छोटे अखबार के पत्रकार को भड़वा तो दूर कोई कड़वा बोल दे तो विरोध की आंधी आ जाये
लखनऊ, 27 जुलाई 2018: चकाचौंध वाले देश के टॉप क्लास के बड़े-बड़े न्यूज चैनल्स के नामी-गिरामी स्टार मीडिया कर्मियों से कहीं ज्यादा ताकतवर और एकजुट हैं हम। हमारे लखनऊ के छोटे से छोटे पत्रकार की फटफटिया के हैंडिल पर ट्राफिक पुलिस का सिपाही हाथ भी रख देता है तो हम लोग सिपाही को निलंबित करने का ज्ञापन लेकर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव गृह या प्रमुख सचिव सूचना के कमरे में धावा बोल देते हैं।
प्रधानमंत्री के सबसे करीबी कहे जाने वाले देश के सबसे चर्चित अंबानी ग्रुप का मीडिया ग्रुप न्यूज 18 टीआरपी की ताकत में भी आगे है। इस ग्रुप के राष्ट्रीय चैनल का सबसे चर्चित चेहरा है अमीश देवगन। प्राइम टाइम पर कांग्रेस प्रवक्ता राजीव त्यागी लाइव डिबेट में एंकर/पत्रकार अमीष देवगन को दस बार भड़वा और दलाल कहते हैं। अंदाजा लगाइये इस पत्रकार की देश-दुनिया के सामने कितनी फजीहत और बेइज्जती हुई होगी। सोशल मीडिया पर भी ये वीडियो खूब वायरल होता है। कल्पना कीजिए ये पत्रकार किस तरह के खिताब को लेकर किस झिझक के साथ अपने घर में दाखिल हुआ होगा।
इस वाकिये के बाद लाखों लोग सोशल मीडिया पर अमीश देवगन को लाइव गालियां देने का स्वागत कर रहे हैं। ये सब देखकर इस पत्रकार का क्या हाल होगा। कितना खून खौला होगा। कितने खून के घूंट पिये होंगे। उसका वही मीडिया प्लेटफार्म जो ग्लैमर के चकाचौंध में अमीश देवगन के व्यक्तित्व को चमकाता है अब ये चकाचौंध आग की लपटें की तरह घेरे हुए होगी।
उम्मीद होगी कि सरकार का साया कहे जाने वाला अंबानी ग्रुप और उनके इस चैनल की ताकतें अपने स्टार एंकर की बेइज्जती का तत्काल बदला लेंगी। मोदी सरकार त्यागी के खिलाफ कार्रवाई करेगी। इन सबके तमाम दबाव मे कांग्रेस अपने प्रवक्ता के खिलाफ सख्त कार्रवाई करेगी। ब्रांड मीडिया के साथी, दिल्ली – मुंबई जैसे बड़े शहरों के बड़े-बड़े हमख्याल पत्रकार, ताकतवर मीडिया संगठन और एडिटर्स गिल्ड जैसे टीवी न्यूज मीडिया के संगठन एंकर-पत्रकार के अपमान के खिलाफ आवाजें बुलंद करेंगे।
लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। कल से लेकर आजतक अमीश देवगन के समर्थन में या उन्हें न्याय दिलाने वाला एक भी बयान नहीं आया।
ये सब देखकर चकाचौंध वाली टीवी मीडिया के पत्रकारों की लाचारी की बानगी सामने आ गयी। लगा कि चर्चित कार्पोरेट के मीडिया घराने अपने स्टार मीडिया के चेहरों को दो से चार लाख सैलरी तो दे सकते हैं लेकिन उनके सम्मान की कीमत को वो दो कौड़ी का भी नहीं आंकते। सब बंधे हुए है टीवी के सुनहरे पर्दे के कैद में। आज भाजपा की गुलामी करनी है। कल कांग्रेस सत्ता में आ सकती है इसलिए कांग्रेस से रिश्ते की डोर को संभाल कर रखना है। जब अपना ग्रुप ही नहीं बोलेगा तो दूसरा साथ आने की हिम्मत कैसे करेगा!
तो भइया इन बड़ों से वो छोटे पत्रकार बेहतर हैं जिन्हें चार लाख वेतन तो नहीं मिलता लेकिन चौदह हजार की तनख्वाह के साथ अपने बेशकीमती मान सम्मान के साथ एकजुट हैं।
-नवेद शिकोह







