अपनी सलाह अपने काम नहीं आती। आस-पड़ोस में, रिश्तेदारी में कोई बड़ी दुखद घटना घट जाए तो हम तुरंत सामने वाले को सलाह देने लगते हैं, उसे दुख से बाहर निकलने के तरीके बताने लगते हैं। परिणाम में सामने वाले का दुख कम भी हो जाता है, उसे दिशा भी मिल जाती है। लेकिन, जब ठीक ऐसी ही घटना हमारे साथ घट जाए, हम पर कोई बड़ा दुख आ जाए तो हम अपनी सलाह अपने ऊपर लागू नहीं कर पाते।
कहना आसान है, समझाना सरल है, पर जब भुगतना पड़ता है तो सारा ज्ञान धरा रह जाता है। जब आप दूसरों को सलाह दे रहे होते हैं तो उसमें प्रस्तुति, आपका ज्ञान काम आता है, लेकिन, जब इसी सलाह को अपने ऊपर वैसी ही दुखद स्थितियों में उतार रहे हों तब आपका ज्ञान नहीं, विवेक काम आता है। गणेशजी विवेक के देवता हैं। जिस दौर से हम गुजर रहे हैं, वह जानकारियों का समय है। बहुत सारी जानकारियां इकट्ठी हो जाएं तो लोग उसी को ज्ञान मान लेते हैं और ऐसा ज्ञान, ऐसी जानकारी बिना विवेक के घातक होती है।
इसीलिए तो जानकार, बुद्धिमान लोग दुनियाभर के गलत काम कर रहे हैं। आज गणेशजी स्थापित कर दस दिनों तक उत्सव मनाएं तो एक काम जरूर करिए कि इन दिनों प्रतिपल सोचिए कि क्या हमारा विवेक जागा हुआ है? यदि नहीं तो गणपतिजी से एक चीज जरूर मांगें कि आए हो तो इस बार हमारा विवेक जगा जाना और जब अगले वर्ष दोबारा आओ, तब तक जागा रहे ऐसा आशीर्वाद भी देते जाना। विवेक गया तो फिर आपकी सलाह आपके काम कभी नहीं आएगी।
– पं. विजयजयशंकर मेहता







