी तरफ सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव कन्नौज सीट से चुनाव लड़ेंगे। कन्नौज से अखिलेश पूर्व में सांसद रह चुके हैं वर्तमान में यह सीट उनकी पत्नी डिंपल यादव के पास है, जो कि अगला चुनाव नहीं लड़ेंगी।

महागठबंधन में सीटों के आवंटन का आधार लोकसभा चुनावों में प्रदर्शन को रखा गया है। सूत्रों का कहना है कि 2014 के चुनाव में समाजवादी पार्टी पांच सीटों पर जीती थी और 31 सीटों पर दूसरे नंबर पर रही थी और अभी उपचुनाव में उसने दो सीटों पर जीत दर्ज की है। वहीं बसपा ने 2014 के चुनावों में किसी सीट पर जीत नहीं दर्ज की और 34 सीटों पर दूसरे नंबर पर रही थी। जबकि कांग्रेस की मात्र दो सीटें आई थीं और रालोद एक भी सीट नहीं जीत सकी थी। इस लिहाज से देखें तो सपा को 38 और बसपा को 34 सीटें मिलती हैं।
अखिलेश यादव कह चुके हैं कि भाजपा को हराने के लिए हम बड़ा दिल दिखाते हुए ‘त्याग’ करने को तैयार हैं। बताया जा रहा है कि 2019 के लोकसभा चुनाव में बसपा 35 और सपा 30 सीटों पर चुनाव लड़ सकती है। बाकी 15 सीटें अन्य दलों के लिए छोड़ी जाएंगी, जिनमें कांग्रेस भी शामिल है। सूत्रों की मानें तो सपा और बसपा की ओर से इस साल अगस्त माह तक अपने-अपने उम्मीदवारों की घोषणा भी कर दी जाएगी, जिससे उन्हें अपने क्षेत्र की जनता से ज्यादा से ज्यादा संपर्क के लिए समय मिल सके।







