शाहिद राईन एक राजनीतिक विश्लेषक, लेखक और कवित्व के गुणों का संगम हैं। दरअसल, बुंदेलखंड से पिछड़े क्षेत्र में समाज सेवा के माध्यम से वह वहाँ के लिये कुछ विशेष करना चाहते हैं। तत्कालीन परिस्थितियों को शब्दों से पिरोने की कला में वो माहिर हैं: –आने वाला यूपी की राजनीति में जो तूफान है।
आँधी बनकर निकल पड़ा, वो तो शिवपाल है।।
अपनों के दिये ज़ख्मों के बीच जो रचने जा रहा इतिहास है।
चेहरे पे मुस्कान लिये निकल पड़ा, वो तो शिवपाल है।।
संघर्षों से जिसका नाता है दिल और धड़कनों का।
आमजनों का दर्द लिये निकल पड़ा, वो तो शिवपाल है।।
समाजवाद की सुबह को ‘अंधेरे’ से ठानी थी जंग जिसने।
आज फिर उजियारा लाने निकल पड़ा, वो तो शिवपाल है।।
– शाहिद राईन







