- गर्भवती व कम आयु के बच्चों के लिए है वरदान
- आँखों, हड्डियों, त्वचा व खून के लिए आवश्यक पोषक तत्वों से भरपूर
लखनऊ, 20 सितम्बर 2018: सहजन यानि ड्रमस्टिक का नाम तो सभी ने सुना होगा लेकिन बहुत ही कम लोग इसके लाभकारी गुणों से जागरूक हैं। यह सर्दियों में बाज़ार में बिकती हुयी दिखाई देती है लेकिन इसके फायदे होने के बाद भी लोग इसका सेवन नहीं करते हैं।
गर्भवती महिलाओं व कम आयु के बच्चों के लिए यह वरदान माना गया है। इसमें कार्बोहाइड्रेट,प्रोटीन, कैल्शियम, पोटेशियम, आयरन, मैग्नीशियम, विटामिन-ए, सी और बी कॉम्पलैक्स प्रचुर मात्रा में पाया जाता है।
इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आई.सी.एम.आर) प्रोजेक्ट के अंतर्गत, वैदेही इंस्टिट्यूट ऑफ़ मेडिकल साइंसेज एंड रिसर्च सेंटर, बंगलौर में हुए एक अद्धयन में सहजन का नियमित सेवन से, कुपोषण में सुधार पाया गया। इसको प्रोटीन एनेर्जी कुपोषण (पी.इ.एम) से ग्रस्त बच्चों के इलाज के लिए प्रयोग किया जा सकता है व समाज में इसके लिए जागरूकता फैलाने की जरूरत है।

इसके बारे में लखनऊ के आई.सी.डी.एस. विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी अखिलेन्द्र दुबे ने बताया कि लखनऊ जिले में इसके लाभकारी गुणों की चर्चा की शुरुआत हो चुकी है। कई आंगनवाडी केन्द्रों पर इसके पोधे भी लगाये गये हैं। इसके पेड़ का एक ही नहीं बल्कि हर हिस्सा बहुत फायदेमंद होता है तथा पोषक तत्वों से भरपूर होता है। इसका फल, फूल, छाल, पत्तियां और जड़ सभी का उपयोग स्वास्थय के लिए बहुत फायदेमंद है। आंगनवाड़ी केन्द्रों द्वारा लोगों को बताया जा रहा है ताकि वे इसका उपयोग करें और स्वस्थ जीवन जियें।
डाइटीशियन रूपाली बताती हैं कि गर्भावस्था, धात्री व 2 से 10 वर्ष के बच्चों में कुपोषण की समस्या को दूर करने के लिए सहजन तथा सहजन की पत्तियां अत्यंत सहायक होती हैं तथा यह आसानी से प्राप्त हो जाती हैं व लागत भी कम आती है। सहजन में अधिक मात्रा में कैल्शियम, आयरन, विटामिन ए, बी, सी तथा के और फास्फोरस होता है। इसमें एंटी बैक्टीरियल गुण होते हैं जो संक्रमण में रक्षा करते हैं।
रूपाली बताती हैं कि सभी ताज़ी हरी सब्जियों के मुकाबले 100 ग्राम ताज़ी सहजन की पत्तियों में सबसे अधिक केरोटीन व सबसे अधिक बीटा कैरोटीन होता है जो कि विटामिन ए की कमी को दूर करने के लिए एक बेहतर रणनीति हो सकती है।
सहजन में विभिन्न पोलिफेनोल्स अत्यधिक मात्रा में होते हैं जो कि एंटीओक्सीडेंट के रूप में काम करते हैं और कार्डियो वैस्कुलर बीमारियों से सुरक्षा के लिए उपयोग करने का सुझाव दिया जाता है।
100 ग्राम ताज़ी सहजन की पत्तियों में पोषक/ गैर पोषक तत्वों की मात्रा
| नमी (mg) | कुल आयरन (mg) | कैल्शियम (mg) | फोस्फोरस(mg) | एस्कॉर्बिक एसिड (mg) | ओक्सलिक एसिड (mg) |
| 79.2 | .26 | 431.6 | 133.57 | 139 | 11.23 |
रूपाली बताती हैं कि गर्भवती व धात्री महिलाओं तथा कम आयु के बच्चों को उपरोक्त पोषक तत्वों की जरूरत एक सामान्य व्यक्ति से कहीं ज्यादा होती है। इस अवस्था में यदि सहजन का उपयोग दैनिक आहार में किया जाए तो माँ तथा गर्भ में पल रहे बच्चे का विकास होगा। सहजन के उपयोग से धात्री माता में दूध की मात्रा बढ़ती है | सहजन के सेवन से नर्वस सिस्टम इम्प्रूव होता है। सहजन खाने से मष्तिष्क का विकास होता है व खून की कमी नहीं होती है। रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है, सर्दी, खांसी, फ्लू आदि से बचाता है, हड्डियाँ मजबूत होती हैं। पेट की समस्या से निजात दिलाता है। सहजन एक ऐसी सब्जी है जिसमें एक साथ यह सारे पोषण भरपूर मात्रा में मिलती है।







