सपा के साथ सीटों के बंटवारे को लेकर दोनों दलों के बीच कई दौर में हो चुकी है बातचीत
लखनऊ, 12 जुलाई 2018: बसपा अध्यक्ष मायावती पार्टी कार्यकर्ताओं में जान फूंकने के लिए अगला लोकसभा चुनाव लड़ सकती हैं। उन्होंने ऐसा अपनी रणनीति में बदलाव करने के लिए किया है। बताया जाता है कि बसपा अध्यक्ष मायावती पार्टी कार्यकर्ताओं में जोश भरने और प्रमुख प्रतिद्वंदी भाजपा को कड़ा संदेश देने के इरादे से अंबेडकरनगर या बिजनौर सीट से अगला लोकसभा चुनाव लड़ सकती हैं।
उन्होंने अगले लोकसभा चुनाव में भाजपा को कड़ी टक्कर देने के लिए विपक्षी दलों की एकजुटता के पक्ष में होने के संकेत पहले भी दे चुकीं हैं। इस कड़ी में समाजवादी पार्टी के साथ सीटों के बंटवारे को लेकर दोनों दलों के बीच कई दौर की बातचीत हो चुकी है।
बता दें, कि बसपा ने गोरखपुर और फूलपुर लोकसभा सीटों के उपचुनाव में सपा को समर्थन दिया था। जिसमें सपा उम्मीदवारों की जीत हुई थी। पार्टी ने कैराना लोकसभा सीट और नूरपुर विधानसभा सीट के उपचुनाव में भाजपा के खिलाफ विपक्षी उम्मीदवारों का समर्थन किया था। इन दोनों उपचुनाव में भी भाजपा की सीट भाजपा को सीट गवानी पड़ी थी। इस दौरान पल पल बदलते राजनितिक समीकरण को देखते हुए मायावती ने खुद आम चुनाव न लड़ने की रणनीति पर पुनर्विचार करने और अगला लोकसभा चुनाव लड़ने के संकेत देने से उत्तर प्रदेश में नया राजनीतिक समीकरण बनाने की तैयारी की है।
अब राजनितिक गलियारों में माना जा रहा है कि यदि मायावती चुनाव लड़ती है तो यह उनका एक रणनीतिक कदम होगा। इस बीच बसपा प्रमुख कई वर्षों से खुद चुनाव न लड़ने से ज्यादा तरजीह पार्टी संगठन को मजबूत करने पर जोर देती रही हैं। बसपा के एक वरिष्ठ नेता ने बुधवार को मीडिया से कहा कि पार्टी मायावती के लिए बेहतर लोकसभा सीट की चयन प्रक्रिया पहले ही शुरू कर चुकी है। पार्टी नेता ने कहा कि यह सीटें फैजाबाद से सटी अंबेडकरनगर या बिजनौर भी हो सकती हैं।
कर चुकी हैं लोकसभा में प्रतिनिधित्व:
मायावती 1998,1999 और 2004 में अकबरपुर अंबेडकर नगर सीट से लोकसभा में प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं। मायावती ने आखरी बार लोकसभा चुनाव 2004 में लड़ा था। उसके बाद से उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री रहने के दौरान विधान परिषद की सदस्य रही, और 2012 में उत्तर प्रदेश की सत्ता गंवाने के बाद उन्होंने राज्यसभा की सदस्यता हासिल की। उन्होंने वर्ष 2012 में यूपी की सत्ता गवाने के बाद उन्होंने राज्यसभा की सदस्य्ता हासिल की थी उन्होंने गत वर्ष राज्यसभा से इस्तीफा दे दिया था।







