लखनऊ, 09 अक्टूबर-2018: बदलती लाइफ स्टाइल और भागती-दौड़ती जिंदगी में आज किसी के पास किसी के लिए भी वक्त नहीं है। यहां तक कि कभी-कभी तो खुद के लिए भी समय नहीं होता जिसका परिणाम यह निकलता है कि व्यक्ति मानसिक बीमारी या अवसाद का शिकार हो जाता है। ऐसी स्थिति में कतई किसी झाड़-फूंक अथवा नशे के चक्कर में न पड़कर हिम्मत से काम लेने के साथ ही जल्द से जल्द मनोचिकित्सक से संपर्क कर इस बीमारी को दूर भगाया जा सकता है।
समाज में तेजी से फ़ैल रही इस बीमारी के प्रति जनजागरूकता पैदा करने के लिए ही हर साल 10 अक्टूबर को विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस मनाया जाता है। इसके साथ ही यह दिन जिस सप्ताह में पड़ता है, वह सप्ताह यानि आठ अक्टूबर से 14 अक्टूबर तक मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता सप्ताह के रूप में मनाया जाता है। इस दौरान विभिन्न जनजागरूकता कार्यक्रमों और शिविरों का आयोजन कर लोगों के मन से उनके वहम को दूर करके इलाज के जरिये बेहतर जिन्दगी जीने की राह दिखाई जाती है।
आज का युवा वर्ग एक-दूसरे से आगे निकलने की होड़ में इस तरह की बिमारियों की गिरफ्त में सबसे ज्यादा आ रहे हैं। जल्द से जल्द सब कुछ हासिल कर लेने की चाहत इसका प्रमुख कारण बन रही है। इसको देखते हुए ही इस बार विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस की थीम ‘विश्व के बदलते परिदृश्य में युवा और मानसिक स्वास्थ्य’ (यंग प्यूपिल एंड मेंटल हेल्थ इन अ चेंचिंग वर्ल्ड- Young People and Mental Health in a Changing World) रखी गयी है।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी नरेंद्र अग्रवाल ने बताया कि इस बार विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस की थीम ‘विश्व के बदलते परिदृश्य में युवा और मानसिक स्वास्थ्य’ रखी गयी है। 10 अक्टूबर को विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस पर कार्यक्रम में प्रशिक्षण, प्रचार-प्रसार व मरीजों का इलाज़ किया जाएगा। उन्होने बताया कि बीते वर्ष 2016 में 72000 लोग आत्महत्या के शिकार हुये।
लोगों को यह पता ही नहीं कि मानसिक बीमारी क्या है तथा इसके चक्कर में कई बार लोग नशे के शिकार हो जाते हैं। उन्हें लगता है कि नशा करने से उनकी परेशानियां खत्म हो जाएंगी या फिर वह उन्हें आसानी से मात दे सकेंगे, जबकि ऐसा हरगिज नहीं है। नशा केवल शारीरिक, मानसिक और आर्थिक रूप से तबाह करता है बजाय किसी समस्या का हल निकालने के। इसलिए इसके बारे में बच्चों को जानकारी दी जाएगी। मानसिक बीमारी को नजरअंदाज किए बिना तुरंत ही मनोचिकित्सक से संपर्क करें और बेहतर जिन्दगी जिएं।
मंडलीय जिला चिकित्सालय के मनोचिकित्सक का कहना है कि मानसिक समस्याओं के बेहतर इलाज के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की ओर से लखनऊ में जिला मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम संचालित किया जा रहा है। इसके तहत प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों, विद्यालयो, समुदायों धार्मिक स्थलो और अनाथालयों में निःशुल्क चिकित्सीय परामर्श और दवाएं भी वितरित की जाती हैं।
दुआ से दवा तक कार्यक्रम बना सहायक:
एसीएमओ डॉ. चौधरी का कहना है कि धार्मिक स्थलों पर अधिकतर लोग झाड़-फूंक और दुआ के लिए आते हैं, ऐसे लोगों को इस बात के लिए प्रेरित करने की कोशिश की जाती है कि वह दुआ के साथ दवा भी लें ताकि उनकी बीमारी को जल्दी ठीक किया जा सके।
