रिमोट सेंसिंग में स्मार्ट कैरियर छुपा है। जरूरत इस बात की है कि आपने सोच और इरादे से इसे एक्सप्लोर करें रिमोट सेंसिंग सेटेलाइट के जरिए आंकड़े मिलते हैं। इसमें रिमोट के जरिए जानकारी भी हासिल की जाती हैं और यह विपरीत परिस्थिति में बहुत सहायक है।
रिमोट सेंसिंग ऐसी टेक्नोलॉजी है जिसके जरिए धरती के किसी भी हिस्से तक पहुंच बनाई जा सकती हैं। उसके बारे में दिलचस्प जानकारी इकट्ठी की जा सकती है। रिमोट सेंसिंग का मतलब है किसी चीज को जानकारी रिमोट के जरिए हासिल कर लेना। साधारण भाषा में आपको इसका सबसे अच्छा उदाहरण माना जाता है। जैसे आंखें चीजों को दूर से ही सटीक तरीके से देख लेती हैं। उसी तरह कैमरे के जरिए सही स्थिति का आकलन भी किया जाता है। दरअसल भारत में आई आर एस सेटेलाइट के जरिए रिमोट सेंसिंग पर काम हो रहा है। इसमें सेंसर वाला एचडी कैमरा लगा है जिसकी मदद से तस्वीर खींची जाती है रिमोट सेंसिंग में यूज होने वाले तरीके की होती हैं। एक पोलर सेटेलाइट और दूसरी सैटेलाइट नॉर्थ पोल की जानकारी देता है। यह 800 से 900 किलोमीटर की ऊंचाई पर होता है।

जबकि जियोस्टेशनरी सेटेलाइट्स सूर्य की स्थिति में उसी गति से चलता है। यह 36000 किलोमीटर की ऊंचाई पर होता है। संचार उपग्रह इसी के माध्यम से काम करते हैं। कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है कि रिमोट सेंसिंग का कार्य जितना बड़ा है उतना ही दिलचस्पी भी है। इसके जरिए आप जमीन के अंदर की स्थिति ग्राउंडवाटर इकोलॉजी एग्रीकल्चर वाइल्डलाइफ और अर्बन प्लैनिंग के बारे में जान सकते हैं। आज के दौर में सरकार शहरों के डेवलपमेंट के पैटर्न को जानने के लिए भी इसका इस्तेमाल कर रही हैं। इससे पता लगाने में हम समर्थ हैं कि 10 साल बाद शहर का विकास कैसे और किस एरिया में होगा। इससे एक तो समान समय की बचत होती है। वही परफेक्ट प्लानिंग करने में मदद भी मिलती है। आने वाले समय में इसका इस्तेमाल हाउस टैक्स की चोरी को रोकने और लैंड रिकॉर्ड करने में भी किया जाएगा। इससे जमीन विवाद को निपटाने में भी मदद मिल सकेगी।
काम का स्वरूप:
रिमोट सेंसिंग में काम करने वाले प्रोफेशनल को देश दुनिया के भौगोलिक परिस्थितियों के बारे में पूरी जानकारी रखनी होती है। एक अच्छे रिमोट सेंसर प्रोफेशनल फॉर टेक्निकल तौर पर भी मजबूत होना होता है। विदेशों में तो प्राइवेट कंपनियां भी इस दिशा में काम कर रही हूं। अपने यहां प्रमुख रूप से सरकार को इस ओर से दिशा में काम किया जा रहा है। इसलिए इसके प्रोफेशनल को मुख्य रूप से डाटा और पिक्चर उपलब्ध कराने होते हैं। यह बेहद जिम्मेदारी भरा काम होता है।

करियर की संभावनाएं:
जो युवा इसे करियर के तौर पर अपनाना चाहते हैं उनके लिए रिमोट सेंसिंग में करियर बनाना एक अच्छा विकल्प हो सकता है। जहां तक जॉब की बात है तो यह कहा जा सकता है कि यहां जॉब भी खूब हैं। प्रफेशनल को रिसर्च और डेवलपमेंट के क्षेत्र में काम करने का अवसर मिल सकता है। इसके अलावा सेना में डिजास्टर मैनेजमेंट में बंसल कारपोरेशन अर्बन डेवलपमेंट अथॉरिटी और स्पेस सेंटर में अपार करियर की संभावनाएं जैसे-जैसे इसका दायरा बढ़ रहा है। वैसे-वैसे इसमें रोजगार के अवसरों को काफी इजाफा हो रहा है।
शैक्षिक योग्यता और सैलेरी:
इसमें करियर बनाने के लिए आप को कम से कम डिप्लोमा का कोर्स करने की जरूरत है। आप इसमें भी बीई. बीटेक, एमटेक, बीएससी, एमएससी और रिसर्च पीएचडी की डिग्री हासिल कर सकते हैं। इस कोर्स को करने के बाद यूजीसी की ओर से आयोजित एक एग्जाम पास कर के आप प्रकृति भी बन सकते हैं।
शुरुआत में आपको यहां पर 10 से 15000 के बीच में सैलरी मिल सकती हैं। एक्सपीरियंस और आपके नॉलेज में इजाफा होने के बाद में एक्सपोर्ट के तौर पर आपकी सैलरी लाखों में भी पहुंच सकती है। (फोटो: गूगल से साभार)







