नई दिल्ली, 28 जुलाई 2018: केंद्र सरकार दिल्ली से उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ तक वाहनों को रफ्तार देने के लिए एक अलग एक्सप्रेसवे का निर्माण करेगी। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने अमर उजाला से विशेष बातचीत में बताया कि केंद्र सरकार अपने खर्च पर दिल्ली से लखनऊ तक एक अलग एक्सप्रेसवे की सुविधा देने वाली है।
यह तीन चरणों में पूरा होगा। पहला दिल्ली से डासना, दूसरा डासना से कानपुर और तीसरा कानपुर से लखनऊ। इनमें पहले चरण का काम शुरू हो चुका है, जबकि दूसरे चरण की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) बनाई जा रही है, वहीं तीसरे चरण पर भी इसी साल काम शुरू हो गया है। यह सड़क दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे पर डासना से कानपुर के लिए मुड़ेगी। डासना से कानपुर तक इसका रास्ता क्या होगा, इस सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि एक बार डीपीआर बन जाए, उसके बाद अलाइनमेंट भी फाइनल कर दिया जाएगा। इसे कानपुर में पहले से बन रहे कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे से जोड़ दिया जाएगा।
राजमार्ग मंत्री का कहना है कि कानपुर से लखनऊ तक बनने वाले बनने वाले छह लेन के एक्सप्रेस-वे का डीपीआर तैयार हो गया है। एनएचएआई को तेजी से काम करने का निर्देश दिया है, ताकि दिसंबर तक काम दिखने लगे। यह एक्सप्रेस-वे लखनऊ से कानपुर तक जाने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग के इर्द-गिर्द ही बनेगा, ताकि इस सड़क का दबाव भी कम हो सके। इसे उन्नाव के पास बन रहे 105 किलोमीटर लंबे रिंग रोड से भी जोड़ने की योजना है।
दिल्ली मेरठ एक्सप्रेसवे से जुड़ेगा
96 किलोमीटर लंबी दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे परियोजना को कई हिस्सों में बांट कर काम किया जा रहा है। इसके पहले चरण दिल्ली में हजरत निजामुद्दीन पुल से यूपी गेट तक के हिस्से का काम पूरा हो चुका है। दूसरा चरण यूपी गेट से डासना तक का काम भी तेजी से चल रहा है। गडकरी के मुताबिक, डासना से एक्सप्रेसवे का एक हिस्सा मेरठ की ओर चला जाएगा, जबकि दूसरा हिस्सा कानपुर चला जाएगा। यूपी गेट से डासना तक के हिस्से को भी पहले हिस्से की तरह 14 लेन का बनाया जा रहा है और उम्मीद है कि इसका काम अगले साल मार्च से पहले पूरा हो जाएगा।
गडकरी ने कहा कि डासना से कानपुर तक बनने वाला एक्सप्रेसवे तारकोल या सीमेंट से बनेगा, यह अभी तय नहीं हो पाया है। इस समय सीमेंट कंपनियों ने कार्टेल बनाकर सीमेंट महंगा कर दिया है। साथ ही रेत का भी भाव काफी बढ़ गया है। कुछ जगह तो रेत का भाव सीमेंट के बराबर हो गया है। इसलिए वह पहले सीमेंट कंपनियों का रुख देखेंगे। अगर यह सकारात्मक रहा तो ठीक है, वरना तारकोल वाली ही सड़क बनाई जाएगी।