उनका कहना है कि शुरुआत में ही अगर मानसिक बीमारी का पता चल जाए तो उसे जल्दी ठीक किया जा सकता है| इस तरह के शिविर आयोजित करने का प्रमुख उद्देश्य लोगों को काउंसलिंग के जरिये जागरूक करना और इलाज के लिए प्रेरित करना है, क्योंकि लोग अनजाने में भूत-प्रेत और झाड़-फूंक के चक्कर में बीमारी को गंभीर बना देते हैं। शिविर में जो लोग आयेंगे उनको दवा देने के साथ ही बराबर फालोअप भी किया जाता है।
मानसिक स्वास्थय जागरूकता सप्ताह:
लखनऊ जिले में विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। 9 अक्टूबर को बख्शी का तालाब विकास खंड में मानसिक स्वस्थ्य जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है| 10 अक्टूबर को मानसिक स्वास्थय दिवस के अवसर पर मुख्य कार्यक्रम क्रिश्चियन कॉलेज मैदान में आयोजित किया जाएगा। जिसमें क्रिश्चियन कॉलेज और नारी शिक्षा निकेतन के इंटरमीडिएट व स्नातक के विद्यार्थियों द्वारा मानव श्रंखला बनायी जाएगी।
कार्यक्रम का शुभारम्भ वित्त मंत्री राजेश अग्रवाल, चिकित्सा एवं स्वास्थय (स्वतंत्र प्रभार) राज्य मंत्री महेंद्र सिंह और विधि मंत्री बृजेश पाठक करेंगे। इस अवसर पर जिलाधिकारी लखनऊ, मिशन निदेशक, राष्ट्रीय स्वास्थय मिशन पंकज कुमार और स्वास्थय एवं परिवार कल्याण महानिदेशक, मुख्य चिकित्साधिकारी लखनऊ उपस्थित रहेंगे। कार्यक्रम को डॉ. पी.के श्रीवास्तव व स्टेट हेड मानसिक स्वास्थय डॉ. सुनील पाण्डेय विद्यार्थियों को संबोधित करेंगे।
10 अक्टूबर को ही रानी लक्ष्मी बाई अस्पताल, राजाजीपुरम में में एक कैंप का आयोजन किया जायेगा जिसका शुभारम्भ लखनऊ मध्य क्षेत्र से विधायक माननीय सुरेश श्रीवास्तव करेंगे। 11 अक्टूबर को प्रातः 10 बजे से शाहमीना रोड पर “दुआ से दवा तक” कार्यक्रम के अंतर्गत शिविर का आयोजन किया जायेगा। दोपहर में 1 बजे से नेशनल कॉलेज डिग्री कॉलेज के विद्यार्थिओं के लिए एक उन्मुखीकरण कार्यक्रम का आयोजन किया जायेगा।
12 अक्टूबर को काकोरी विकासखंड में तथा 13 अक्टूबर को राजाजीपुरम के वृद्धाश्रम में मानसिक स्वास्थय शिविर का आयोजन किया जायेगा। 15 अक्टूबर को जी०सी०आर०जी कॉलेज में एक मानसिक स्वास्थय जागरूकता विषय पर एक संगोष्ठी का आयोजन किया जाएगा। संगोष्ठी में आये हुए विद्यार्थियों को यदि कोई मानसिक समस्या है तो विशेषज्ञों द्वारा उनकी काउंसलिंग की जाएगी। 15-16 अक्टूबर को गोमतीनगर के एक होटल में एपिलेप्सी पर 2 दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया जायेगा। इस कार्यशाला का उद्घाटन स्वास्थय सचिव, उत्तर प्रदेश वी०हेकाली झिमोमी द्वारा किया जायेगा। इस कार्यशाला में दिल्ली से आये वक्ता जानकारियां साझा करेंगे।
मानसिक बीमारी के लक्षण:
उदास या सुस्त रहना, बेवजह शक करना, चिंता, घबराहट, उलझन, बेचैनी, अकारण भय लगना या बार-बार बुरा होने का विचार आना, झुंझलाहट, किसी काम में मन न लगना, नींद न आना, याददाश्त में कमी, आत्महत्या का प्रयास करना, बेहोशी/मिर्गी के दौरे पड़ना, नशे की लत होना, सिर दर्द या सिर में भारीपन बना रहना, भूत-प्रेत की बातें करना, ऐसी आवाजें सुनना जो किसी और को न सुनाई देती हों आदि। इनमें से किसी भी लक्षण के होने पर तुंरत ही बिना किसी संकोच के मनोचिकित्सक से संपर्क करें ताकि समय रहते ही उचित इलाज से मानसिक स्वास्थ्य में सुधार लाया जा सके।







