नई दिल्ली, 25 सितम्बर 2018: अब बीमारियों का पता लगाने के लिए पैथोलॉजी रिपोर्ट और जांच का झंझट जल्द ही खत्म हो जाएगा। क्योंकि विज्ञान पद्धति ने कई बड़े क्रांतिकारी बदलाव कर डाले हैं। आईआईटी और डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गेनाइजेशन के संयुक्त प्रयास से एक नई तकनीकी ईजाद हुई है। इस तकनीकी को ऑप्टिकल टैक्सेस माइक्रोस्कोप (ओटीएम) का नाम दिया गया है।
इस माइक्रोस्कोप से शरीर के प्रत्येक अंग की जानकारी 1 मिनट के अंदर मिल जाएगी। डॉक्टरों से मिलने के तुरंत बाद मरीज की सभी बीमारियों की जानकारी डॉक्टर को पता लग जाएगी। अभी इस तकनीकी का प्रयोग इंसानों पर नहीं किया गया है। किंतु जानवरों पर किए गए प्रयोग में यह शत प्रतिशत सफल तकनीकी साबित हुई है।
स्कैनिंग हाईटेक सेंसर से
अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में आईआईटी दिल्ली के वैज्ञानिक प्रोफेसर सेंथिल कुमारन के अनुसार इस नई विधि में मरीज को एक कमरे से गुजारा जाएगा कमरे के चारों तरफ लगे ऑप्टिक्स में बायो लॉजिकल एप्लीकेशन पर आधारित हाईटेक सेंसर शरीर के किस हिस्से में कौन-कौन सी बीमारी पनप रही है इसकी जानकारी दे देंगे।
कैंसर में बड़ा फायदा
कानपुर के लाला लाजपत राय अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर निर्लेश त्रिपाठी के अनुसार इस तकनीकी से डायबिटीज, हृदय रोग और कैंसर की बीमारी को प्रारंभिक चरण में ही पकड़ा जा सकेगा। जिससे समय रहते इलाज मिल जाने से मरीजों को बहुत बड़ी राहत मिलेगी।
चिकित्सा जगत में क्रांतिकारी बदलाव
इस नई पद्धति के आने से अब खून,कफ और मल की जांच एवं अन्य जांच के लिए जो बड़ी-बड़ी मशीनें और समय लगता था। उनकी जरूरत नहीं रह जाएगी। यह जांच पूर्णतहा: विश्वसनीय होगी। चिकित्सा जगत में सबसे ज्यादा लाभ मरीजों को होगा। उन्हें अब ज्यादा कष्ट नहीं झेलने पड़ेंगे। समय और पैसे की बचत होगी। मरीज़ो की तकलीफ भी इस तकनीकी के उपयोग में आने से काम होगी।







